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केंद्रीय और राज्य विधानसभाएँ

लोकसभा (केंद्रीय विधानसभा): यह भारतीय संसद का निचला सदन है, जहाँ जनता द्वारा प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली से चुने गए प्रतिनिधि पूरे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं।

विधानसभा (राज्य विधानसभा): यह राज्य विधानमंडल का निचला सदन है, जिसमें राज्य की जनता द्वारा सीधे चुने गए विधायक (MLA) अपने-अपने क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

कार्यकाल: दोनों सदनों का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष होता है, लेकिन बहुमत खोने या राष्ट्रीय/राज्यीय आपातकाल की स्थिति में इसे समय से पहले भंग किया जा सकता है।

सदस्यता के लिए आयु: लोकसभा और राज्य विधानसभा दोनों का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 25 वर्ष निर्धारित की गई है।

अध्यक्ष (Speaker): दोनों सदनों की बैठकों का संचालन करने, अनुशासन बनाए रखने और विधेयकों पर मतदान कराने के लिए एक अध्यक्ष का चुनाव सदस्यों द्वारा किया जाता है।

धन विधेयक (Money Bill): धन विधेयक केवल लोकसभा या राज्य विधानसभा में ही पेश किए जा सकते हैं; उच्च सदनों के पास इस पर केवल सिफारिशी अधिकार होता है।

कार्यपालिका पर नियंत्रण: केंद्रीय और राज्य सरकारें क्रमशः लोकसभा और विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती हैं। अविश्वास प्रस्ताव यहीं लाया जा सकता है।

अधिवेशन: संविधान के अनुसार इन सभाओं के दो सत्रों (अधिवेशनों) के बीच छह महीने से अधिक का अंतराल नहीं होना चाहिए।

आरक्षण की व्यवस्था: अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए जनसंख्या के अनुपात में लोकसभा और विधानसभाओं में सीटें आरक्षित की गई हैं।

कोरम (गणपूर्ति): किसी भी बैठक को शुरू करने के लिए कुल सदस्य संख्या का कम से कम दसवां हिस्सा (1/10) उपस्थित होना अनिवार्य होता है।

बजट पारित करना: देश का केंद्रीय बजट लोकसभा में और राज्य का वार्षिक बजट संबंधित विधानसभा में प्रस्तुत और पारित किया जाता है।

विशेषाधिकार: इसके सदस्यों को सदन के भीतर भाषण देने और स्वतंत्र रूप से मतदान करने की स्वतंत्रता सहित कई विशेष कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं।

प्रश्नकाल और शून्यकाल: सदनों की कार्यवाही के दौरान सदस्यों को सरकार से सवाल पूछने और जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने के लिए यह समय दिया जाता है।

कानून निर्माण शक्ति: विधानसभाएं राज्य सूची और समवर्ती सूची पर, जबकि लोकसभा संघ सूची और समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार रखती हैं।

विघटन की शक्ति: प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति लोकसभा को और मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल विधानसभा को 5 वर्ष पूर्व भी भंग कर सकते हैं।

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