भौगोलिक स्थिति: आर्कटिक वृत्त (66.5° N) के उत्तर में स्थित ध्रुवीय तटीय क्षेत्र (उत्तरी कनाडा, अलास्का, ग्रीनलैंड का तट और यूरेशिया का उत्तरी साइबेरियाई तट)।
जलवायु की कठोरता: वर्ष के 9-10 महीने तापमान हिमांक से काफी नीचे; सर्दियां अंधकारमय तथा गर्मियां अत्यधिक छोटी व ठंडी (10°C से कम) होती हैं।
पर्माफ्रॉस्ट (Permafrost): भूमि की निचली सतह स्थायी रूप से जमी हुई बर्फ की ठोस परत के रूप में रहती है, जो पानी का रिसाव रोककर दलदल बनाती है।
वृक्ष-विहीन टुंड्रा वनस्पति: अत्यधिक ठंड और बर्फीली हवाओं के कारण बड़े वृक्ष नहीं उगते; केवल काई (Mosses), लाइकेन (Lichen), विलो झाड़ियां और सेज उगते हैं।
अल्पकालिक ग्रीष्म पुष्पन: 2-3 महीने की छोटी गर्मी में बर्फ पिघलते ही आर्कटिक पॉपियों और रंग-बिरंगे छोटे फूलों के खिलने से सुंदर प्राकृतिक कालीन बिछ जाता है।
ध्रुवीय जीव-जंतु अनुकूलन: कस्तूरी बैल (Musk Ox), रेंडियर/कैरिबू, ध्रुवीय भालू, सील और वालरस शरीर में मोटी वसा परत (Blubber) से ठंड से बचते हैं।
स्वदेशी जनजातियां: अलास्का-कनाडा के इनुइट (एस्किमो), साइबेरिया के चुकची, याकूत, समोयद और उत्तरी स्कैंडिनेविया के लैप्स (सामी) पारंपरिक निवासी हैं।
पारंपरिक अनुकूलन: बर्फ के शीतकालीन घर (इग्लू), सील की खाल की नावें (कयाक), कुत्तों द्वारा खींची जाने वाली स्लेज और हड्डियों के हार्पून से शिकार।
आधुनिक जीवनशैली में बदलाव: स्नोमोबाइल, राइफल, आधुनिक इंसुलेटेड घरों और खनन कस्बों के संपर्क से पारंपरिक जीवन में भारी बदलाव आया है।
खनिज निष्कर्षण और जलवायु खतरा: अलास्का (प्रूडो बे) और रूस में तेल-गैस दोहन जारी है; ग्लोबल वार्मिंग से पर्माफ्रॉस्ट पिघलने से भारी मीथेन उत्सर्जन का वैश्विक खतरा है।