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नगर निगम (Municipal Corporation)

महानगरीय निकाय: नगर निगम बड़े और घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों (आमतौर पर 10 लाख या उससे अधिक जनसंख्या) में स्थापित सर्वोच्च स्थानीय शहरी निकाय है।

प्रथम नगर निगम: भारत में सबसे पहला नगर निगम वर्ष 1688 में मद्रास (चेन्नई) में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा स्थापित किया गया था।

गठन की प्रक्रिया: नगर निगम की स्थापना राज्य विधानमंडल के विशेष अधिनियम द्वारा तथा केंद्रशासित प्रदेशों में संसद के अधिनियम द्वारा की जाती है।

तीन प्रमुख अंग: नगर निगम के मुख्य रूप से तीन अंग होते हैं— परिषद (Council), स्थायी समितियां (Standing Committees) और नगर आयुक्त (Municipal Commissioner)।

महापौर (Mayor): नगर निगम की परिषद का राजनीतिक प्रमुख ‘महापौर’ या मेयर होता है, जो शहर का प्रथम नागरिक कहलाता है।

मेयर का चुनाव: राज्यों के नियमों के अनुसार मेयर का चुनाव प्रत्यक्ष (जनता द्वारा) या अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए पार्षदों द्वारा किया जाता है।

नगर आयुक्त (प्रशासनिक प्रमुख): नगर निगम का प्रशासनिक और कार्यकारी प्रमुख ‘नगर आयुक्त’ होता है, जो सामान्यतः राज्य सरकार द्वारा नियुक्त वरिष्ठ IAS अधिकारी होता है।

वार्ड और पार्षद: पूरे नगर निगम क्षेत्र को कई छोटे वार्डों में विभाजित किया जाता है, जहाँ से जनता अपने प्रतिनिधि (पार्षद/Councilor) चुनती है।

अनिवार्य कार्य: शुद्ध पेयजल आपूर्ति, जल निकासी, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जन्म-मृत्यु पंजीकरण इसके अनिवार्य कार्य हैं।

ऐच्छिक कार्य: सार्वजनिक पार्क, पुस्तकालय, खेल मैदान, संग्रहालय, सार्वजनिक परिवहन और आश्रय गृहों का निर्माण व रख-रखाव इसके ऐच्छिक कार्यों में शामिल हैं।

राजस्व के स्रोत: संपत्ति कर (House Tax), जल कर, विज्ञापन कर, वाणिज्यिक लाइसेंस शुल्क और राज्य सरकार से मिलने वाले वित्तीय अनुदान इसके मुख्य स्रोत हैं।

स्थायी समितियों की भूमिका: परिषद का आकार बड़ा होने के कारण निर्माण, स्वास्थ्य, वित्त और शिक्षा संबंधी त्वरित निर्णय विभिन्न स्थायी समितियों द्वारा लिए जाते हैं।

कार्यकाल और बैठकें: इसका कार्यकाल 5 वर्ष होता है; परिषद की नियमित बैठकें मेयर की अध्यक्षता में होती हैं जहाँ विकास प्रस्तावों पर बहस होती है।

स्मार्ट सिटी और विकास: आधुनिक समय में नगर निगम अमृत (AMRUT) और स्मार्ट सिटी मिशन जैसी बड़ी केंद्र-प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन की मुख्य एजेंसी है।

स्वायत्तता और चुनौतियां: तेजी से बढ़ते अनियंत्रित शहरीकरण, कर्मचारियों की कमी, अतिक्रमण और वित्तीय निर्भरता नगर निगमों के सामने मुख्य चुनौतियां हैं।

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