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हर्षवर्धन, चालुक्य वंश , पल्लव वंश , राष्ट्रकूट वंश 

हर्षवर्धन और उसका साम्राज्य गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद उत्तर भारत की राजनीतिक अस्थिरता के बीच पुष्यभूति वंश के हर्षवर्धन का उदय हुआ। हर्षवर्धन का शासनकाल 606 ईस्वी से 647 ईस्वी तक रहा, जिसे भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण संक्रमण काल माना जाता है। पुष्यभूति वंश (या वर्धन वंश) की स्थापना पुष्यभूति ने 5वीं … Read more

गुप्त और उत्तर-गुप्त काल

गुप्त काल – प्रशासन गुप्त काल (319 ईस्वी – 550 ईस्वी) को भारतीय इतिहास का ‘स्वर्ण युग’ माना जाता है। इस काल का प्रशासन मौर्यों की तुलना में अधिक विकेन्द्रीकृत, प्रभावी और सुव्यवस्थित प्रकृति का था। गुप्त शासक बहुत शक्तिशाली थे और वे ‘महाराजाधिराज’ तथा ‘परमेश्वर’ जैसी भव्य उपाधियाँ धारण करते थे। राजा को देवताओं … Read more

मौर्योत्तर काल, शक राजवंश , कुषाण राजवंश,

‘इंडो-ग्रीक‘ (हिन्द-यूनानी) मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत की उत्तर-पश्चिमी सीमा पर आक्रमण करने वाले विदेशी शासकों में इंडो-ग्रीक (हिन्द-यूनानी) सबसे पहले थे। इन यूनानी शासकों को भारतीय इतिहास और समकालीन साहित्य में ‘यवन’ के नाम से भी जाना जाता है। ये मूल रूप से बैक्ट्रिया (आधुनिक उत्तरी अफगानिस्तान और मध्य एशिया का क्षेत्र) … Read more

उत्तर-मौर्य काल – शुंग वंश, कण्व वंश

 शुंग वंश मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद मगध की गद्दी पर जिस नए राजवंश का उदय हुआ, उसे इतिहास में ‘शुंग राजवंश’ कहा जाता है। इस राजवंश की स्थापना 185 ईसा पूर्व में मौर्य सेना के प्रधान सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने अंतिम मौर्य सम्राट वृहद्रथ की हत्या करके की थी। शुंग राजवंश के उदय … Read more

अशोक और बौद्ध धर्म का प्रसार

सम्राट अशोक मौर्य वंश के तीसरे और प्राचीन भारतीय इतिहास के सबसे महान शासकों में से एक थे। अपने शासनकाल के शुरुआती वर्षों में वे एक आक्रामक नीति का पालन करते हुए साम्राज्य विस्तार में व्यस्त थे। उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ 261 ईसा पूर्व में लड़ा गया भीषण ‘कलिंग युद्ध’ सिद्ध हुआ। इस … Read more

मौर्य और उत्तर-मौर्य काल

मौर्य साम्राज्य का परिचय मौर्य साम्राज्य की स्थापना 322 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा की गई थी, जो भारतीय इतिहास का पहला महान और अखिल भारतीय साम्राज्य था। इस साम्राज्य ने मगध के क्रूर और अत्याचारी नंद वंश के अंतिम शासक घनानंद को पराजित कर सत्ता अपने हाथों में ली थी। मौर्य साम्राज्य की … Read more

मगध का उत्थान

छठी शताब्दी ईसा पूर्व में सोलह महाजनपदों के उदय के बाद, मगध एक शक्तिशाली राज्य के रूप में उभरा और संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप पर प्रभुत्व स्थापित किया। प्राचीन मगध राज्य वर्तमान बिहार के पटना और गया जिलों के क्षेत्रों में विस्तृत था और यह गंगा नदी के दक्षिण में स्थित था। छठी शताब्दी ईसा पूर्व … Read more

वैदिक काल में ‘धार्मिक विकास’

वैदिक काल के दौरान भारत में धार्मिक विश्वासों, प्रथाओं और दार्शनिक विचारों में बहुत महत्वपूर्ण बदलाव और विकास हुए। इतिहासकार इस धार्मिक विकास को मुख्य रूप से दो भागों में बांटते हैं: प्रारंभिक वैदिक काल और उत्तर वैदिक काल। प्रारंभिक या ऋग्वैदिक काल का धार्मिक जीवन पूरी तरह से ऋग्वेद में वर्णित मान्यताओं पर आधारित … Read more

वैदिक काल और महाजनपद

प्रारंभिक और उत्तर वैदिक काल वैदिक काल भारतीय इतिहास का वह महत्वपूर्ण कालखंड है जब भारतीय उपमहाद्वीप में वेदों की रचना हुई और वैदिक संस्कृति फली-फूली। इस पूरे कालखंड को मुख्य रूप से दो भागों – ऋग्वैदिक काल (1500-1000 ईसा पूर्व) और उत्तर वैदिक काल (1000-600 ईसा पूर्व) में विभाजित किया गया है। ऋग्वैदिक या … Read more

सिंधु घाटी सभ्यता

 उत्पत्ति और विस्तार  सिंधु घाटी सभ्यता भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे प्राचीन और विश्व की प्रमुख प्रारंभिक शहरी सभ्यताओं में से एक है। इस ऐतिहासिक सभ्यता को इसके सबसे पहले खोजे गए स्थल के कारण ‘हड़प्पा सभ्यता’ के नाम से भी जाना जाता है। यह प्राचीन सभ्यता मुख्य रूप से लगभग 2500 ईसा पूर्व से 1750 … Read more

प्रागैतिहासिक काल

पाषाण युग पाषाण युग मानव इतिहास का वह प्रारंभिक काल है जब मनुष्य मुख्य रूप से पत्थरों से बने औजारों का उपयोग करता था। यह मानव सभ्यता के विकास की मजबूत नींव रखने वाला इतिहास का सबसे लंबा और प्रारंभिक चरण माना जाता है। इस युग की शुरुआत लगभग 5 मिलियन वर्ष पूर्व से होकर … Read more