86वां संविधान संशोधन 2002: इस ऐतिहासिक संशोधन द्वारा संविधान में अनुच्छेद 21-A जोड़ा गया, जिसने प्रारंभिक शिक्षा को नागरिकों का मौलिक अधिकार बना दिया।
RTE अधिनियम 2009: संसद ने 4 अगस्त 2009 को ‘निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ पारित किया, जो 1 अप्रैल 2010 से देश में लागू हुआ।
अनिवार्य व मुफ्त शिक्षा: 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को उसके पड़ोस के स्कूल में गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक (कक्षा 1 से 8) शिक्षा मुफ्त पाने का हक है।
निजी स्कूलों में 25% आरक्षण: धारा 12(1)(c) के तहत गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को प्रवेश स्तर की कक्षाओं में कमजोर व वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित करनी होती हैं।
प्रवेश परीक्षा व कैपिटेशन फीस पर रोक: स्कूलों द्वारा बच्चों के प्रवेश के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट लेने या माता-पिता से डोनेशन/कैपिटेशन फीस लेने पर पूर्ण प्रतिबंध और भारी जुर्माना है।
शारीरिक दंड पर पूर्ण प्रतिबंध: स्कूल में किसी भी बच्चे को शारीरिक दंड देने, मानसिक प्रताड़ना देने या जातिगत भेदभाव करने को गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध बनाया गया।
छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR): प्राथमिक स्तर पर प्रति 30 बच्चों पर 1 शिक्षक (30:1) और उच्च प्राथमिक स्तर पर प्रति 35 बच्चों पर 1 शिक्षक (35:1) का मानक अनिवार्य है।
स्कूल अवसंरचना के मानक: अधिनियम के तहत स्कूलों में सुरक्षित पेयजल, लड़के-लड़कियों के लिए अलग शौचालय, खेल का मैदान और रैंप जैसी बुनियादी सुविधाएं होना आवश्यक है।
अयोग्य शिक्षकों पर रोक: शिक्षकों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा निर्धारित योग्यताएं और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य है।
निजी ट्यूशन पर पाबंदी: सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों द्वारा निजी ट्यूशन पढ़ाने या व्यावसायिक शिक्षण गतिविधियों में शामिल होने पर सख्त रोक है।
नो-डिटेंशन पॉलिसी और संशोधन: प्रारंभ में कक्षा 8 तक किसी बच्चे को फेल न करने का नियम था, जिसे 2019 के संशोधन द्वारा राज्यों के विवेकानुसार लचीला बनाया गया।
गैर-शैक्षणिक कार्यों पर रोक: शिक्षकों को केवल जनगणना, आपदा राहत और आम चुनावों के अलावा किसी भी अन्य गैर-शैक्षणिक कार्य में तैनात नहीं किया जा सकता।
स्कूल प्रबंधन समिति (SMC): प्रत्येक स्कूल में SMC का गठन अनिवार्य है, जिसमें 75% सदस्य बच्चों के माता-पिता/अभिभावक होते हैं, जो स्कूल के संचालन की निगरानी करते हैं।
NCPCR द्वारा निगरानी: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और राज्य आयोगों को शिक्षा के अधिकार के क्रियान्वयन और शिकायतों की निगरानी का दायित्व सौंपा गया है।
साक्षरता में क्रांतिकारी भूमिका: RTE ने देश में प्राथमिक शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) को 100% के करीब पहुंचाने और ड्रॉपआउट दर घटाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।