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भारत में संघ और राज्य विधानमंडल

संघ विधानमंडल (संसद): संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार भारत की संसद राष्ट्रपति, राज्यसभा (उच्च सदन) और लोकसभा (निचला सदन) से मिलकर बनती है।

राज्य विधानमंडल: अनुच्छेद 168 के अनुसार राज्य विधानमंडल राज्यपाल और विधानसभा से मिलकर बनता है; कुछ राज्यों में विधान परिषद (उच्च सदन) भी शामिल होती है।

द्विसदनीय व्यवस्था: केंद्र में द्विसदनीय व्यवस्था अनिवार्य है, जबकि राज्यों में यह ऐच्छिक है। वर्तमान में भारत के केवल 6 राज्यों में द्विसदनीय विधानमंडल है।

राज्यसभा (राज्यों की परिषद): यह संसद का स्थायी सदन है, जिसका कभी विघटन नहीं होता। इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त हो जाते हैं।

विधान परिषद: यह राज्य विधानमंडल का उच्च सदन है। इसे संसद द्वारा संबंधित राज्य विधानसभा के विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव पर बनाया या समाप्त किया जा सकता है।

राष्ट्रपति और राज्यपाल की भूमिका: राष्ट्रपति और राज्यपाल विधानमंडल के अभिन्न अंग हैं, क्योंकि उनके हस्ताक्षर के बिना कोई भी पारित विधेयक कानून नहीं बन सकता।

शक्तियों का विभाजन: संघ विधानमंडल पूरे देश के लिए कानून बनाता है, जबकि राज्य विधानमंडल केवल अपने राज्य की भौगोलिक सीमाओं के भीतर प्रभावी कानून बनाता है।

अध्यादेश जारी करना: जब विधानमंडल का सत्र न चल रहा हो, तब राष्ट्रपति (अनुच्छेद 123) और राज्यपाल (अनुच्छेद 213) आपात स्थिति में अध्यादेश जारी कर सकते हैं।

संविधान संशोधन: संविधान में संशोधन का अधिकार केवल संसद (संघ विधानमंडल) को है; राज्य विधानमंडल संविधान संशोधन की पहल नहीं कर सकते।

अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ: अंतर्राष्ट्रीय संधियों और समझौतों को लागू करने के लिए पूरे देश या किसी हिस्से के लिए कानून बनाने का विशेष अधिकार केवल संसद के पास है।

आपातकाल में शक्तियां: राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान संसद को राज्य सूची के विषयों पर भी पूरे देश के लिए कानून बनाने का विशेषाधिकार मिल जाता है।

संयुक्त बैठक: संघ विधानमंडल में साधारण विधेयक पर गतिरोध होने पर संयुक्त बैठक (अनुच्छेद 108) का प्रावधान है, लेकिन राज्य विधानमंडल में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

विधायिका की सर्वोच्चता: संसदीय प्रणाली में विधानमंडल जन-प्रतिनिधित्व का सर्वोच्च मंच है, जो कार्यपालिका की मनमानी पर अंकुश लगाकर लोकतांत्रिक जवाबदेही सुनिश्चित करता है।

निर्वाचन में भूमिका: संसद और विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल का हिस्सा होते हैं और मतदान में भाग लेते हैं।

संसदीय विशेषाधिकार: विधानमंडलों और उनके सदस्यों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिए संविधान द्वारा विशेष संरक्षण और विशेषाधिकार प्रदान किए गए हैं।

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