rankersnotes.com

Mass Movements: Types, Factors, and Implications (वृहद संचलन: प्रकार, कारक एवं प्रभाव)

वृहद संचलन की परिभाषा: गुरुत्वाकर्षण बल के प्रत्यक्ष प्रभाव के अधीन चट्टानी मलबे, मिट्टी और मलबे का ढाल के सहारे नीचे की ओर सामूहिक संचलन।

अपरदन से भिन्नता: इस प्रक्रिया में मलबा स्वयं गुरुत्वाकर्षण के कारण खिसकता है; जल, पवन या बर्फ केवल गति को सुगम बनाने वाले स्नेहक (Lubricant) होते हैं।

मंद संचलन (Slow Movements): अत्यंत धीमी गति से होने वाला संचलन; इसमें ‘मृदा सर्पण’ (Soil Creep) और नम टुंड्रा क्षेत्रों में ‘मृदा विसर्पण’ (Solifluction) प्रमुख हैं।

तीव्र संचलन (Rapid Movements): अत्यधिक नम और खड़ी ढालों पर अचानक होने वाला संचलन; इसमें मिट्टी का प्रवाह (Earthflow), कीचड़ प्रवाह (Mudflow) और मलबे का बहाव शामिल हैं।

भूस्खलन (Landslides): अपेक्षाकृत शुष्क चट्टानी खंडों और मलबे का ढलान के कमजोर तल के सहारे अचानक नीचे की ओर तेजी से फिसलना या गिरना।

स्लम्प और शैल पतन (Slump & Rockfall): स्लम्प में मलबा अवतल रूप से पीछे की ओर झुकते हुए फिसलता है, जबकि शैल पतन में खड़ी चट्टानें सीधे नीचे गिरती हैं।

प्राकृतिक प्रेरक कारक: तीव्र ढलान, अत्यधिक मूसलाधार वर्षा, भूकंपीय झटके, विवर्तनिक अस्थिरता और आधार शैल के नीचे चिकनी मिट्टी की परतें इसका कारण बनती हैं।

मानव-जनित कारक: अवैज्ञानिक सड़क निर्माण, वनों की अंधाधुंध कटाई, ढलानों पर भारी अनियंत्रित निर्माण, खनन और डायनामाइट विस्फोट ढाल की स्थिरता को नष्ट करते हैं।

विनाशकारी प्रभाव: बस्तियों का दब जाना, सड़कों व रेलमार्गों का अवरुद्ध होना, नदियों के प्राकृतिक मार्ग रुकने से कृत्रिम बाढ़ आना और जान-माल का नुकसान।

हिमालय बनाम पश्चिमी घाट: नवीन, विवर्तनिक रूप से सक्रिय और भुरभुरे हिमालय में भूस्खलन अत्यधिक तीव्र होता है, जबकि पश्चिमी घाट में भारी मानसूनी वर्षा मुख्य ट्रिगर है।

Leave a Comment