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संसदीय प्रणाली (Parliamentary System)

वेस्टमिंस्टर मॉडल: भारत ने ब्रिटिश संसदीय प्रणाली को अपनाया है, जिसे वेस्टमिंस्टर मॉडल भी कहा जाता है, जहाँ कार्यपालिका विधायिका का ही एक अभिन्न अंग होती है।

दोहरी कार्यपालिका: इस प्रणाली में राष्ट्रपति नाममात्र (औपचारिक) का प्रमुख होता है, जबकि प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद वास्तविक कार्यपालिका शक्ति का उपभोग करती है।

सामूहिक उत्तरदायित्व: मंत्रिपरिषद अपने सभी नीतिगत निर्णयों और कार्यों के लिए लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जो इसकी रीढ़ है।

बहुमत दल का शासन: आम चुनावों में निचले सदन (लोकसभा) में बहुमत प्राप्त करने वाले राजनीतिक दल या गठबंधन को ही सरकार बनाने का अधिकार मिलता है।

प्रधानमंत्री का केंद्रीय नेतृत्व: प्रधानमंत्री कैबिनेट की अध्यक्षता करता है, सभी मंत्रालयों के कार्यों में समन्वय रखता है और सरकार की दिशा व नीतियों को निर्धारित करता है।

मंत्रियों की सदस्यता: मंत्री बनने के लिए संसद के किसी भी सदन का सदस्य होना अनिवार्य है; गैर-सदस्य को छह महीने के भीतर सदस्यता प्राप्त करनी होती है।

सदन का विघटन: प्रधानमंत्री की औपचारिक सलाह पर राष्ट्रपति कार्यकाल समाप्त होने से पहले भी लोकसभा को भंग करके नए चुनाव कराने की घोषणा कर सकते हैं।

गोपनीयता का सिद्धांत: मंत्री पदभार ग्रहण करते समय गोपनीयता की शपथ लेते हैं, जिससे कैबिनेट की बहसों और रणनीतियों की गोपनीयता आधिकारिक रूप से बनी रहती है।

विधायिका और कार्यपालिका समन्वय: कार्यपालिका के सदस्य संसद में बैठते हैं, जिससे कानून निर्माण और उसके क्रियान्वयन में बेहतर तालमेल और गति बनी रहती है।

तानाशाही पर नियंत्रण: संसद में विपक्षी दल, प्रश्नकाल, शून्यकाल और अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से सरकार पर निरंतर निगरानी रखते हैं और निरंकुशता रोकते हैं।

छाया मंत्रिमंडल का अभाव: ब्रिटेन के विपरीत भारत में विपक्ष द्वारा औपचारिक ‘शैडो कैबिनेट’ की व्यवस्था नहीं अपनाई गई है, हालांकि विपक्ष मुखर रहता है।

संसदीय संप्रभुता की सीमाएं: ब्रिटेन की संप्रभु संसद की तुलना में भारतीय संसद लिखित संविधान, मौलिक अधिकारों और न्यायिक समीक्षा के दायरे में बंधी हुई है।

स्थिरता बनाम उत्तरदायित्व: संसदीय व्यवस्था में अमेरिकी राष्ट्रपति प्रणाली जैसी पूर्ण स्थिरता नहीं होती, परंतु यह जनता और विधायिका के प्रति अत्यधिक उत्तरदायी होती है।

विधि का शासन: यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि सभी कार्यकारी नीतियां संसद द्वारा पारित कानूनों और संवैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप ही संचालित की जाएं।

विविधता का प्रतिनिधित्व: बहुदलीय और विशाल विविधता वाले देश में यह विभिन्न क्षेत्रों, जातियों और वर्गों को सरकार में प्रतिनिधित्व देने का सबसे प्रभावी मंच है।

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