बहिर्जात बल की परिभाषा: वे बाहरी विनाशकारी बल जो पृथ्वी के वायुमंडल और सतह पर सौर ऊर्जा तथा गुरुत्वाकर्षण बल के प्रत्यक्ष प्रभाव से उत्पन्न होते हैं।
मुख्य संचालक बल: सूर्य का प्रकाश (तापमान परिवर्तन) और गुरुत्वाकर्षण प्रवणता इन प्रक्रियाओं की मुख्य प्रेरक शक्ति हैं, जो धरातलीय विषमताओं को समतल बनाती हैं।
अनाच्छादन की संकल्पना (Denudation): अनाच्छादन एक व्यापक सामान्य पद है जिसमें अपक्षय (Weathering), वृहद संचलन (Mass Wasting) और अपरदन (Erosion) की सभी बहिर्जात प्रक्रियाएं संयुक्त रूप से शामिल हैं।
अपरदन की प्रक्रिया (Erosion): गतिशील माध्यमों (बहता जल, पवन, हिमनद, समुद्री लहरें) द्वारा चट्टानी मलबे को खुरचना, काटना और मूल स्थान से दूर बहा ले जाना।
परिवहन (Transportation): जल, पवन और हिमनद अपरदित अवसादों को ढाल और ऊर्जा प्रवणता के अनुसार दूरस्थ क्षेत्रों की ओर लगातार प्रवाहित और स्थानांतरित करते हैं।
निक्षेपण (Deposition): जब गतिशील कारकों का वेग व ऊर्जा घट जाती है, तो वे ढोए गए अवसादों को तराई, घाटियों या समुद्र तटों पर बिछा देते हैं।
तल संतुलन की प्रक्रिया (Gradation): यह सतह को एक समान बनाने का कार्य है; ऊंचे भागों को काटकर नीचा करना (Agradation) और गड्ढों को भरकर समतल करना।
अपरदन के गतिशील कारक: बहती नदियां (V-आकार घाटी), हिमनद (U-आकार घाटी), पवनें (छत्रक शैल) और समुद्री तरंगे (तटीय क्लिफ) अपनी विशिष्ट आकृतियां उकेरते हैं।
जलवायु का नियंत्रण: वर्षा, तापमान, वनस्पति आवरण और पवन का वेग विभिन्न जलवायु प्रदेशों में बहिर्जात प्रक्रियाओं की तीव्रता और स्वरूप को निर्धारित करते हैं।
स्थलाकृतिक पुनर्चक्रण: बहिर्जात बल अंतर्जात बलों द्वारा निर्मित विशाल पर्वतों को निरंतर काटकर अंतिम अवस्था में समप्राय मैदान (Peneplain) में परिवर्तित कर देते हैं।