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सिविल सेवा का विकास (Civil Services)
- सिविल सेवा के जनक: लॉर्ड कॉर्नवॉलिस को भारत में सिविल सेवा का जनक माना जाता है, जिन्होंने भ्रष्टाचार रोकने के लिए कड़े नियम बनाए।
- फोर्ट विलियम कॉलेज: लॉर्ड वेलेजली ने 1800 में युवा नागरिक अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए कलकत्ता में इसकी स्थापना की थी।
- हेलीबरी कॉलेज: 1806 में इंग्लैंड के ईस्ट इंडिया कॉलेज में नागरिक अधिकारियों के प्रशिक्षण और शिक्षा की व्यवस्था स्थानांतरित की गई।
- खुली प्रतियोगिता (1853): 1853 के चार्टर एक्ट द्वारा नागरिक सेवाओं में नामांकन के बजाय खुली प्रतियोगी परीक्षा की शुरुआत की गई।
- प्रथम भारतीय आईसीएस: सत्येंद्रनाथ टैगोर 1863 में सफलतापूर्वक भारतीय सिविल सेवा (ICS) परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले पहले भारतीय बने थे।
- ऐचिसन आयोग (1886): इस आयोग ने प्रांतीय, अधीनस्थ और साम्राज्यवादी नागरिक सेवाओं में त्रि-स्तरीय वर्गीकरण की महत्वपूर्ण सिफारिश की थी।
- ली आयोग (1924): इसकी सिफारिश पर भारत में सिविल सेवकों की भर्ती के लिए एक लोक सेवा आयोग की स्थापना की गई।
- भारतीयकरण की मांग: राष्ट्रवादियों के लगातार दबाव के कारण 1922 से आईसीएस परीक्षा लंदन और दिल्ली में एक साथ आयोजित होने लगी।
पुलिस प्रशासन का विकास (Police System)
- थाना प्रणाली: लॉर्ड कॉर्नवॉलिस ने पुरानी जमींदारी सुरक्षा व्यवस्था हटाकर आधुनिक थानों और दरोगा प्रणाली की शुरुआत की।
- एसपी (SP) का पद: कॉर्नवॉलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रत्येक जिले में पुलिस अधीक्षक का एक नया पद सृजित किया।
- विलियम बेंटिंक के सुधार: बेंटिंक ने एसपी का पद समाप्त कर जिला कलेक्टरों को पुलिस का प्रमुख बना दिया था।
- पुलिस आयोग 1860: इस आयोग की सिफारिशों के आधार पर भारत में एक व्यवस्थित पुलिस तंत्र का निर्माण किया गया।
- भारतीय पुलिस अधिनियम 1861: इस कानून द्वारा प्रत्येक प्रांत में एक महानिरीक्षक (IGP) के तहत नियमित पुलिस बल गठित हुआ।
- खुफिया विभाग: लॉर्ड कर्जन ने प्रांतीय स्तर पर आपराधिक जांच विभाग (CID) और केंद्रीय खुफिया ब्यूरो की शुरुआत की।
- उद्देश्य और दमन: ब्रिटिश पुलिस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य कानून व्यवस्था के नाम पर भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलनों को बेरहमी से कुचलना था।
न्यायपालिका का विकास (Judiciary)
- रेगुलेटिंग एक्ट 1773: इस अधिनियम के तहत 1774 में कलकत्ता में पहले सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गई थी।
- कॉर्नवॉलिस कोड (1793): कॉर्नवॉलिस ने शक्तियों के पृथक्करण के तहत कर वसूली और न्यायिक शक्तियों को पूरी तरह अलग किया।
- सदर दीवानी अदालत: जिला अदालतों के ऊपर अपीलीय मामलों की सुनवाई के लिए सदर दीवानी और निजामत अदालतें बनाई गईं।
- अदालतों का भारतीयकरण: विलियम बेंटिंक ने फारसी के स्थान पर स्थानीय भाषाओं और उच्च अदालतों में अंग्रेजी को अनिवार्य किया।
- लॉ कमीशन (विधि आयोग): 1833 के चार्टर एक्ट के तहत लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में प्रथम विधि आयोग का गठन हुआ।
- कानूनों का संहिताकरण: विधि आयोग के प्रयासों से भारतीय दंड संहिता (IPC 1860) और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) लागू हुईं।
- फेडरल कोर्ट (1937): भारत शासन अधिनियम 1935 के तहत दिल्ली में एक संघीय अदालत बनाई गई, जो बाद में सुप्रीम कोर्ट बनी।
भूमि राजस्व एवं प्रशासनिक नीतियां (Land Revenue & Control)
- द्वैध शासन की समाप्ति: वारेन हेस्टिंग्स ने 1772 में बंगाल में द्वैध शासन समाप्त कर दीवानी अधिकार सीधे कंपनी के हाथ लिए।
- इजारेदारी प्रथा: हेस्टिंग्स ने भू-राजस्व वसूली के लिए पांच साला और सालाना नीलामी (ठेकेदारी) की दोषपूर्ण व्यवस्था शुरू की।
- स्थायी बंदोबस्त (1793): बंगाल में जमींदारों को भूमिका स्थायी मालिक मानकर कंपनी के लिए निश्चित लगान हमेशा के लिए तय किया।
- सूर्यास्त कानून (Sunset Law): निश्चित तिथि के सूर्यास्त तक लगान न चुकाने पर जमींदारों की भूमि नीलाम कर दी जाती थी।
- रैयतवाड़ी व्यवस्था: थॉमस मुनरो ने मद्रास और बॉम्बे में सीधे किसानों (रैयतों) से भूमि कर वसूलने की नीति बनाई।
- महालवाड़ी व्यवस्था: होल्ट मैकेंजी ने उत्तर भारत में पूरे गांव या महाल को राजस्व की सामूहिक इकाई घोषित किया।
- कलेक्टर की शक्ति: धीरे-धीरे जिला कलेक्टर को जिले के प्रशासन, कर और कानून-व्यवस्था का सर्वशक्तिमान केंद्र बना दिया गया।
- स्थानीय स्वशासन (1882): लॉर्ड रिपन ने स्थानीय निकायों का गठन कर भारत में विकेंद्रीकरण और आधुनिक स्थानीय स्वशासन की नींव रखी।
औपनिवेशिक भारत के महत्वपूर्ण गवर्नर-जनरल और वायसराय
गवर्नर-जनरल और वायसराय (Governor-General & Viceroy)
- वारेन हेस्टिंग्स (1772-85): ये बंगाल के पहले गवर्नर-जनरल बने। इन्होंने द्वैध शासन समाप्त किया और 1774 में कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट बनवाया।
- लॉर्ड कॉर्नवॉलिस (1786-93): इन्होंने बंगाल में 1793 में स्थायी बंदोबस्त लागू किया और भारत में सिविल सेवा तथा पुलिस व्यवस्था की नींव रखी।
- लॉर्ड वेलेजली (1798-1805): इन्होंने भारतीय राज्यों को ब्रिटिश नियंत्रण में लाने के लिए ‘सहायक संधि प्रथा’ (Subsidiary Alliance) की शुरुआत की थी।
- लॉर्ड हेस्टिंग्स (1813-23): इनके समय में आंग्ल-नेपाल युद्ध हुआ और सुगौली की संधि हुई। इन्होंने मराठा संघ को पूरी तरह नष्ट कर दिया।
- लॉर्ड विलियम बेंटिंक (1828-35): ये भारत के पहले गवर्नर-जनरल बने। इन्होंने राजा राममोहन राय के सहयोग से 1829 में सती प्रथा प्रतिबंधित की।
- लॉर्ड ऑकलैंड (1836-42): इनके कार्यकाल के दौरान प्रथम आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध हुआ, जो अंग्रेजों के लिए बेहद विनाशकारी और नुकसानदेह साबित हुआ था।
- लॉर्ड डलहौजी (1848-56): इन्होंने ‘हड़प नीति’ (Doctrine of Lapse) से कई राज्य हड़पे। इनके समय पहली रेलवे (1853) और डाक-तार सेवा शुरू हुई।
- लॉर्ड कैनिंग (1856-62): ये भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल और पहले वायसराय बने। इनके समय ही 1857 का महान विद्रोह हुआ था।
- लॉर्ड लॉरेंस (1864-69): इन्होंने भूटान के साथ युद्ध किया और अफगानिस्तान के संदर्भ में ‘शानदार निष्क्रियता’ (Masterly Inactivity) की नीति अपनाई थी।
- लॉर्ड मेयो (1869-72): इन्होंने भारत में वित्तीय विकेंद्रीकरण की शुरुआत की और 1872 में देश की पहली (असममित) जनगणना आयोजित कराई थी।
- लॉर्ड लिटन (1876-80): इन्होंने भारतीय भाषाई प्रेस को दबाने के लिए दमनकारी वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (1878) और शस्त्र अधिनियम लागू किया।
- लॉर्ड रिपन (1880-84): इन्हें ‘स्थानीय स्वशासन का जनक’ कहते हैं। इन्होंने वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट रद्द किया और पहली नियमित जनगणना (1881) शुरू की।
- लॉर्ड डफरिन (1884-88): इनके कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण घटना 1885 में बॉम्बे में ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ की स्थापना होना था।
- लॉर्ड कर्जन (1899-1905): इन्होंने राष्ट्रवाद को कमजोर करने के लिए 1905 में बंगाल का विभाजन किया, जिससे स्वदेशी आंदोलन भड़क उठा।
- लॉर्ड मिंटो II (1905-10): इनके समय मार्ले-मिंटो सुधार (1909) आया, जिसने भारत में पहली बार मुस्लिमों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र दिया।
- लॉर्ड हार्डिंग II (1910-16): इन्होंने 1911 में बंगाल विभाजन रद्द किया और भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की।
- लॉर्ड चेम्सफोर्ड (1916-21): इनके समय मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919), रॉलेट एक्ट, जलियांवाला बाग हत्याकांड और असहयोग आंदोलन जैसी बड़ी घटनाएं हुईं।
- लॉर्ड इर्विन (1926-31): इनके समय साइमन कमीशन भारत आया। इन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन को रोकने के लिए ‘गांधी-इर्विन समझौता’ (1931) किया।
- लॉर्ड लिनलिथगो (1936-43): इनके समय द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ, क्रिप्स मिशन भारत आया और महात्मा गांधी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ शुरू किया।
- लॉर्ड माउंटबैटन (1947-48): ये भारत के अंतिम वायसराय और स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल बने। इन्होंने भारत-पाकिस्तान विभाजन योजना तैयार की।