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निशस्त्रीकरण, मानवाधिकार, वैश्वीकरण (Disarmament, Human Rights, Globalization)

सार्वभौमिक निशस्त्रीकरण: भारत व्यापक, पूर्ण और गैर-भेदभावपूर्ण वैश्विक निरस्त्रीकरण की वकालत करता है, ताकि सभी देशों के परमाणु हथियार चरणबद्ध तरीके से नष्ट हों।

जैविक एवं रासायनिक हथियार प्रतिबंध: भारत BWC और CWC संधियों का पूर्ण पालन करता है और सामूहिक विनाश के सभी हथियारों (WMD) के खात्मे का समर्थक है।

बाहरी अंतरिक्ष का असैन्यीकरण: भारत अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ (PAROS) का कड़ा विरोध करता है और इसके शांतिपूर्ण वैज्ञानिक उपयोग पर बल देता है।

मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948): भारत ने यूएन मानवाधिकार चार्टर का पूर्ण समर्थन किया, जिसके कई सिद्धांत भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों में शामिल हैं।

यूएन मानवाधिकार परिषद (UNHRC): भारत कई बार UNHRC का सदस्य चुना गया है और मानवाधिकारों की रक्षा में निष्पक्ष व रचनात्मक संवाद की वकालत करता है।

मानवाधिकारों का राजनीतिकरण नहीं: भारत का दृढ़ रुख है कि पश्चिमी देशों द्वारा मानवाधिकारों का उपयोग संप्रभु राष्ट्रों के आंतरिक मामलों में दखल हेतु नहीं होना चाहिए।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC): 1993 के कानून के तहत गठित NHRC देश के भीतर मानवाधिकारों के उल्लंघन की स्वतंत्र जांच और नागरिकों की रक्षा करता है।

वैश्वीकरण का प्रभाव: वैश्वीकरण ने व्यापार, प्रौद्योगिकी, पूंजी और विचारों के मुक्त प्रवाह को बढ़ाकर वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को आपस में मजबूती से जोड़ दिया है।

भारत में वैश्वीकरण का लाभ: 1991 के बाद भारत आईटी हब बना, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) में भारी वृद्धि हुई और देश में मध्यम वर्ग का अभूतपूर्व विस्तार हुआ।

वैश्वीकरण की चुनौतियां: इसके कारण पारंपरिक कुटीर उद्योगों को नुकसान, आर्थिक असमानता में वृद्धि और पश्चिमी सांस्कृतिक प्रभुत्व जैसी समस्याएं भी सामने आईं।

आर्थिक राष्ट्रवाद और संरक्षणवाद: हाल के वर्षों में कई विकसित देशों द्वारा संरक्षणवादी नीतियां अपनाने और आपूर्ति श्रृंखला टूटने से वैश्वीकरण को झटका लगा है।

विकासशील देशों के हितों की रक्षा: भारत वैश्वीकरण को अधिक समावेशी और न्यायसंगत बनाने की मांग करता है ताकि गरीब देशों को भी समान लाभ मिल सके।

सतत विकास लक्ष्य (SDGs): 2030 तक गरीबी उन्मूलन, भुखमरी समाप्ति, लैंगिक समानता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसे 17 लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु भारत पूर्ण प्रतिबद्ध है।

डिजिटल वैश्वीकरण और डेटा सुरक्षा: साइबर सुरक्षा, सीमा पार डेटा प्रवाह और डिजिटल संप्रभुता 21वीं सदी के वैश्वीकरण के नए और संवेदनशील विषय बन गए हैं।

‘वसुधैव कुटुंबकम‘ का दृष्टिकोण: भारत संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानते हुए निशस्त्रीकरण, मानवीय गरिमा और साझा आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

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