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प्रधानमंत्री (Prime Minister)

वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख: संसदीय प्रणाली में राष्ट्रपति केवल राज्य का नाममात्र प्रमुख होता है, जबकि प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालिका (de facto) का सर्वोच्च प्रमुख होता है।

नियुक्ति (अनुच्छेद 75): राष्ट्रपति लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं; स्पष्ट बहुमत न होने पर राष्ट्रपति स्वविवेक का प्रयोग करते हैं।

संसद की सदस्यता: प्रधानमंत्री को संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य होना चाहिए; गैर-सदस्य को 6 महीने के भीतर सदस्यता लेनी अनिवार्य होती है।

मंत्रिपरिषद का गठन: प्रधानमंत्री की सिफारिश पर ही राष्ट्रपति अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं और प्रधानमंत्री ही मंत्रियों के विभागों का बंटवारा व फेरबदल करते हैं।

मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता: प्रधानमंत्री कैबिनेट बैठकों की अध्यक्षता करते हैं, नीतियों का एजेंडा तय करते हैं और सभी मंत्रालयों के कार्यों में समन्वय स्थापित करते हैं।

राष्ट्रपति और कैबिनेट के बीच सेतु (अनुच्छेद 78): प्रधानमंत्री का संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन और कानून संबंधी सभी निर्णय राष्ट्रपति को सूचित करे।

लोकसभा का नेता: प्रधानमंत्री लोकसभा में सदन का नेता होता है; वह सरकार की प्रमुख नीतियों की घोषणा करता है और सदन में संकट के समय उत्तर देता है।

सदन भंग करने की सिफारिश: प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को कार्यकाल समाप्त होने से पहले भी लोकसभा को भंग करके नए चुनाव कराने की औपचारिक सलाह दे सकता है।

विभिन्न आयोगों के पदेन अध्यक्ष: प्रधानमंत्री नीति आयोग, राष्ट्रीय एकता परिषद, अंतर-राज्य परिषद और राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद के पदेन अध्यक्ष होते हैं।

विदेश नीति के प्रमुख सूत्रधार: देश की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को आकार देने तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों (G20, UN, BRICS) पर भारत का प्रतिनिधित्व करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।

परमाणु कमान प्राधिकरण के प्रमुख: भारत के परमाणु हथियारों और सामरिक बलों के संचालन का अंतिम नियंत्रण प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले परमाणु कमान प्राधिकरण के पास होता है।

सरकार का मुख्य प्रवक्ता: संकट, युद्ध या राष्ट्रीय आपदा के समय प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करते हैं और सरकार का आधिकारिक व अंतिम दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं।

मंत्रिपरिषद का जीवन चक्र: प्रधानमंत्री का इस्तीफा या आकस्मिक निधन पूरी मंत्रिपरिषद को स्वतः ही विघटित कर देता है, क्योंकि वे सरकार की धुरी होते हैं।

कार्यकाल की अनिश्चितता: प्रधानमंत्री का कोई निश्चित कार्यकाल नहीं होता; वह तब तक पद पर रहता है जब तक उसे लोकसभा में बहुमत का विश्वास प्राप्त रहता है।

समानों में प्रथम‘: लॉर्ड मोर्ले ने प्रधानमंत्री को ‘समान सहयोगियों में प्रथम’ (Primus inter pares) और मंत्रिमंडल रूपी मेहराब की आधारशिला कहा है।

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