अधिनियम का पारित होना: सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) भारतीय संसद द्वारा 15 जून 2005 को पारित हुआ और 12 अक्टूबर 2005 को पूर्णतः लागू हुआ।
संवैधानिक आधार: सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार RTI संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) के तहत एक अंतर्निहित मौलिक अधिकार है।
प्रमुख उद्देश्य: सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाना, अधिकारियों की जवाबदेही तय करना, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना और नागरिकों को सशक्त बनाना इसका मुख्य लक्ष्य है।
लोक प्राधिकारी का दायरा: सभी केंद्रीय, राज्यीय और स्थानीय सरकारी विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम तथा सरकार से वित्तपोषित गैर-सरकारी संगठन इसके अंतर्गत आते हैं।
PIO की नियुक्ति: प्रत्येक सरकारी विभाग में एक लोक सूचना अधिकारी (Public Information Officer – PIO) नियुक्त करना अनिवार्य है, जो सूचना आवेदनों का निपटारा करता है।
सूचना प्राप्ति की समय सीमा: आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर सूचना देना अनिवार्य है; यदि सहायक PIO को दिया जाए तो यह अवधि 35 दिन होती है।
जीवन और स्वतंत्रता संबंधी सूचना: यदि मांगी गई जानकारी किसी व्यक्ति के जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ी हो, तो उसे 48 घंटे के भीतर उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
अपील की त्रि-स्तरीय प्रणाली: सूचना न मिलने पर नागरिक प्रथम अपीलीय अधिकारी और उसके बाद केंद्रीय/राज्य सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील दायर कर सकते हैं।
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC): यह अधिनियम के तहत गठित सर्वोच्च वैधानिक निकाय है, जिसमें एक मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम दस सूचना आयुक्त होते हैं।
छूट प्राप्त सूचनाएं (धारा 8): देश की सुरक्षा, संप्रभुता, रणनीतिक हित, विदेशी संबंध, न्यायालय की अवमानना और कैबिनेट पत्रों से जुड़ी सूचनाएं देने से छूट प्राप्त है।
थर्ड पार्टी सूचना (धारा 11): यदि सूचना किसी तीसरे पक्ष के गोपनीय हितों से जुड़ी हो, तो संबंधित पक्ष को नोटिस देकर उसका पक्ष सुना जाना अनिवार्य है।
लागत व शुल्क: सूचना प्राप्त करने के लिए नाममात्र का आवेदन शुल्क (₹10) देना होता है, जबकि गरीबी रेखा से नीचे (BPL) परिवारों के लिए यह पूर्णतः निःशुल्क है।
दंडात्मक प्रावधान: निर्धारित समय में सूचना न देने, जानबूझकर गलत जानकारी देने या नष्ट करने पर PIO पर ₹250 प्रतिदिन (अधिकतम ₹25,000) जुर्माना लगाया जा सकता है।
2019 का संशोधन: इसके द्वारा केंद्र सरकार को मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों का कार्यकाल, वेतन और सेवा शर्तें निर्धारित करने का अधिकार दिया गया।
नागरिक सशक्तीकरण: RTI ने आम जनता को प्रशासनिक फाइलों, टेंडरों और खातों तक सीधी पहुंच देकर लोकतंत्र में जनता की भागीदारी को अत्यधिक मजबूत बनाया है।