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लोकपाल और लोकायुक्त (Lokpal and Lokayuktas)

अवधारणा और उद्भव: लोकपाल (केंद्र में) और लोकायुक्त (राज्यों में) नागरिक शिकायतों और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के भ्रष्टाचार की जांच के लिए सर्वोच्च ओम्बुड्समैन (Ombudsman) संस्थाएं हैं।

शब्द का प्रथम प्रयोग: भारत में ‘लोकपाल’ और ‘लोकायुक्त’ शब्द का पहली बार प्रयोग 1963 में प्रख्यात विधिवेत्ता डॉ. एल. एम. सिंघवी द्वारा किया गया था।

प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC): 1966 में मोरारजी देसाई की अध्यक्षता वाले प्रथम ARC ने मंत्रियों और अधिकारियों के भ्रष्टाचार की जांच हेतु लोकपाल मॉडल की पहली औपचारिक सिफारिश की।

लोकायुक्त की शुरुआत: महाराष्ट्र 1971 में लोकायुक्त संस्था की स्थापना करने वाला देश का पहला राज्य बना, जिसके बाद ओडिशा और राजस्थान ने इसे लागू किया।

अन्ना हजारे का आंदोलन: वर्ष 2011 में ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ के ऐतिहासिक जन-आंदोलन के भारी दबाव के बाद संसद ने भ्रष्टाचार विरोधी सख्त कानून की रूपरेखा तैयार की।

लोकपाल अधिनियम 2013: संसद ने ‘लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013’ पारित किया, जो 16 जनवरी 2014 से पूरे देश में आधिकारिक रूप से लागू हुआ।

लोकपाल की संरचना: लोकपाल एक बहु-सदस्यीय संस्था है, जिसमें एक अध्यक्ष (CJI/सुप्रीम कोर्ट जज/प्रख्यात व्यक्ति) और अधिकतम 8 सदस्य (50% न्यायिक सदस्य) होते हैं।

सामाजिक प्रतिनिधित्व: लोकपाल के कुल 8 सदस्यों में से कम से कम 50% सदस्य SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक वर्ग और महिलाओं में से होना अनिवार्य है।

नियुक्ति चयन समिति: लोकपाल के अध्यक्ष व सदस्यों का चयन 5-सदस्यीय समिति (प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष का नेता, CJI और एक प्रख्यात न्यायविद) करती है।

कार्यकाल और आयु: लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल पदभार ग्रहण से 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो भी पहले पूरी हो) तक होता है।

प्रधानमंत्री भी जांच के दायरे में: लोकपाल प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, संसद सदस्यों (सांसदों) और केंद्र सरकार के ग्रुप A, B, C, D अधिकारियों के भ्रष्टाचार की जांच कर सकता है।

प्रधानमंत्री पर कुछ अपवाद: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, बाहरी व आंतरिक सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष से जुड़े नीतिगत भ्रष्टाचार के मामलों में प्रधानमंत्री के खिलाफ जांच सीमित है।

जांच और अभियोजन शक्तियां: लोकपाल को सिविल कोर्ट की शक्तियां प्राप्त हैं; यह भ्रष्टाचार के मामलों की प्राथमिक जांच CBI या अपनी स्वयं की जांच शाखा से करा सकता है।

लोकायुक्त का राज्य स्तर पर गठन: 2013 के कानून ने सभी राज्यों के लिए 1 वर्ष के भीतर अपने-अपने राज्यों में लोकायुक्त का गठन करना कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया।

भ्रष्टाचार मुक्त भारत का लक्ष्य: लोकपाल और लोकायुक्त संस्थाएं उच्च सार्वजनिक पदों पर शुचिता, सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता स्थापित करने का सबसे मजबूत कानूनी तंत्र हैं।

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