तापमान व्युत्क्रमण की परिभाषा: सामान्य स्थिति के विपरीत जब क्षोभमंडल में ऊंचाई बढ़ने के साथ तापमान घटने के बजाय बढ़ने लगता है, तो इसे ऋणात्मक ह्रास दर कहते हैं।
आदर्श भौतिक दशाएं: लंबी शीतकालीन रातें, स्वच्छ मेघविहीन आकाश, शांत या स्थिर वायु, शुष्क हवा और बर्फ से ढका धरातल धरातलीय व्युत्क्रमण के लिए अनिवार्य हैं।
धरातलीय/विकिरण व्युत्क्रमण: रात में तीव्र विकिरणी शीतलन से सतह बहुत ठंडी हो जाती है, जिससे जमीन से सटी निचली हवा ठंडी और उसके ऊपर की परत अपेक्षाकृत गर्म रहती है।
घाटी व्युत्क्रमण (Valley Inversion): रात में पर्वतीय ढालों की हवा ठंडी व भारी होकर ‘कैटाबैटिक पवनों’ के रूप में घाटी के तल में भर जाती है, जिससे गर्म हवा ऊपर उठती है।
अधिवहनीय व्युत्क्रमण (Advective): जब कोई गर्म और आर्द्र वायु संहति किसी अत्यधिक ठंडे धरातल या ठंडी समुद्री धारा के ऊपर से क्षैतिज रूप से प्रवाहित होती है।
सब्सिडेंस व्युत्क्रमण (Subsidence): उच्च वायुदाब प्रतिचक्रवातीय क्षेत्रों में जब वायुमंडल की ऊपरी शुष्क हवा नीचे उतरती है और संपीडन से गर्म होकर ऊपर छा जाती है।
कोहरे और धुंध का निर्माण: व्युत्क्रमण से निचली वायु में स्थिरता आती है; धुआं और धूल-कण नीचे ही फंस जाते हैं, जिससे सर्दियों में घना कोहरा या ‘स्मॉग’ (Smog) बनता है।
वायुमंडलीय स्थिरता (Stability): गर्म हवा की ऊपरी परत एक ढक्कन (Cap) का कार्य करती है, जो संवहन धाराओं को रोकती है और वर्षा होने की संभावना को समाप्त करती है।
कृषि एवं बस्तियों पर प्रभाव: घाटी व्युत्क्रमण के पाले (Frost) से बचने के लिए सेब और फलों के बाग तथा मानव बस्तियां घाटी के तल के बजाय ढालों पर बसाई जाती हैं।
वायु प्रदूषण में वृद्धि: औद्योगिक क्षेत्रों में विषैली गैसें और प्रदूषक व्युत्क्रमण परत के नीचे जमीन के पास ही फंसे रह जाते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता अत्यंत घातक हो जाती है।