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प्रमुख नगर, पर्यटन एवं धार्मिक स्थल

उत्तराखंड के प्रमुख नगर

  • उत्तराखंड राज्य विविध संस्कृतियों, ऐतिहासिक धरोहरों और अपनी प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण नगरों का घर है।
  • राज्य के ये प्रमुख नगर न केवल प्रशासनिक केंद्र हैं बल्कि पर्यटन, व्यापार और धार्मिक आस्था के महत्वपूर्ण गढ़ हैं।
  • देहरादून इस खूबसूरत पहाड़ी राज्य की राजधानी होने के साथ-साथ यहाँ का सबसे बड़ा नगर भी है।
  • भौगोलिक रूप से देहरादून नगर आसन की सहायक नदियों बिंदाल और रिस्पना (ऋषिपर्णा) के मध्य में स्थित है।
  • दून घाटी में बसा यह शहर देश के प्रमुख शिक्षा और राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों का एक बड़ा केंद्र है।
  • यहाँ भारतीय वन अनुसंधान संस्थान (FRI), भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) और सर्वे ऑफ इंडिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थान हैं।
  • देहरादून शहर अपने विशेष प्रकार के सुगंधित बासमती चावल और रसीली लीची के उत्पादन के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
  • देहरादून में गुरु राम राय के जन्मदिवस पर आयोजित होने वाला ऐतिहासिक ‘झंडा मेला’ यहाँ का प्रमुख वार्षिक उत्सव है।
  • यहाँ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में सहस्त्रधारा, रॉबर्स केव (गुच्चू पानी), मालसी डियर पार्क और कलसी के अशोक शिलालेख शामिल हैं।
  • देहरादून के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में टपकेश्वर महादेव गुफा मंदिर, संतला देवी मंदिर और लक्ष्मण सिद्ध मंदिर अत्यंत पूजनीय हैं।
  • हरिद्वार नगर पवित्र गंगा नदी के तट पर स्थित है, जिसे हिंदुओं के सबसे प्रमुख और पवित्र तीर्थ स्थलों में गिना जाता है।
  • यह पौराणिक नगर भारत के सात सबसे पवित्रतम शहरों जिन्हें ‘सप्त पुरी’ कहा जाता है, उनमें से एक है।
  • हरिद्वार में प्रत्येक 12 वर्ष में विश्व प्रसिद्ध ‘कुंभ मेला’ और प्रत्येक 6 वर्ष में ‘अर्ध कुंभ मेला’ आयोजित किया जाता है।
  • भौगोलिक दृष्टि से पहाड़ों से निकलकर पवित्र गंगा नदी इसी स्थान से मैदानी क्षेत्रों में पहली बार प्रवेश करती है।
  • धार्मिक महत्व के साथ-साथ हरिद्वार में (BHEL रानीपुर) जैसे बड़े उद्योगों के कारण यह एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र भी है।
  • हरिद्वार और ऋषिकेश को वैश्विक स्तर पर बहुत प्रसिद्ध धार्मिक केंद्रों और योग की अंतरराष्ट्रीय राजधानियों के रूप में जाना जाता है।
  • राज्य के कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में स्थित नैनीताल और मसूरी देश के सबसे लोकप्रिय पर्वतीय पर्यटन स्थल (हिल स्टेशन) हैं।
  • सांस्कृतिक रूप से बेहद समृद्ध अल्मोड़ा नगर को उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है।
  • गढ़वाल क्षेत्र के पहाड़ों में प्रवेश करने के मुख्य मार्ग के रूप में कोटद्वार नगर को “गढ़वाल का प्रवेश द्वार” कहा जाता है।
  • इस प्रकार उत्तराखंड के सभी नगरों का अपना एक विशिष्ट समृद्ध ऐतिहासिक, आर्थिक और पौराणिक महत्व है।

उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थल

  • उत्तराखंड को अपने प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक स्थलों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण “देवभूमि” कहा जाता है।
  • यहाँ के ऊँचे पहाड़, घने जंगल, पवित्र नदियाँ और शांत घाटियाँ दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
  • उत्तराखंड में पर्यटन उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था और आजीविका सुदृढ़ करने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधार है।
  • इस राज्य को मुख्य रूप से धार्मिक, साहसिक, प्रकृति, सांस्कृतिक और स्वास्थ्य (योग-आयुर्वेद) पर्यटन के लिए जाना जाता है।
  • राज्य सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2001 और 2015 को ‘पर्यटन वर्ष’ घोषित किया गया था।
  • उत्तराखंड सरकार द्वारा एक नई और व्यापक पर्यटन नीति को 28 सितंबर 2018 को आधिकारिक मंजूरी दी गई थी।
  • राज्य के प्रत्येक जिले में एक नए पर्यटन स्थल को विकसित करने हेतु ’13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टिनेशन’ योजना चलाई जा रही है।
  • उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध ‘चार धाम यात्रा’ के अंतर्गत यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम शामिल हैं।
  • उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री और गंगोत्री क्रमशः पवित्र यमुना और गंगा (भागीरथी) नदी के पावन उद्गम स्थल हैं।
  • रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ मंदिर भगवान शिव के प्रतिष्ठित बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रमुख धाम है।
  • चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, जो देश के मुख्य चार धामों में गिना जाता है।
  • भगवान शिव को समर्पित पाँच पवित्र मंदिरों के समूह को ‘पंच केदार’ के नाम से जाना और पूजा जाता है।
  • पंच केदार में शामिल रुद्रप्रयाग का तुंगनाथ मंदिर पूरे विश्व का सबसे ऊँचाई पर स्थित शिव मंदिर है।
  • अलकनंदा और उसकी विभिन्न सहायक नदियों के पाँच पवित्र संगम स्थलों को सामूहिक रूप से ‘पंच प्रयाग’ कहते हैं।
  • पंच प्रयागों में विष्णुप्रयाग, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग और देवप्रयाग जैसे पावन स्थल शामिल हैं।
  • देवप्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी नदी का संगम होता है, और इसी पावन स्थान से आगे इसे गंगा कहा जाता है।
  • मैदानी क्षेत्र में स्थित हरिद्वार का ‘हर की पौड़ी’ घाट और ऋषिकेश का ‘त्रिवेणी घाट’ प्रमुख धार्मिक केंद्र हैं।
  • ऋषिकेश शहर को अपनी वैश्विक आध्यात्मिक पहचान के कारण दुनिया में “योग की अंतर्राष्ट्रीय राजधानी” कहा जाता है।
  • अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम प्राचीन मंदिरों का समूह है, जबकि चमोली का हेमकुंड साहिब सिखों का पवित्र तीर्थ है।
  • इसके अतिरिक्त चम्पावत का रीठा साहिब, रुड़की का पिरान कलियर शरीफ और अल्मोड़ा का कटारमल सूर्य मंदिर भी प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं।

उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थल

  • उत्तराखंड को अनगिनत प्राचीन मंदिरों, पवित्र नदियों और आध्यात्मिक केंद्रों की उपस्थिति के कारण “देवभूमि” अर्थात देवताओं की भूमि कहा जाता है।
  • यह राज्य विश्व प्रसिद्ध ‘चार धाम यात्रा’ का मुख्य केंद्र है, जिसमें यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम शामिल हैं।
  • उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री धाम पवित्र यमुना नदी का उद्गम स्थल है, जहाँ सूर्य कुण्ड और दिव्य शिला प्रमुख आकर्षण हैं।
  • गंगोत्री धाम भी उत्तरकाशी जिले में भागीरथी (गंगा) के उद्गम गोमुख के पास स्थित है, जिसका निर्माण गोरखा सेनापति अमर सिंह थापा ने कराया था।
  • रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित केदारनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महत्वपूर्ण धाम है।
  • चमोली जिले में नर और नारायण पर्वतों के बीच अलकनंदा नदी के तट पर भगवान विष्णु को समर्पित बद्रीनाथ धाम स्थित है।
  • भगवान शिव के शरीर के विभिन्न भागों की पूजा से संबंधित पाँच पवित्र स्थलों को सामूहिक रूप से ‘पंच केदार’ कहा जाता है।
  • इन पंच केदारों में केदारनाथ, मध्यमहेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ और वर्ष भर खुला रहने वाला कल्पेश्वर मंदिर शामिल हैं।
  • रुद्रप्रयाग में स्थित तुंगनाथ मंदिर लगभग 3680 मीटर की ऊंचाई के साथ पूरे विश्व का सबसे ऊँचा शिव मंदिर है।
  • भगवान विष्णु के विभिन्न रूपों को समर्पित पाँच पवित्र स्थलों को ‘पंच बद्री’ कहते हैं, जिनमें विशाल बद्री और आदि बद्री प्रमुख हैं।
  • अलकनंदा और उसकी सहायक नदियों के पाँच पवित्र संगम स्थलों को ‘पंच प्रयाग’ (विष्णुप्रयाग, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग, देवप्रयाग) कहा जाता है।
  • देवप्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी नदी का पावन संगम होता है, और इसी स्थान से आगे इस जलधारा को गंगा नदी कहा जाता है।
  • हरिद्वार का ‘हर की पौड़ी’ घाट गंगा स्नान के लिए विश्व प्रसिद्ध है, जहाँ मनसा देवी, चंडी देवी और माया देवी जैसे शक्तिपीठ स्थित हैं।
  • ऋषिकेश नगर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्राप्त है और इसे दुनिया की आध्यात्मिक तथा योग की राजधानी माना जाता है।
  • अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम 124 प्राचीन मंदिरों का समूह है, जिसे भगवान शिव का 8वां ज्योतिर्लिंग भी माना जाता है।
  • अल्मोड़ा का कटारमल सूर्य मंदिर राज्य का सबसे बड़ा सूर्य मंदिर है, और यहाँ का चितई गोलू देवता मंदिर न्याय के लिए प्रसिद्ध है।
  • नैनीताल में नैनी झील के सुरम्य किनारे पर प्रसिद्ध नैना देवी शक्तिपीठ और पास ही बाबा नीम करौली का कैंची धाम स्थित है।
  • पिथौरागढ़ की पाताल भुवनेश्वर एक रहस्यमयी गुफा मंदिर है, जहाँ कई हिंदू देवी-देवताओं का प्राकृतिक वास माना जाता है।
  • चम्पावत जिले में स्थित पूर्णागिरी मंदिर एक विख्यात शक्तिपीठ है, जबकि रीठा साहिब गुरु नानक देव जी से संबंधित पवित्र सिख तीर्थ है।
  • बागेश्वर का बागनाथ मंदिर सरयू और गोमती के संगम पर स्थित है, जो अपनी उत्कृष्ट कत्यूरी वास्तुकला और उत्तरायणी मेले के लिए प्रसिद्ध है।

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