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सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930–1934), भारत छोड़ो आंदोलन (1942)

सविनय अवज्ञा आंदोलन, जिसे ‘नमक सत्याग्रह’ के नाम से भी जाना जाता है, महात्मा गांधी द्वारा 6 अप्रैल 1930 को प्रसिद्ध दांडी यात्रा के बाद शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश नमक कानून का विरोध करना और भारत के लिए पूर्ण स्वराज (पूर्ण स्वतंत्रता) की मांग करना था। मुख्य कारण (Causes) भारतीय मांगों … Read more

असहयोग आंदोलन (1920–1922)

महात्मा गांधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन के विरोध में 1920 में असहयोग आंदोलन की शुरुआत की थी। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य अहिंसक तरीकों से ब्रिटिश सरकार का बहिष्कार करना और स्वदेशी को बढ़ावा देना था। मुख्य कारण (Causes) जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919): अमृतसर में निर्दोष और निहत्थे लोगों पर ब्रिटिश सेना … Read more

स्वदेशी आंदोलन (1905–1908):

पृष्ठभूमि और बंगाल का विभाजन: विभाजन का निर्णय: वायसराय लॉर्ड कर्जन ने प्रशासनिक दक्षता का बहाना बनाकर बंगाल को दो हिस्सों—पूर्वी बंगाल और असम (मुस्लिम-बहुसंख्यक) तथा पश्चिमी बंगाल (हिंदू-बहुसंख्यक)—में बांटने की घोषणा की। वास्तविक उद्देश्य: अंग्रेजों की इस नीति का मुख्य उद्देश्य “फूट डालो और राज करो” के जरिए भारतीय राष्ट्रीय एकता को कमजोर करना … Read more

1857 का विद्रोह (सिपाही विद्रोह)

अवलोकन और विस्तार भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम: 1857 का विद्रोह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के खिलाफ पहला बड़ा और संगठित प्रतिरोध था। शुरुआत की तारीख और स्थान: यह विद्रोह आधिकारिक तौर पर 10 मई 1857 को मेरठ में शुरू हुआ, जब भारतीय सिपाहियों ने अपने ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ बगावत कर दी। … Read more

संवैधानिक वार्ताएँ एवं स्वतंत्रता के प्रस्ताव (1944–1946)

सी.आर. फार्मूला और गांधी-जिन्ना वार्ता (C.R. Formula & Gandhi-Jinnah Talks 1944) सी.आर. फार्मूला (1944): सी. राजगोपालाचारी ने मुस्लिम लीग और कांग्रेस के बीच राजनीतिक गतिरोध समाप्त करने हेतु एक समझौते का खाका तैयार किया। लीग से समर्थन की अपील: इस फार्मूले में मुस्लिम लीग से स्वतंत्रता की मांग का समर्थन करने तथा अंतरिम सरकार में … Read more

किसान, आदिवासी और मजदूर आंदोलन (Peasant, Tribal & Working-Class Movements)

प्रमुख किसान आंदोलन और बारडोली सत्याग्रह (Peasant Movements) नील विद्रोह (1859-60): बंगाल में दिगंबर और विष्णु बिस्वास के नेतृत्व में किसानों ने जबरन नील खेती के खिलाफ सफल आंदोलन किया। पावना विद्रोह (1870-80): बंगाल के किसानों ने जमींदारों द्वारा अत्यधिक कर वृद्धि और बेदखली के खिलाफ कानूनी संघर्ष लड़ा। दक्कन दंगे (1875): महाराष्ट्र में किसानों … Read more

रोलट एक्ट, जलियांवाला बाग और खिलाफत आंदोलन (1919–1934)

मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार / भारत सरकार अधिनियम 1919 प्रांतों में द्वैध शासन (Dyarchy): प्रांतीय विषयों को ‘आरक्षित’ (Reserved) और ‘हस्तांतरित’ (Transferred) वर्गों में बांटकर द्वैध शासन लागू किया गया। द्विसदनीय विधायिका: केंद्र में पहली बार द्विसदनीय विधायिका (राज्य परिषद और केंद्रीय विधानसभा) का गठन किया गया। पृथक निर्वाचन का विस्तार: साम्प्रदायिक निर्वाचन प्रणाली का विस्तार कर … Read more

मुस्लिम लीग की स्थापना और मार्ले-मिंटो सुधार (1906–1909)

मुस्लिम लीग की स्थापना (Establishment of Muslim League) शिमला शिष्टमंडल (1906): आगा खान के नेतृत्व में मुस्लिम शिष्टमंडल ने वायसराय लॉर्ड मिंटो से मिलकर राजनीतिक अधिकारों की मांग की। मुस्लिम लीग का गठन: 30 दिसंबर 1906 को ढाका में नवाब सलीमुल्लाह की अध्यक्षता वाले सम्मेलन में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग बनी। प्रथम अध्यक्ष एवं मुख्यालय: … Read more

प्रारंभिक राजनीतिक संगठन और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885)

कांग्रेस-पूर्व राजनीतिक संगठन (Pre-INC Organizations) बंगभाषा प्रकाशिका सभा (1836): राजा राममोहन राय के सहयोगियों द्वारा गठित; यह प्रशासनिक सुधारों की मांग करने वाली भारत की पहली राजनीतिक संस्था थी। लैंडहोल्डर्स सोसाइटी (1838): द्वारकानाथ टैगोर द्वारा कलकत्ता में स्थापित; इसका मुख्य उद्देश्य जमींदारों के कानूनी और आर्थिक हितों की रक्षा करना था। ब्रिटिश इंडिया सोसाइटी (1839): … Read more

1857 का विद्रोह (प्रथम स्वतंत्रता संग्राम)

कारण (Causes) राजनीतिक कारण: लॉर्ड डलहौजी की हड़प नीति (Doctrine of Lapse) ने सतारा, झांसी और नागपुर जैसी रियासतों को छीनकर राजाओं में भारी असंतोष फैलाया। अवध का अधिग्रहण: 1856 में कुशासन का आरोप लगाकर अवध को ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाने से वहां के नवाब और सैनिक बेहद क्रोधित हुए। आर्थिक शोषण: अत्यधिक भू-राजस्व नीतियों … Read more