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सर्वोच्च न्यायालय

देश की शीर्ष अदालत: भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) देश का सर्वोच्च न्यायिक प्राधिकरण है, जो नई दिल्ली में स्थित है। इसके फैसले सभी अदालतों पर बाध्यकारी हैं।

स्थापना और उद्घाटन: इसकी परिकल्पना भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत की गई थी और 28 जनवरी 1950 को स्वतंत्र भारत के सर्वोच्च न्यायालय का उद्घाटन हुआ था।

संरचना: वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सहित कुल 34 न्यायाधीशों (33+1) का प्रावधान है। संख्या संसद द्वारा तय की जाती है।

मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction): अनुच्छेद 131 के तहत केंद्र व राज्यों या राज्यों के आपसी विवादों की सीधी सुनवाई केवल सर्वोच्च न्यायालय कर सकता है।

अपीलीय क्षेत्राधिकार: यह देश का सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय है, जहाँ उच्च न्यायालयों के संवैधानिक, दीवानी और फौजदारी फैसलों के खिलाफ अंतिम अपील की जा सकती है।

रिट क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 32): मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिए यह सीधे तौर पर पांच प्रकार की रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, उत्प्रेषण, प्रतिषेध, अधिकार पृच्छा) जारी कर सकता है।

सलाहकारी क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 143): राष्ट्रपति विधि या तथ्य के किसी भी सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से विधिक सलाह मांग सकते हैं।

अभिलेख न्यायालय (Court of Record): अनुच्छेद 129 के अनुसार इसके निर्णय साक्ष्य के रूप में रखे जाते हैं और इसे अपनी अवमानना (Contempt) के लिए दंड देने का अधिकार है।

न्यायिक पुनरावलोकन: यह किसी भी कानून या कार्यकारी आदेश को असंवैधानिक घोषित कर निरस्त कर सकता है यदि वह संविधान के प्रावधानों या मूल ढांचे का उल्लंघन करता है।

स्वयं के फैसलों की समीक्षा: अनुच्छेद 137 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को अपने पूर्व में दिए गए फैसलों या आदेशों की समीक्षा करने और उन्हें बदलने का अधिकार है।

कॉलेजियम प्रणाली: सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, लेकिन इसके लिए CJI और चार वरिष्ठ जजों के ‘कॉलेजियम’ की सिफारिश अनिवार्य है।

सेवानिवृत्ति की आयु: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक अपने पद पर बने रहते हैं, उनका कोई निश्चित न्यूनतम कार्यकाल नहीं होता।

पूर्ण न्याय की शक्ति (अनुच्छेद 142): सुप्रीम कोर्ट किसी मामले में ‘पूर्ण न्याय’ (Complete Justice) सुनिश्चित करने के लिए कोई भी आवश्यक आदेश या डिक्री पारित कर सकता है।

वकालत पर रोक: सर्वोच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश भारत के किसी भी न्यायालय या प्राधिकरण के समक्ष वकालत या पैरवी नहीं कर सकता।

न्यायिक स्वतंत्रता की गारंटी: न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों का आचरण, जब तक महाभियोग न हो, संसद में चर्चा का विषय नहीं बन सकता।

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