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भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएँ (Salient Features of Indian Constitution)

विश्व का सबसे विस्तृत संविधान: भारत का संविधान अपनी भौगोलिक विविधता, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संघ-राज्य साझा संरचना के कारण विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।

विभिन्न स्रोतों से ग्रहण: हमारे संविधान निर्माताओं ने विश्व के अनेक देशों (ब्रिटेन, अमेरिका, आयरलैंड, कनाडा आदि) के संविधानों से श्रेष्ठ प्रावधान ग्रहण किए।

नम्यता और अनम्यता का समन्वय: भारतीय संविधान लचीलेपन (साधारण बहुमत) और कठोरता (विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों की सहमति) का एक संतुलित और अनूठा मिश्रण है।

एकात्मक झुकाव के साथ संघीय व्यवस्था: सामान्य काल में यह केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति-विभाजन आधारित संघीय ढांचा रखता है, परंतु संकटकाल में पूर्णतः एकात्मक हो जाता है।

संसदीय शासन प्रणाली: संविधान ने ब्रिटिश मॉडल पर आधारित उत्तरदायी संसदीय प्रणाली को अपनाया है, जहाँ कार्यपालिका विधायिका के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।

संसदीय संप्रभुता व न्यायिक सर्वोच्चता: यह ब्रिटिश संसद की सर्वोच्चता और अमेरिकी न्यायपालिका की सर्वोच्चता के बीच सुंदर समन्वय स्थापित कर संतुलन बनाए रखता है।

एकीकृत एवं स्वतंत्र न्यायपालिका: भारत में शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय, मध्य में उच्च न्यायालय और नीचे अधीनस्थ न्यायालयों की एक निष्पक्ष एवं स्वतंत्र श्रृंखला है।

मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य: नागरिकों के सर्वांगीण विकास के लिए 6 मौलिक अधिकार तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान हेतु 11 मौलिक कर्तव्य संविधान में उल्लिखित हैं।

राज्य नीति के निदेशक तत्व: भाग IV में वर्णित ये सिद्धांत भारत को एक लोक कल्याणकारी राज्य (Welfare State) बनाने के लिए राज्य को मार्गदर्शन देते हैं।

धर्मनिरपेक्ष राज्य: भारतीय संविधान किसी धर्म विशेष को राजधर्म नहीं मानता और सभी धर्मों को समान आदर, संरक्षण तथा धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करता है।

सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: प्रत्येक भारतीय नागरिक को बिना किसी भेदभाव के 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर मतदान करने का समान अधिकार प्राप्त है।

एकल नागरिकता: अमेरिका के विपरीत, भारत संघ और राज्यों की दोहरी नागरिकता न देकर संपूर्ण राष्ट्र के लिए केवल एक समान भारतीय नागरिकता प्रदान करता है।

स्वतंत्र संवैधानिक निकाय: निर्वाचन आयोग, भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) और संघ लोक सेवा आयोग जैसी संस्थाएं निष्पक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था सुनिश्चित करती हैं।

त्रि-स्तरीय शासन व्यवस्था: 73वें और 74वें संशोधन द्वारा संविधान में स्थानीय स्वशासन (पंचायती राज और नगरपालिकाएं) जोड़कर इसे त्रि-स्तरीय रूप दिया गया।

आपातकालीन प्रावधान: राष्ट्रपति को राष्ट्रीय, राज्यीय (राष्ट्रपति शासन) और वित्तीय आपातकाल से निपटने के लिए विशेष शक्तियां प्रदान की गई हैं।

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