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What is Precipitation and its types? (वर्षण क्या है और इसके प्रकार?)

वर्षण की परिभाषा: वायुमंडल में संघनित जलवाष्प का गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव से द्रव या ठोस रूप में पृथ्वी के धरातल पर गिरना वर्षण कहलाता है।

वर्षा (Rainfall): जब वर्षण तरल जल की बूंदों (व्यास 0.5 मिमी से अधिक) के रूप में होता है; यह वर्षण का सबसे सामान्य और व्यापक रूप है।

फुहार / बूंदाबांदी (Drizzle): जब पानी की बूंदें अत्यंत सूक्ष्म (व्यास 0.5 मिमी से कम) होती हैं और हवा में तैरती हुई धीमी गति से गिरती हैं।

हिमपात (Snowfall): जब संघनन हिमांक बिंदु (0°C) से नीचे होता है, तो जलवाष्प सीधे षट्कोणीय बर्फ के रवेदार गुच्छों (Flakes) के रूप में गिरती है।

सहिम वृष्टि (Sleet): जमी हुई वर्षा की बूंदें या पिघली हुई बर्फ का दोबारा जमना; यह पारदर्शी बर्फ की छोटी-छोटी गोलियों के रूप में गिरती है।

ओलावृष्टि (Hail): कपासी-वर्षी बादलों में तीव्र ऊर्ध्वाधर वायु प्रवाह द्वारा बर्फ की परतों का जमना, जिससे 5 मिमी से बड़े ठोस बर्फ के गोले गिरते हैं।

संवहनीय वर्षा (Convectional): भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में तीव्र दोपहर तापन से हवा गर्म होकर उठती है और प्रतिदिन दोपहर 4 बजे मूसलाधार गरज के साथ बरसती है।

पर्वतीय वर्षा (Orographic): जब आर्द्र वायु पर्वतीय ढाल से टकराकर ऊपर उठती है और पवनाभिमुख ढाल पर भारी वर्षा करती है (पवनविमुख ढाल वृष्टि-छाया रहता है)।

चक्रवाती / वाताग्री वर्षा: जब दो भिन्न तापमान वाली वायु राशियां टकराती हैं, तो गर्म वायु शीत वाताग्र के ऊपर चढ़कर विस्तृत वर्षा करती है।

वैश्विक वितरण: भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर वार्षिक वर्षण घटता है; तटीय क्षेत्रों में आंतरिक महाद्वीपीय भागों की तुलना में अधिक वर्षा होती है।

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