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सौर्य परम्परा, खेल व पुरस्कार आदि

शौर्य परम्परा  उत्तराखंड को न केवल “देवभूमि” बल्कि यहां के युवाओं के अदम्य साहस और देशप्रेम के कारण “वीरभूमि” भी कहा जाता है। भारतीय सेना में उत्तराखंड के सैन्य योगदान का एक लंबा और अत्यंत गौरवशाली इतिहास रहा है, जिसने देश को कई महान सैनिक दिए हैं। राज्य की सैन्य परंपरा मुख्य रूप से दो … Read more

विज्ञान-प्रौद्योगिकी, पर्यावरण (गंगा) व प्राचीन माप-तौल

विज्ञान और प्रौद्योगिकी उत्तराखंड अपनी विशिष्ट हिमालयी भौगोलिक स्थिति के कारण वैज्ञानिक अनुसंधान, खगोल विज्ञान और पर्यावरण प्रौद्योगिकी के लिए एक आदर्श केंद्र है। राज्य में वैज्ञानिक गतिविधियों और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद’ (UCOST) नोडल एजेंसी के रूप में कार्यरत है। यूकोस्ट (UCOST) द्वारा सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के … Read more

प्रमुख व्यक्तित्व

उत्तराखंड के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी उत्तराखंड की वीर भूमि ने देश की आजादी के आंदोलनों में अपनी महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय भूमिका निभाई है। चम्पावत जिले के विशुंग गांव में जन्मे कालू सिंह महारा को उत्तराखंड का “प्रथम स्वतंत्रता सेनानी” माना जाता है। कालू सिंह महारा ने 1857 की क्रांति के दौरान कुमाऊं क्षेत्र में अंग्रेजों … Read more

संगठन, संस्थान व संग्रहालय

प्रमुख संगठन उत्तराखंड के सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक उत्थान में विभिन्न स्थानीय व प्रादेशिक संगठनों ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। वर्ष 1870 में अल्मोड़ा में स्थापित ‘डिबेटिंग क्लब’ को उत्तराखंड में राजनीतिक और सामाजिक चेतना का प्रारंभिक मंच माना जाता है। पंडित गोविंद बल्लभ पंत और हरगोविंद पंत के प्रयासों से वर्ष 1903 में … Read more

शिक्षा, भाषा, साहित्य, पुस्तकें एवं पत्र-पत्रिकाएँ

उत्तराखंड में शिक्षा का विकास उत्तराखंड में शिक्षा का इतिहास अत्यंत समृद्ध है, जहाँ प्राचीन काल से ही कुटीर, आश्रमों और पारंपरिक पाठशालाओं के माध्यम से ज्ञान का प्रसार होता रहा है। ब्रिटिश काल के दौरान पर्वतीय क्षेत्र की जलवायु से प्रभावित होकर अंग्रेजों ने देहरादून, मसूरी और नैनीताल जैसे शहरों को प्रमुख स्कूली शिक्षा … Read more

उद्योग एवं औद्योगिक विकास

पारंपरिक उद्योग उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता में पारंपरिक उद्योगों व कुटीर शिल्पों का हमेशा से महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ये पारंपरिक उद्योग पूरी तरह से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, वनस्पतियों और प्राचीन कलात्मक कौशल पर आधारित हैं। राज्य में ऊनी वस्त्र उद्योग सबसे प्रमुख पारंपरिक उद्योगों में से … Read more

कल्याणकारी योजनाएँ

उत्तराखंड: शिक्षा संबंधी योजनाएँ उत्तराखंड में शिक्षा के विकास और अवसरों की समानता को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 प्रभावी रूप से लागू है। राज्य में प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र प्रायोजित ‘समग्र शिक्षा अभियान’ एक मुख्य एकीकृत योजना के रूप में संचालित है। इस … Read more

आर्थिक व्यवस्था

उत्तराखंड राज्य की अर्थव्यवस्था उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था एक विकासशील अर्थव्यवस्था है, जिसे पारंपरिक रूप से ‘मनी ऑर्डर अर्थव्यवस्था’ कहा जाता था। अतीत में राज्य की आर्थिक स्थिति काफी हद तक प्रवासियों द्वारा घर भेजे जाने वाले धन (Remittances) पर निर्भर थी। सन 2000 में राज्य के गठन के बाद पर्यटन, जलविद्युत और औद्योगिक विकास ने … Read more

ऊर्जा संसाधन

उत्तराखंड: जल विद्युत परियोजनाएँ उत्तराखंड अपनी प्रचुर जल संपदा और पर्वतीय स्थलाकृति के कारण जलविद्युत उत्पादन के लिए अपार क्षमता रखता है। राज्य की प्रचुर उत्पादन क्षमता के कारण ही उत्तराखंड को “ऊर्जा प्रदेश” के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड की अनुमानित कुल जलविद्युत उत्पादन क्षमता 25,000 … Read more

परिवहन तंत्र

उत्तराखंड: सड़क परिवहन उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए सड़क परिवहन जीवन रेखा के समान है। राज्य में उबड़-खाबड़ और जटिल भौगोलिक संरचना के कारण अधिकांश क्षेत्रों में परिवहन का मुख्य साधन केवल सड़कें ही हैं। उत्तराखंड में सड़क नेटवर्क को राष्ट्रीय राजमार्ग (NH), राज्य राजमार्ग (SH), जिला मुख्य सड़कें … Read more

अनुसूचित जाति एवं जनजाति

उत्तराखंड: प्रमुख जनजातियाँ उत्तराखंड में वर्ष 1967 में पांच जनजातियों—थारू, जौनसारी, भोटिया, बुक्सा और राजी को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिया गया था। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जनजातियों का हिस्सा लगभग 9 प्रतिशत है। राज्य में सबसे अधिक जनजातीय आबादी ऊधम सिंह नगर जिले में और … Read more

जनसंख्या एवं नगरीकरण

उत्तराखंड: जनसांख्यिकीय विशेषताएँ उत्तराखंड की जनसांख्यिकी की विशेषताएं मुख्य रूप से वर्ष 2011 में आयोजित राष्ट्रीय जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित हैं। जनगणना 2011 के अंतिम आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड राज्य की कुल जनसंख्या 1 करोड़ 86 हजार 292 (10,086,292) दर्ज की गई है। भारत की कुल जनसंख्या के प्रतिशत के रूप में देखा … Read more

सांस्कृतिक तत्व

लोक कला और शिल्प उत्तराखंड की लोक कला और हस्तशिल्प यहाँ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और प्राकृतिक परिवेश को दर्शाते हैं। राज्य की हस्तशिल्प परंपरा में स्थानीय स्तर पर मिलने वाली प्राकृतिक सामग्रियों का बखूबी उपयोग किया जाता है। ‘ऐपण’ (Aipan) उत्तराखंड की सबसे प्रसिद्ध और पारंपरिक रंगोली कला है, जो कुमाऊं क्षेत्र में … Read more

प्रमुख नगर, पर्यटन एवं धार्मिक स्थल

उत्तराखंड के प्रमुख नगर उत्तराखंड राज्य विविध संस्कृतियों, ऐतिहासिक धरोहरों और अपनी प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण नगरों का घर है। राज्य के ये प्रमुख नगर न केवल प्रशासनिक केंद्र हैं बल्कि पर्यटन, व्यापार और धार्मिक आस्था के महत्वपूर्ण गढ़ हैं। देहरादून इस खूबसूरत पहाड़ी राज्य की राजधानी होने के साथ-साथ यहाँ का सबसे बड़ा नगर … Read more

मिट्टी, कृषि, पशुपालन एवं सिंचाई

मिट्टी के प्रकार  उत्तराखंड की मिट्टी यहाँ की भौगोलिक संरचना, जलवायु और वनस्पतियों से गहराई से प्रभावित है। राज्य की विविध भौगोलिक परिस्थितियाँ अलग-अलग प्रकार की मृदाओं को जन्म देती हैं। नदी घाटियों और तराई क्षेत्रों की मिट्टी आमतौर पर बहुत अधिक उपजाऊ होती है। इसके विपरीत, पर्वतीय ढलानों की मिट्टी कम उपजाऊ और कटाव … Read more

खनिज सम्पदा

उत्तराखंड : खनिज संपदा  उत्तराखंड राज्य अपनी विशिष्ट भूगर्भीय संरचना के कारण विभिन्न प्रकार के अधात्विक और औद्योगिक खनिजों से समृद्ध है। राज्य की नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी को ध्यान में रखते हुए खनिजों का दोहन बेहद सीमित और नियंत्रित तरीके से किया जाता है। उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों को मिलाकर खनिजों की उपलब्धता … Read more

वन, वन-आंदोलन व वन्य-जीव

उत्तराखंड के वनों के प्रकार उत्तराखंड अपनी समृद्ध और अनूठी जैव विविधता के लिए जाना जाता है, जहां ऊंचाई और जलवायु के अनुसार विभिन्न प्रकार के वन पाए जाते हैं। राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का एक बहुत बड़ा हिस्सा वनों से आच्छादित है, जो पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार हैं। ऊंचाई के … Read more

नदी तंत्र, झीलें, ग्लेशियर, कुण्ड व प्रपात

नदी तंत्र  उत्तराखंड को जल संसाधनों की प्रचुरता के कारण नदियों का मायका माना जाता है, जहाँ से उत्तर भारत की कई बारहमासी नदियाँ निकलती हैं। राज्य की नदी प्रणालियों को मुख्य रूप से तीन प्रमुख अपवाह तंत्रों—गंगा तंत्र, यमुना तंत्र और काली (शारदा) तंत्र में विभाजित किया गया है। यमुना नदी तंत्र राज्य के … Read more

उत्तराखंड का भूगोल

भौतिक संरचना, जलवायु एवं प्राकृतिक आपदाएँ भौगोलिक विशेषताएँ उत्तराखंड अपनी अनूठी और बेहद विविध भौगोलिक विशेषताओं के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है। हिमालय की गोद में बसे इस राज्य में ऊंचे पर्वत शिखर, गहरी घाटियां, विशाल हिमनद (ग्लेशियर) और उपजाऊ मैदान पाए जाते हैं। अक्षांशीय दृष्टि से उत्तराखंड 28°43′ से 31°27′ उत्तरी अक्षांश के … Read more

उत्तराखंड का आधुनिक इतिहास

उत्तराखंड का आधुनिक इतिहास मुख्य रूप से गोरखा शासन के अंत, ब्रिटिश काल के आगमन और टिहरी रियासत के घटनाक्रमों पर आधारित है। वर्ष 1814 से 1816 के बीच ईस्ट इंडिया कंपनी और गोरखाओं के विस्तारवादी रवैये के कारण आंग्ल-नेपाल युद्ध हुआ था। लॉर्ड हेस्टिंग्स ने 1 नवंबर 1814 को गोरखाओं के खिलाफ आधिकारिक रूप … Read more

ऐतिहासिक अध्ययन

प्रागैतिहासिक काल उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल मानव सभ्यता के शुरुआती विकास और आदिमानवों की गतिविधियों को प्रदर्शित करता है। इस काल के अध्ययन के लिए मुख्य रूप से पुरातात्विक साक्ष्य जैसे शैलचित्र, गुफाएं, पत्थर के उपकरण और प्राचीन मृदभांड आधार हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित ‘लाखू उडियार’ प्रागैतिहासिक काल के शैलचित्रों का सबसे … Read more

उत्तराखंड का एक संक्षिप्त अवलोकन

उत्तराखंड भारत के उत्तर-पश्चिम हिस्से में स्थित एक बेहद खूबसूरत और पहाड़ी राज्य है। इस राज्य की स्थापना 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर भारत के 27वें राज्य के रूप में हुई थी। प्रारंभ में इस राज्य का नाम ‘उत्तरांचल’ रखा गया था, जिसे वर्ष 2007 में बदलकर ‘उत्तराखंड’ कर दिया गया। … Read more