चक्रवात की परिभाषा: केंद्र में अत्यंत निम्न वायुदाब और बाहर की ओर बढ़ते उच्च वायुदाब से घिरा एक बंद समदाब रेखाओं वाला चक्राकार वायुमंडलीय परिसंचरण तंत्र है।
पवनों की दिशा: कोरिओलिस बल के प्रभाव से चक्रवाती पवनों की दिशा उत्तरी गोलार्ध में वामावर्त (घड़ी की सुई के विपरीत) और दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिणावर्त होती है।
दाब प्रवणता बल (PGF): केंद्र में अत्यधिक कम वायुदाब के कारण बाहर से केंद्र की ओर तीव्र ‘दाब प्रवणता’ बनती है, जिससे हवाएं अंदर की ओर तेजी से घूमती हैं।
प्रतिचक्रवात से भिन्नता: चक्रवात अशांत मौसम और वर्षा लाते हैं, जबकि प्रतिचक्रवात में केंद्र में उच्च दाब, बाहर निम्न दाब और शांत व मेघविहीन मौसम होता है।
ऊर्ध्वाधर वायु गति: चक्रवात के केंद्र में अभिसरित होने वाली हवाएं ऊपर उठती हैं, जिससे बादलों का निर्माण, तीव्र वर्षा और गंभीर मौसमी अशांति पैदा होती है।
भौगोलिक विभाजन: चक्रवातों को उनकी उत्पत्ति और अक्षांशीय स्थिति के आधार पर दो मुख्य वर्गों—’उष्णकटिबंधीय चक्रवात’ और ‘शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात’ में बांटा जाता है।
वायुमंडलीय ऊर्जा निष्कासन: चक्रवात पृथ्वी के ऊष्मा संतुलन तंत्र का हिस्सा हैं, जो अतिरिक्त ऊष्मा और कोणीय संवेग को निम्न अक्षांशों से उच्च अक्षांशों की ओर भेजते हैं।
प्रमुख विनाशकारी प्रभाव: अत्यधिक तीव्र आंधी, मूसलाधार अतिवृष्टि, समुद्र में विनाशकारी तूफानी लहरें (Storm Surges), बाढ़ और जान-माल का व्यापक नुकसान।
आर्थिक प्रभाव: तटीय बुनियादी ढांचे, बिजली ग्रिड, संचार नेटवर्क और कृषि फसलों का भारी विनाश होता है, जिससे तटीय अर्थव्यवस्था को गंभीर क्षति पहुंचती है।
पारिस्थितिक लाभ: चक्रवात शुष्क क्षेत्रों में वर्षा लाते हैं, समुद्री जल का मिश्रण कर पोषक तत्व ऊपर लाते हैं और वैश्विक तापीय असंतुलन को कम करते हैं।