rankersnotes.com

संवैधानिक संशोधन (Constitutional Amendments)

अनुच्छेद 368 का आधार: संविधान के भाग XX का अनुच्छेद 368 संसद को संविधान और उसके प्रावधानों में संशोधन करने की औपचारिक शक्ति प्रदान करता है।

दक्षिण अफ्रीका से प्रेरित: भारतीय संविधान में संशोधन की यह विशेष प्रक्रिया दक्षिण अफ्रीका के संविधान से प्रेरित होकर हमारे संविधान में शामिल की गई थी।

संसद की अनन्य शक्ति: संविधान संशोधन विधेयक केवल संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में पेश किया जा सकता है, राज्य विधानमंडलों में नहीं।

राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति अनावश्यक: संशोधन विधेयक को पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सहमति की आवश्यकता नहीं होती; इसे मंत्री या गैर-सरकारी सदस्य ला सकते हैं।

तीन संशोधन पद्धतियां: संविधान में बदलाव के तीन तरीके हैं— साधारण बहुमत द्वारा, संसद के विशेष बहुमत द्वारा, और विशेष बहुमत के साथ राज्यों की सहमति द्वारा।

साधारण बहुमत संशोधन: राज्यों के निर्माण, सीमा परिवर्तन या विधान परिषद के गठन जैसे विषयों में दोनों सदनों के साधारण बहुमत (उपस्थित व मतदान का >50%) से बदलाव होता है।

विशेष बहुमत संशोधन: मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्वों में संशोधन हेतु प्रत्येक सदन की कुल संख्या का बहुमत तथा उपस्थित सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है।

राज्यों का अनुसमर्थन: संघीय ढांचे से जुड़े विषयों में संशोधन के लिए संसद के विशेष बहुमत के साथ-साथ कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों की सहमति जरूरी है।

संयुक्त बैठक का अभाव: सामान्य विधेयकों के विपरीत, संविधान संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों में गतिरोध होने पर संयुक्त बैठक बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है।

राष्ट्रपति की अनिवार्यता: 24वें संशोधन 1971 के अनुसार, संसद द्वारा पारित संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति को अपनी सहमति देना पूरी तरह अनिवार्य है।

मूल संरचना का सिद्धांत (1973): केशवानंद भारती मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला दिया कि संसद संविधान के ‘मूल ढांचे’ (Basic Structure) को नहीं बदल सकती।

प्रथम संविधान संशोधन (1951): इसके द्वारा भूमि सुधार कानूनों को न्यायिक समीक्षा से बचाने के लिए संविधान में नौवीं अनुसूची जोड़ी गई थी।

42वां संशोधन (1976): इसे ‘लघु संविधान’ कहा जाता है; इसने प्रस्तावना में ‘समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, अखंडता’ शब्द जोड़े और मौलिक कर्तव्य शामिल किए।

44वां संशोधन (1978): इसने आपातकालीन प्रावधानों के दुरुपयोग को रोका और संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर कानूनी अधिकार बनाया।

प्रमुख आधुनिक संशोधन: 101वां संशोधन (GST कर प्रणाली), 103वां संशोधन (EWS आरक्षण 10%) और 106वां संशोधन (नारी शक्ति वंदन अधिनियम – महिला आरक्षण) महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।

Leave a Comment