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नगर परिषद (Municipal Council)

मध्यम शहरी निकाय: नगर परिषद (नगर पालिका परिषद) मध्यम आकार के शहरी क्षेत्रों (आमतौर पर 1 लाख से 10 लाख तक की जनसंख्या) के लिए गठित की जाती है।

संवैधानिक प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 243Q(1)(b) के तहत छोटे शहरी क्षेत्रों के बेहतर प्रशासन और नागरिक सुविधाओं के लिए नगर परिषद की स्थापना होती है।

गठन और अधिनियम: इसका गठन संबंधित राज्य सरकार के नगर पालिका अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत अधिसूचना जारी करके किया जाता है।

संरचना: इसमें वार्डों से सीधे चुने गए सभासद (पार्षद), स्थानीय विधायक, सांसद और नगर प्रशासन के विशेषज्ञ मनोनीत सदस्य शामिल होते हैं।

अध्यक्ष (President/Chairman): नगर परिषद का राजनीतिक प्रमुख ‘अध्यक्ष’ होता है, जिसका चुनाव या तो जनता द्वारा सीधे या पार्षदों द्वारा किया जाता है।

उपाध्यक्ष की भूमिका: अध्यक्ष की अनुपस्थिति में बैठकों का संचालन करने और प्रशासनिक कार्यों को देखने के लिए एक उपाध्यक्ष भी चुना जाता है।

मुख्य कार्यपालक अधिकारी (EO): प्रशासनिक कार्यों के क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार द्वारा एक मुख्य नगर पालिका अधिकारी (Executive Officer – EO) नियुक्त होता है।

शक्तियों का विभाजन: अध्यक्ष और परिषद नीतियां और बजट तय करते हैं, जबकि Executive Officer (EO) उन निर्णयों को प्रशासनिक रूप से लागू करवाता है।

प्रमुख नागरिक कार्य: शहर में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था, नालियों की सफाई, कचरा उठाव, संक्रामक रोगों की रोकथाम और स्थानीय सड़कों का रख-रखाव करना।

स्थानीय कर और आय: नगर परिषद संपत्ति कर, जल एवं सीवर कर, दुकान लाइसेंस शुल्क, हाट-बाजार शुल्क और राज्य अनुदान से अपनी आय जुटाती है।

कार्यकाल: नगर परिषद का सामान्य कार्यकाल पहली बैठक की तारीख से 5 वर्ष होता है; समय से पहले भंग होने पर 6 महीने में चुनाव अनिवार्य हैं।

आरक्षण व्यवस्था: महिलाओं के लिए न्यूनतम एक-तिहाई सीटें और SC/ST वर्गों के लिए आबादी के अनुपात में वार्डों में आरक्षण लागू रहता है।

विभागीय समितियां: स्वच्छता समिति, जलकार्य समिति और भवन निर्माण समिति जैसी समितियां परिषद के दैनिक कामकाज में सहयोग करती हैं।

राज्य सरकार का नियंत्रण: राज्य सरकार को वित्तीय अनियमितता या अकर्मण्यता के आधार पर नगर परिषद की जांच करने और उसे भंग करने का अधिकार होता है।

शहरी विकास की कड़ी: यह ग्रामीण से बड़े महानगरों की ओर विकसित हो रहे अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा मजबूत करने की मुख्य संस्था है।

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