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Tropical Cyclones: Formation, Characteristics and Impact (उष्णकटिबंधीय चक्रवात)

उत्पत्ति क्षेत्र: दोनों गोलार्धों में 5° से 30° अक्षांशों के मध्य केवल गर्म महासागरों के ऊपर बनते हैं; 0°-5° पर कोरिओलिस बल शून्य होने से ये नहीं बनते।

अनिवार्य शर्तें: समुद्री सतह का तापमान न्यूनतम 27°C, पर्याप्त कोरिओलिस बल, ऊर्ध्वाधर पवन अपरूपण (Wind Shear) की कमी और पहले से मौजूद कमजोर निम्न दाब क्षेत्र।

ऊर्जा का मुख्य स्रोत: गर्म समुद्री जल के वाष्पीकरण और ऊपर उठकर संघनन के दौरान निकलने वाली ‘गुप्त ऊष्मा’ (Latent Heat) इस चक्रवात का प्राथमिक ईंधन है।

चक्रवात की आंख (Eye): केंद्र में 10 से 30 किमी चौड़ा शांत, मेघविहीन और वर्षा-रहित क्षेत्र जहाँ शुष्क हवा नीचे उतरती है और वायुदाब न्यूनतम होता है।

नेत्र भित्ति (Eyewall): आंख के ठीक चारों ओर स्थित कपासी-वर्षी (Cumulonimbus) बादलों की विशाल दीवार, जहाँ सबसे विनाशकारी तूफानी पवनें और मूसलाधार वर्षा होती है।

लैंडफॉल और क्षय (Landfall): जब चक्रवात तट पार कर जमीन पर आता है, तो नमी की आपूर्ति रुकने और सतही घर्षण के कारण यह शीघ्र कमजोर होकर समाप्त हो जाता है।

क्षेत्रीय नामकरण: इन्हें हिंद महासागर में चक्रवात (Cyclone), अटलांटिक में हरिकेन (Hurricane), पश्चिमी प्रशांत में टाइफून (Typhoon) और ऑस्ट्रेलिया में विली-विलीज़ कहा जाता है।

तूफानी महोर्मि (Storm Surge): अत्यधिक निम्न दाब और तीव्र पवनों द्वारा तटीय क्षेत्रों में समुद्र का जल स्तर कई मीटर ऊपर उठना, जो सर्वाधिक तबाही मचाता है।

विनाशकारी क्षमता: 120 से 250 किमी/घंटा से अधिक की तूफानी हवाएं पेड़ों, मकानों और खंभों को उखाड़ फेंकती हैं तथा भारी आकस्मिक बाढ़ लाती हैं।

पूर्व चेतावनी प्रणाली: उपग्रह रडार, आईएमडी (IMD) मौसम पूर्वानुमान और समय पर तटीय निकासी प्रबंधन से जनहानि को न्यूनतम करने में बड़ी सफलता मिली है।

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