सी.आर. फार्मूला और गांधी-जिन्ना वार्ता (C.R. Formula & Gandhi-Jinnah Talks 1944)
सी.आर. फार्मूला (1944): सी. राजगोपालाचारी ने मुस्लिम लीग और कांग्रेस के बीच राजनीतिक गतिरोध समाप्त करने हेतु एक समझौते का खाका तैयार किया।
लीग से समर्थन की अपील: इस फार्मूले में मुस्लिम लीग से स्वतंत्रता की मांग का समर्थन करने तथा अंतरिम सरकार में सहयोग देने को कहा गया।
उत्तर-पश्चिम व पूर्व में जनमत संग्रह: स्वतंत्रता के बाद मुस्लिम बहुल उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व क्षेत्रों में पृथक राज्य हेतु जनमत संग्रह की सिफारिश की गई।
गांधी-जिन्ना वार्ता की विफलता: सितंबर 1944 में गांधी-जिन्ना वार्ता हुई, लेकिन जिन्ना ने “दीमक लगे” (moth-eaten) विभाजन का हवाला देकर इसे खारिज कर दिया।
वेवेल योजना और शिमला सम्मेलन (Wavell Plan & Shimla Conference 1945)
वेवेल योजना की घोषणा (जून 1945): वायसराय लॉर्ड वेवेल ने भारत के राजनीतिक गतिरोध को दूर करने हेतु अपनी कार्यकारी परिषद के पुनर्गठन की योजना रखी।
परिषद में समान प्रतिनिधित्व: कार्यकारी परिषद में वायसराय और कमांडर-इन-चीफ को छोड़कर सभी भारतीय होंगे; सवर्ण हिंदुओं और मुसलमानों को समान प्रतिनिधित्व मिलेगा।
शिमला सम्मेलन का आयोजन (1945): वेवेल योजना पर विचार-विमर्श हेतु जून-जुलाई 1945 में शिमला में सभी प्रमुख भारतीय राजनीतिक नेताओं का सम्मेलन हुआ।
जिन्ना की अड़ियल मांग: जिन्ना ने शर्त रखी कि परिषद के सभी मुस्लिम सदस्यों का चयन केवल मुस्लिम लीग ही करेगी, जिसे कांग्रेस ने अस्वीकार कर दिया।
सम्मेलन की विफलता: मुस्लिम लीग के अड़ियल रुख और वेवेल द्वारा वीटो का प्रयोग न करने के कारण शिमला सम्मेलन पूरी तरह विफल हो गया।
कैबिनेट मिशन योजना (Cabinet Mission Plan 1946)
कैबिनेट मिशन का आगमन (मार्च 1946): ब्रिटिश पीएम एटली ने पैथिक लॉरेंस, स्टेफोर्ड क्रिप्स और ए.वी. अलेक्जेंडर का तीन-सदस्यीय उच्चस्तरीय मिशन भारत भेजा।
पाकिस्तान की मांग की अस्वीकृति: मिशन ने पृथक पाकिस्तान की मांग को अव्यवहारिक मानकर पूरी तरह से खारिज कर दिया और त्रि-स्तरीय ढांचा प्रस्तावित किया।
अखिल भारतीय संघ का प्रस्ताव: विदेश, रक्षा और संचार विषयों को संभालने हेतु एक कमजोर केंद्र वाले ‘अखिल भारतीय संघ’ की सिफारिश की।
प्रांतों का समूहन (Grouping): प्रांतों को तीन समूहों में बांटा— समूह ‘क’ (हिंदू बहुल), समूह ‘ख’ (उत्तर-पश्चिम मुस्लिम) और समूह ‘ग’ (उत्तर-पूर्व मुस्लिम)।
संविधान सभा की रूपरेखा: मिशन ने भारत के लिए एक नई संविधान सभा और एक अंतरिम सरकार के गठन का विस्तृत खाका तैयार किया।
संविधान सभा का गठन और अंतरिम सरकार (Constituent Assembly & Interim Govt)
संविधान सभा के चुनाव (जुलाई-अगस्त 1946): कुल 389 सीटों के लिए प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव हुए; कांग्रेस ने 208 और लीग ने 73 सीटें जीतीं।
अंतरिम सरकार का गठन (सितंबर 1946): जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में 2 सितंबर 1946 को अंतरिम सरकार बनी; लीग शुरुआत में शामिल नहीं हुई।
मुस्लिम लीग का बाद में शामिल होना: अक्टूबर 1946 में मुस्लिम लीग सरकार में शामिल हुई, लेकिन उसका उद्देश्य सहयोग के बजाय सरकार को अंदर से रोकना था।
संविधान सभा की पहली बैठक (9 दिसंबर 1946): डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा की अध्यक्षता (अस्थायी) में पहली बैठक हुई; मुस्लिम लीग ने इसका पूर्ण बहिष्कार किया।
प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस और साम्प्रदायिक दंगे (Direct Action Day)
प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस (16 अगस्त 1946): कैबिनेट मिशन की व्याख्या पर विवाद के बाद जिन्ना ने पृथक पाकिस्तान हेतु ‘प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस’ का आह्वान किया।
कोलकाता का भीषण नरसंहार: ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स’ के तहत भयंकर साम्प्रदायिक हिंसा भड़की, जो आगे नोआखाली और बिहार में फैल गई और विभाजन को अपरिहार्य बना दिया।
माउंटबेटन योजना, विभाजन और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम (1947)
माउंटबेटन का आगमन और 3 जून योजना (June 3rd Plan)
लॉर्ड माउंटबेटन का आगमन: मार्च 1947 में लॉर्ड माउंटबेटen अंतिम वायसराय बनकर आए, जिनका मुख्य उद्देश्य शीघ्र सत्ता हस्तांतरण और विभाजन निपटाना था।
एटली की घोषणा (20 फरवरी 1947): ब्रिटिश पीएम क्लेमेंट एटली ने घोषणा की थी कि जून 1948 से पहले भारत को सत्ता सौंप दी जाएगी।
माउंटबेटन योजना (3 जून 1947): भारत और पाकिस्तान के दो अलग-अलग डोमिनियन राज्यों में विभाजन की योजना को औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया गया।
विधानमंडलों द्वारा निर्णय: पंजाब और बंगाल की विधानसभाओं के प्रतिनिधियों को विभाजन पर मतदान करने का अधिकार दिया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार किया।
जनमत संग्रह (Plebiscite): उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में शामिल होने हेतु जनमत संग्रह कराया गया।
सीमा आयोग और रेडक्लिफ रेखा (Boundary Commission & Radcliffe Line)
सीमा आयोग का गठन: पंजाब और बंगाल के क्षेत्रीय परिसीमन के लिए सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो सीमा आयोग गठित किए गए।
रेडक्लिफ रेखा (Radcliffe Line): भारत और पाकिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा का निर्धारण करने वाली काल्पनिक रेखा को रेडक्लिफ रेखा कहा गया।
असंतोषजनक परिसीमन: पर्याप्त समय और भौगोलिक ज्ञान की कमी के कारण सीमा निर्धारण में कई विसंगतियां रहीं, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी भ्रम फैला।
विभाजन की त्रासदी: सीमांकन की अनिश्चितता के कारण लाखों लोगों का विस्थापन हुआ और इतिहास का सबसे भीषण सांप्रदायिक नरसंहार देखने को मिला।
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 (Indian Independence Act 1947)
अधिनियम का पारित होना: ब्रिटिश संसद ने 18 जुलाई 1947 को माउंटबेटन योजना के आधार पर ‘भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947’ पारित किया।
दो स्वतंत्र डोमिनियन: 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नाम से दो पूरी तरह संप्रभु डोमिनियन राज्यों की स्थापना का प्रावधान किया गया।
ब्रिटिश सर्वोच्चता का अंत: देसी रियासतों पर से ब्रिटिश क्राउन की सर्वोच्चता (Paramountcy) को समाप्त कर दिया गया।
गवर्नर-जनरल का पद: जब तक नया संविधान न बने, तब तक दोनों देशों में ब्रिटेन के सम्राट द्वारा नियुक्त गवर्नर-जनरल प्रशासनिक प्रमुख रहेगा।
संविधान सभाओं को संप्रभुता: दोनों डोमिनियन की संविधान सभाओं को अपने-अपने देश का संविधान बनाने और ब्रिटिश कानूनों को निरस्त करने का पूरा अधिकार दिया गया।
भारत सचिव का पद समाप्त: ब्रिटिश सरकार में भारत संबंधी कार्यों को देखने वाले ‘भारत सचिव’ (Secretary of State) का पद समाप्त कर दिया गया।
देसी रियासतों का एकीकरण और सरदार पटेल (Integration of Princely States)
पटेल का कूटनीतिक नेतृत्व: गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल और वी.पी. मेनन ने 500 से अधिक देसी रियासतों का भारत में सफल एकीकरण किया।
विलय पत्र (Instrument of Accession): राजाओं को रक्षा, विदेशी मामले और संचार विषयों को भारत को सौंपते हुए विलय पत्र पर हस्ताक्षर करने हेतु मनाया गया।
जूनागढ़ का विलय: जनमत संग्रह (Plebiscite) के आधार पर फरवरी 1948 में जूनागढ़ रियासत को औपचारिक रूप से भारत में शामिल किया गया।
हैदराबाद में ऑपरेशन पोलो: सितंबर 1948 में ‘ऑपरेशन पोलो’ (सैन्य कार्रवाई) के जरिए हैदराबाद के निजाम को भारत में विलय हेतु मजबूर किया गया।
सत्य की विजय व 15 अगस्त 1947: 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि पंडित नेहरू ने ‘नियति से साक्षात्कार’ (Tryst with Destiny) भाषण दिया और भारत स्वतंत्र हुआ।