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उच्च न्यायालय

राज्य का शीर्ष न्यायालय: उच्च न्यायालय (High Court) राज्य स्तर पर न्यायिक प्रशासन का सर्वोच्च अंग होता है। संविधान के अनुच्छेद 214 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा।

साझा उच्च न्यायालय: सातवें संशोधन (1956) के तहत संसद को अधिकार है कि वह दो या दो से अधिक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एक साझा उच्च न्यायालय स्थापित कर सकती है।

वर्तमान संख्या: भारत में वर्तमान में कुल 25 उच्च न्यायालय हैं। कुछ न्यायालयों (जैसे गुवाहाटी, बॉम्बे, पंजाब-हरियाणा) का अधिकार क्षेत्र एक से अधिक राज्यों तक विस्तृत है।

न्यायाधीशों की नियुक्ति: उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य जजों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा सुप्रीम कोर्ट के CJI और संबंधित राज्य के राज्यपाल के परामर्श से की जाती है।

सेवानिवृत्ति की आयु: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष निर्धारित की गई है। वे राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।

रिट क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 226): सुप्रीम कोर्ट की तुलना में इनका रिट अधिकार अधिक व्यापक है; ये मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य कानूनी अधिकारों के लिए भी रिट जारी कर सकते हैं।

अधीक्षण की शक्ति (Supervisory Power): अनुच्छेद 227 के तहत उच्च न्यायालय को अपने राज्य क्षेत्र के सभी अधीनस्थ न्यायालयों और न्यायाधिकरणों (सैन्य को छोड़कर) पर प्रशासनिक नियंत्रण प्राप्त है।

मूल क्षेत्राधिकार: वसीयत, विवाह, तलाक, कंपनी कानून और न्यायालय की अवमानना से जुड़े कुछ विशिष्ट मामलों की सीधी सुनवाई उच्च न्यायालय में की जा सकती है।

अपीलीय क्षेत्राधिकार: जिला अदालतों द्वारा दिए गए दीवानी और आपराधिक मामलों (विशेषकर मौत की सजा) के फैसलों के खिलाफ अपील उच्च न्यायालय में सुनी जाती है।

अभिलेख न्यायालय: सुप्रीम कोर्ट की तरह यह भी एक अभिलेख न्यायालय है; इसके फैसले अधीनस्थ अदालतों के लिए नजीर (Precedents) होते हैं और इसे अवमानना पर दंड देने का अधिकार है।

स्थानांतरण: राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का स्थानांतरण (Transfer) देश के किसी अन्य उच्च न्यायालय में कर सकते हैं।

न्यायिक समीक्षा की शक्ति: उच्च न्यायालयों के पास भी राज्य विधानमंडल या संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून की संवैधानिकता जांचने (Judicial Review) का अधिकार है।

अधीनस्थ अदालतों पर नियंत्रण: जिला जजों की नियुक्ति, पदोन्नति और राज्य की न्यायिक सेवा के सदस्यों से जुड़े मामलों में राज्यपाल उच्च न्यायालय से परामर्श करता है।

महाभियोग प्रक्रिया: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को पद से हटाने की प्रक्रिया (महाभियोग) बिल्कुल वैसी ही है जैसी सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए संविधान में वर्णित है।

वेतन और पेंशन: कार्य के दौरान इनका वेतन राज्य की संचित निधि से दिया जाता है, जबकि सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन भारत (केंद्र) की संचित निधि से दी जाती है।

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