बादल की परिभाषा: वायुमंडल में धरातल से पर्याप्त ऊंचाई पर मुक्त हवा में तैरती अत्यंत सूक्ष्म जल-बूंदों अथवा हिमकणों के विशाल दृश्य पुंज को बादल कहते हैं।
निर्माण की प्रक्रिया: गर्म-आर्द्र वायु के ऊपर उठने पर रुद्धोष्म शीतलन (Adiabatic Cooling) से ओसांक प्राप्त होता है और आर्द्रताग्राही नाभिकों पर संघनन होने से बादल बनते हैं।
पक्षाभ मेघ (Cirrus Clouds): 8,000 से 12,000 मीटर की ऊंचाई पर पाए जाने वाले पतले, रेशमी, पंखनुमा और पूरी तरह बर्फ के क्रिस्टलों से बने सफेद बादल हैं।
कपासी मेघ (Cumulus Clouds): 4,000 से 7,000 मीटर ऊंचाई पर रुई के गोलों जैसे दिखने वाले चपटे तल और उभरे हुए गुंबदनुमा शीर्ष वाले बादल हैं।
स्तरी मेघ (Stratus Clouds): वायुमंडल में विस्तृत चादर या परतों के रूप में फैले भूरे-सफेद बादल; ये भिन्न तापमान वाली वायु राशियों के मिश्रण से बनते हैं।
वर्षा-स्तरी मेघ (Nimbo-stratus): गहरे काले या भूरे रंग के निम्न स्तर के घने बादल, जो धरातल के बहुत पास होते हैं और लगातार वर्षा लाते हैं।
उच्च मेघ (High Clouds): 6,000 मीटर से ऊपर स्थित पक्षाभ (Cirrus), पक्षाभ-स्तरी (Cirrostratus) और पक्षाभ-कपासी (Cirrocumulus); ये आमतौर पर स्वच्छ मौसम या आने वाले चक्रवात का संकेत देते हैं।
मध्यम मेघ (Middle Clouds): 2,000 से 6,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मध्य-स्तरी (Altostratus) और मध्य-कपासी (Altocumulus) बादल, जो आंशिक रूप से सूर्य को ढकते हैं।
निम्न मेघ (Low Clouds): धरातल से 2,000 मीटर तक स्थित स्तरी-कपासी (Stratocumulus), स्तरी (Stratus) और वर्षा-स्तरी (Nimbostratus) बादल, जो मौसम को नम बनाए रखते हैं।
कपासी-वर्षी मेघ (Cumulonimbus): अत्यधिक ऊर्ध्वाधर विस्तार वाले विशाल निहाई (Anvil) शीर्ष के बादल; ये भीषण गरज-चमक, आंधी, मूसलाधार वर्षा और ओलावृष्टि लाते हैं।