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- सिंधु घाटी सभ्यता के लोग कला और शिल्प (Art and Craft) के क्षेत्र में अत्यंत कुशल, रचनात्मक और तकनीकी रूप से उन्नत थे।
- इस काल की कलाकृतियों में पत्थर की मूर्तियाँ, कांसे की ढलाई, मिट्टी के बर्तन (मृदभांड), मुहरें और आभूषण मुख्य रूप से शामिल हैं।
- यहाँ के कलाकारों द्वारा धातु कर्म, मूर्तिकला, बर्तनों पर चित्रकारी और कताई-बुनाई जैसे विभिन्न शिल्पों का बड़े पैमाने पर विकास किया गया था।
- मूर्तिकला में पत्थर की आकृतियों का निर्माण बहुत ही जीवंत और सटीक शारीरिक बनावट के साथ किया जाता था।
- मोहनजोदड़ो से मिली स्टिएटाइट (सेलखड़ी) पत्थर से बनी ‘दाढ़ी वाले पुरोहित राजा’ (Priest King) की मूर्ति पत्थर की कला का एक बेहतरीन उदाहरण है।
- इस पुरोहित की मूर्ति में उनके द्वारा ओढ़ी गई शॉल पर बना तिपतिया (Trefoil) पैटर्न उस समय की उन्नत कला को साफ दर्शाता है।
- सिंधु सभ्यता के लोग कांसे (Bronze) के निर्माण और उसकी ढलाई की उन्नत तकनीकी से भी पूरी तरह से परिचित थे।
- कांसे की मूर्तियाँ बनाने के लिए वे ‘लुप्त मोम तकनीक’ (Lost-wax technique) का उपयोग करते थे, जो उनके उच्च धातु विज्ञान कौशल को प्रमाणित करती है।
- मोहनजोदड़ो से प्राप्त कांसे की ‘नर्तकी की मूर्ति’ (Dancing Girl) इस युग की धातु कला का सबसे अद्भुत और विश्व प्रसिद्ध उदाहरण है।
- इसके अलावा लोथल से कांसे का कुत्ता और कालीबंगा से कांसे के सांड की आकृतियाँ भी कलात्मक कौशल के रूप में मिली हैं।
- सामान्य लोगों और बच्चों के खिलौनों के लिए पकी हुई मिट्टी यानी ‘टेराकोटा’ (Terracotta) कला का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जाता था।
- टेराकोटा कला के अंतर्गत मातृदेवी की मूर्तियाँ, कूबड़ वाले बैल, बंदर, कुत्ते और पहियों वाली छोटी गाड़ियाँ बहुतायत में बनाई जाती थीं।
- इस सभ्यता की कला का एक और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यहाँ से प्राप्त होने वाली विभिन्न आकारों की ‘मुहरें’ (Seals) हैं।
- ये मुहरें मुख्य रूप से चौकोर आकार में सेलखड़ी पत्थर से बनाई जाती थीं, जिन पर जानवरों के चित्र और चित्रलिपि खुदी होती थी।
- मुहरों पर एक सींग वाले गैंडे (Unicorn), कूबड़ वाले बैल, हाथी, बाघ और पशुपति शिव की आकृतियाँ बहुत खूबसूरती से उकेरी गई हैं।
- कुम्हार के चाक पर बनने वाले यहाँ के मिट्टी के बर्तन (मृदभांड) मुख्य रूप से लाल और काले रंग के चमकदार (Glazed) होते थे।
- इन लाल बर्तनों पर काले रंग से ज्यामितीय आकृतियाँ, पेड़-पौधों की पत्तियाँ, मछली के शल्क और पक्षियों के सुंदर चित्र बनाए जाते थे।
- आभूषण शिल्प भी बहुत उन्नत था, जिसमें सोने, चाँदी, तांबे और कीमती पत्थरों (जैसे जेड, जैस्पर, कार्नेलियन) का उपयोग होता था।
- चन्हुदड़ो और लोथल इस सभ्यता के दो ऐसे प्रमुख औद्योगिक केंद्र थे जहाँ मनके (Beads) बनाने के बड़े कारखाने स्थित थे।
- संक्षेप में, सिंधु घाटी सभ्यता की यह समृद्ध कला और शिल्प उनके उच्च सौंदर्यबोध, समृद्ध व्यापार और उन्नत तकनीकी जीवन को पूरी तरह प्रदर्शित करता है।