- वैज्ञानिक स्पष्टीकरण: प्लेट विवर्तनिकी भौतिक भूगोल और भू-विज्ञान का एक आधुनिक सिद्धांत है, जो महाद्वीपों की उत्पत्ति, भूकंप, ज्वालामुखी और वलित पर्वतों के निर्माण की सटीक वैज्ञानिक व्याख्या करता है।
- गतिशीलता को बल: यह सिद्धांत 1960 के दशक में खोजे गए नए साक्ष्यों (जैसे पुराचुंबकत्व और सागर-नितल प्रसरण) के आधार पर विकसित हुआ, जिसने महाद्वीपों के स्थिर होने के बजाय उनके गतिशील होने की अवधारणा को साबित किया।
- वेगनर के सिद्धांत का सुधरा रूप: यह सिद्धांत अल्फ्रेड वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत की आधारशिला पर टिका है और वास्तव में उसी का एक वैज्ञानिक और पुनर्परिवर्धित रूप है।
- आलोचनाओं का अंत: इस आधुनिक मॉडल ने वेगनर के सिद्धांत पर उठाए गए सभी सवालों और आलोचनाओं का वैज्ञानिक व संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत कर पुरानी धारणाओं को पूरी तरह बदल दिया।
सिद्धांत का विकास और वैज्ञानिक जिज्ञासा
- प्राकृतिक चमत्कार: विश्व के मानचित्र पर भूकंप, ज्वालामुखी पट्टियों और ऊंचे पर्वतों की एक निश्चित स्थिति को देखकर वैज्ञानिकों में यह जिज्ञासा जागी कि इन सबके पीछे किसी एक ही केंद्रीय शक्ति का हाथ है।
- ऐतिहासिक सीमा: वेगनर ने अपने विस्थापन सिद्धांत के पक्ष में कई साक्ष्य तो दिए थे, पर वह और उनके समर्थक यह कभी नहीं समझा सके कि महाद्वीपों का यह संचरण आखिर क्यों और कैसे हो रहा है।
- नवीन साक्ष्यों की खोज: सन् 1950 के बाद महासागरीय भूपृष्ठ की पर्वत-श्रेणियों और खाइयों की खोज हुई, जिसने पृथ्वी के भू-गर्भिक ज्ञान में आश्चर्यजनक बढ़ोतरी की।
- सागर-नितल की पुष्टि: सन् 1962 में प्रो. हैरी हेस ने समुद्र तल के फैलने का सुझाव दिया, जिसकी पुष्टि जल्द ही समुद्री धरातल पर मिली चुंबकीय पट्टियों (Magnetic Strips) की मदद से हो गई।
- सामूहिक वैज्ञानिक प्रयास: सन् 1967 के अंत में हैरी हेस, विल्सन, मॉर्गन, मैकेंजी, ओलिवर और पार्कर जैसे कई वैज्ञानिकों ने सामूहिक रूप से अलग-अलग पक्षों पर काम करके इस क्रांतिकारी सिद्धांत को प्रतिपादित किया।
- सिद्धांत की रूपरेखा और प्लेटों का वर्गीकरण
- विवर्तनिक प्लेट क्या है?: पृथ्वी का स्थलमंडल (Lithosphere) ठोस चट्टानों के विशाल और अनियमित आकार के टुकड़ों में विभक्त है, जिन्हें विवर्तनिक या टेक्टोनिक प्लेट कहा जाता है।
- प्लेटों की मोटाई और आधार: ये प्लेटें लगभग 100 किमी की मोटाई वाले स्थलमंडल से निर्मित हैं, जो अपने से अधिक घनत्व वाले ‘दुर्बलतामंडल’ (Asthenosphere) के ऊपर तैर रही हैं।
- प्लेटों की संख्या: वैज्ञानिकों ने अब तक पृथ्वी पर 7 बड़ी और 20 छोटी प्लेटों की पहचान की है, जबकि कुल प्लेटों की संख्या 100 तक बताई जाती है।
- 7 बड़ी प्लेटें: इनमें अंटार्कटिक, उत्तरी अमेरिकी, दक्षिणी अमेरिकी, प्रशांत महासागरीय, इंडो-ऑस्ट्रेलियन, अफ्रीकी और यूरीशियाई प्लेट शामिल हैं।
- छोटी प्लेटें: कोकोस, नजका, अरेबियन, फिलीपीन, कैरोलिन, फ्यूजी, स्कोटिया, कैरेबियन, तिब्बत, सोमाली, नुबियन, जुआन-डी-फूका और बर्मा आदि प्रमुख छोटी प्लेटें हैं।
- प्लेटों की प्रकृति: प्रशांत प्लेट पूर्णतः महासागरीय है, यूरीशियाई व अंटार्कटिका प्लेट पूर्णतः महाद्वीपीय हैं, जबकि अमेरिकी व भारतीय प्लेटें मिश्रित (महाद्वीपीय + महासागरीय) प्रकार की हैं।
प्लेट सीमाओं (किनारों) के प्रकार
भू-गर्भिक महत्व: प्लेटों के किनारे ही भू-गर्भिक क्रियाओं के दृष्टिकोण से सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इन्हीं के सहारे भूकंप, ज्वालामुखी और विवर्तनिक घटनाएं घटित होती हैं।
रचनात्मक किनारा (Constructive Margin / Divergent Boundary):
- अपसारी गति: जब दो प्लेटें एक-दूसरे से विपरीत दिशा में खिसकती हैं, तो बीच में पैदा हुई दरार के सहारे नीचे का मैग्मा ऊपर आकर ठोस हो जाता है।
- नवीन भू-पर्पटी का निर्माण: इस प्रक्रिया से लगातार नई भू-पर्पटी का निर्माण होता है, जिसका सबसे बेहतरीन उदाहरण मध्य अटलांटिक कटक (Mid-Atlantic Ridge) है।
विनाशात्मक किनारा (Destructive Margin / Convergent Boundary):
- अभिसारी गति: जब दो प्लेटें आमने-सामने टकराती हैं, तो अधिक घनत्व वाली भारी प्लेट कम घनत्व वाली हल्की प्लेट के नीचे धंसकर नष्ट (पिघल) हो जाती है।
- बेनीऑफ मेखला: जिस क्षेत्र में प्लेट नीचे धंसती है उसे बेनीऑफ मेखला (Benioff Zone) या प्रविश्टन क्षेत्र कहा जाता है। इसकी अंतःक्रिया तीन प्रकार से होती है:
1. महाद्वीपीय व महासागरीय प्लेट की टक्कर: भारी महासागरीय प्लेट नीचे धंसती है जिससे गर्त बनते हैं और अवसादों के मुड़ने से रॉकी व एंडीज जैसे मोड़दार पर्वत और ज्वालामुखी (जैसे कोटोपैक्सी) बनते हैं।
2. दो महासागरीय प्लेटों की टक्कर: अपेक्षाकृत भारी महासागरीय प्लेट हल्की महासागरीय प्लेट के नीचे धंस जाती है, जिससे गहरी खाइयाँ और ज्वालामुखी द्वीपों की श्रृंखला (Island Arcs) बनती है।
3. दो महाद्वीपीय प्लेटों की टक्कर: यहाँ ज्वालामुखी तो नहीं बनते, पर अत्यधिक भू-गर्भिक अस्थिरता के कारण बड़े पर्वतों का निर्माण होता है; जैसे यूरीशियन और इंडियन प्लेट की टक्कर से बना हमारा हिमालय पर्वत।
संरक्षी किनारा (Conservative Margin / Transform Boundary):
- समानांतर गति: जब दो प्लेटें बिना टकराए एक-दूसरे के समानांतर आगे निकल जाती हैं, तो यहाँ न तो नई भू-पर्पटी का निर्माण होता है और न ही विनाश।
- रूपांतर भ्रंश का निर्माण: इस सीमा को ‘शीयर सीमा’ भी कहते हैं, जिसके खिसकने से रूपांतरित भ्रंश बनते हैं; कैलिफोर्निया का ‘सान एंड्रियास फॉल्ट’ इसका सबसे प्रमुख उदाहरण है।
प्लेटों की गति के कारण और दरें
- पृथ्वी का घूर्णन (आयलर सिद्धांत): भूमध्य रेखा पर तीव्र घूर्णन के कारण केंद्रापसारी बल अधिक होता है, जो ध्रुवों की प्लेटों को भूमध्य रेखा की ओर और उत्तर-दक्षिण फैली प्लेटों को पश्चिम की ओर खिसकाता है।
- हॉट-स्पॉट प्लूम: मेंटल में मौजूद रेडियोधर्मी तत्वों के कारण अत्यधिक भू-तापीय ऊर्जा वाले ‘हॉट-स्पॉट’ बनते हैं, जहाँ से उठने वाली संवहन तरंगें (Plumes) प्लेटों को गति देती हैं।
- असमान गति दर: महासागरीय प्लेटें औसतन 5 सेमी/वर्ष और महाद्वीपीय प्लेटें 2 सेमी/वर्ष की दर से खिसकती हैं; आर्कटिक कटक की गति सबसे कम (2.5 सेमी/वर्ष से कम) है।
- सर्वाधिक गति: ग्रीनलैंड प्लेट सबसे तेज़ (20 सेमी/वर्ष) और पूर्वी प्रशांत महासागरीय उभार (ईस्टर द्वीप के पास) 5 सेमी/वर्ष से अधिक की दर से प्रवाहित हो रहा है।
- भारतीय प्लेट की गति: गोंडवानालैंड से अलग होते समय इसकी गति 12 सेमी/वर्ष थी, लेकिन क्रीटेशियस युग में तिब्बत के द्रास से टकराने के बाद अब यह 5 सेमी/वर्ष की दर से उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ रही है।
पृथ्वी की प्रमुख विवर्तनिक प्लेटें
वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी का स्थलमंडल अनेक बड़ी और छोटी प्लेटों में विभाजित है। अब तक लगभग 7 प्रमुख (Major Plates) तथा 20 से अधिक लघु (Minor Plates) की पहचान की जा चुकी है।
सात प्रमुख विवर्तनिक प्लेटें
- अंटार्कटिक प्लेट (Antarctic Plate)
- उत्तरी अमेरिकी प्लेट (North American Plate)
- दक्षिणी अमेरिकी प्लेट (South American Plate)
- प्रशांत प्लेट (Pacific Plate)
- इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट (Indo-Australian Plate)
- अफ्रीकी प्लेट (African Plate)
- यूरेशियाई प्लेट (Eurasian Plate)
ये प्लेटें पृथ्वी की सबसे बड़ी और सबसे अधिक सक्रिय विवर्तनिक इकाइयाँ हैं।
प्रमुख लघु (Minor) प्लेटें
मुख्य लघु प्लेटों में निम्नलिखित शामिल हैं—
- कोकोस प्लेट (Cocos Plate)
- नजका प्लेट (Nazca Plate)
- अरबीय प्लेट (Arabian Plate)
- फिलीपीन प्लेट (Philippine Plate)
- कैरेबियन प्लेट (Caribbean Plate)
- स्कोटिया प्लेट (Scotia Plate)
- सोमाली प्लेट (Somali Plate)
- नुबियन प्लेट (Nubian Plate)
- जुआन-डी-फूका प्लेट (Juan de Fuca Plate)
- बर्मा प्लेट (Burma Plate)
- कैरोलिन प्लेट (Caroline Plate)
- तिब्बत प्लेट (Tibetan Plate)
इन छोटी प्लेटों की गतिविधियाँ भी क्षेत्रीय स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं और कई स्थानों पर भूकंप एवं ज्वालामुखीय गतिविधियों का प्रमुख कारण बनती हैं।
प्लेटों का वर्गीकरण
प्लेटों को उनकी संरचना के आधार पर मुख्यतः तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है।
1. महासागरीय प्लेट (Oceanic Plate)- इन प्लेटों का अधिकांश भाग महासागरों के नीचे स्थित होता है। ये अपेक्षाकृत अधिक घनत्व वाली तथा पतली होती हैं। उदाहरण: प्रशांत प्लेट
2. महाद्वीपीय प्लेट (Continental Plate)- इन प्लेटों का अधिकांश भाग महाद्वीपीय भू-भाग से बना होता है। ये अपेक्षाकृत हल्की तथा मोटी होती हैं। उदाहरण: यूरेशियाई प्लेट एवं अंटार्कटिक प्लेट
3. मिश्रित प्लेट (Mixed Plate)- इन प्लेटों में महाद्वीपीय और महासागरीय दोनों भाग शामिल होते हैं। उदाहरण: इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट, उत्तरी अमेरिकी प्लेट तथा दक्षिणी अमेरिकी प्लेट।
प्लेटों का संचलन क्यों होता है?
प्लेटों के संचलन का मुख्य कारण पृथ्वी के आंतरिक भाग में उत्पन्न तापीय संवहन धाराएँ (Thermal Convection Currents) हैं। पृथ्वी के मेंटल में अत्यधिक ताप के कारण गर्म पदार्थ ऊपर उठता है और ठंडा पदार्थ नीचे चला जाता है। इस निरंतर चक्र के कारण प्लेटों पर बल लगता है और वे धीरे-धीरे अलग होती हैं, टकराती हैं अथवा एक-दूसरे के समानांतर खिसकती रहती हैं।
इसी प्रक्रिया के कारण नए महासागरीय तल का निर्माण होता है, पर्वतों का विकास होता है और भूकंप तथा ज्वालामुखी जैसी घटनाएँ घटित होती हैं।
महाद्वीपीय विस्थापन और प्लेट-विवर्तनिकी सिद्धांत में मुख्य अंतर
- संचलन का दायरा: महाद्वीपीय विस्थापन में सिर्फ महाद्वीपों का खिसकना बताया गया था, जबकि प्लेट विवर्तनिकी महाद्वीप और महासागर दोनों के संयुक्त संचलन को स्पष्ट करती है।
- पर्वत निर्माण का आधार: पुराना सिद्धांत पर्वतों का कारण सियाल और सीमा के बीच का घर्षण मानता था, जबकि प्लेट विवर्तनिकी इसका कारण टेक्टोनिक प्लेटों के आपसी अभिसरण (टक्कर) को मानती है।
- ज्वालामुखी की व्याख्या: प्लेट विवर्तनिकी वैश्विक स्तर पर ज्वालामुखियों और कटकों के बनने की पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक रूप से समझाती है, जबकि महाद्वीपीय विस्थापन में इसकी कोई जानकारी नहीं थी।
निष्कर्ष
- ऐतिहासिक महत्व: तत्कालीन वैज्ञानिक समाज ने वेगनर के सिद्धांत को भले ही नकार दिया था, क्योंकि उनका प्रवाह संबंधी ज्वारीय बल गलत था, लेकिन उनके द्वारा जुटाए गए साक्ष्य और प्रमाण बिल्कुल यथार्थ (सत्य) थे।
- आधुनिक वैज्ञानिक आधार: उन्हीं वास्तविक साक्ष्यों की ठोस आधारशिला पर आज का यह प्लेट विवर्तनिकी मॉडल टिका हुआ है, जिसने पृथ्वी के भू-गर्भ की लगभग सभी गुत्थियों को सफलतापूर्वक सुलझा दिया है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत (Theory of Plate Tectonics) के अनुसार, विवर्तनिक प्लेटें पृथ्वी की किस परत के ऊपर क्षैतिज अवस्था में तैर रही हैं?
क) आंतरिक कोर (Inner Core)
ख) बाह्य कोर (Outer Core)
ग) दुर्बलतामंडल (Asthenosphere)
घ) ऊपरी सियाल परत
सही उत्तर: ग) दुर्बलतामंडल (Asthenosphere)
व्याख्या: पृथ्वी की विवर्तनिक प्लेटें लगभग 100 किमी मोटे स्थलमंडल से बनी हैं, जो अपने से अधिक घनत्व वाले और आंशिक रूप से पिघले हुए ‘दुर्बलतामंडल’ (एस्थेनोस्फीयर) के ऊपर तैरती हैं।
2. जब दो प्लेटें एक-दूसरे से विपरीत दिशा में गतिशील होती हैं और नीचे से मैग्मा आकर नई भू-पर्पटी का निर्माण करता है, तो उसे किस प्रकार की प्लेट सीमा कहा जाता है?
क) विनाशात्मक किनारा (Destructive Margin)
ख) रचनात्मक किनारा (Constructive Margin)
ग) संरक्षी किनारा (Conservative Margin)
घ) रूपांतर सीमा (Transform Boundary)
सही उत्तर: ख) रचनात्मक किनारा (Constructive Margin)
व्याख्या: इसे अपसारी सीमा (Divergent Boundary) भी कहते हैं। जब प्लेटें दूर हटती हैं, तो दरार से मैग्मा ऊपर आकर नया धरातल बनाता है, इसलिए इसे रचनात्मक किनारा कहते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण मध्य अटलांटिक कटक है।
3. हमारी पृथ्वी पर मौजूद ‘हिमालय पर्वत’ का निर्माण प्लेट विवर्तनिकी के विनाशात्मक किनारे पर किन दो प्लेटों की अंतःक्रिया (टक्कर) का परिणाम है?
क) एक महाद्वीपीय और एक महासागरीय प्लेट
ख) दो महासागरीय प्लेटें
ग) दो महाद्वीपीय प्लेटें (यूरीशियन और इंडियन प्लेट)
घ) प्रशांत प्लेट और अफ्रीकी प्लेट
सही उत्तर: ग) दो महाद्वीपीय प्लेटें (यूरीशियन और इंडियन प्लेट)
व्याख्या: जब दो महाद्वीपीय प्लेटें (यूरीशियन और इंडियन प्लेट) आपस में टकराईं, तो अत्यधिक दबाव के कारण बीच में स्थित टेथिस सागर के मलबे में मोड़ (वलन) पड़ गया, जिससे हिमालय जैसे विशाल वलित पर्वत का निर्माण हुआ।
4. कैलिफोर्निया के निकट स्थित प्रसिद्ध ‘सान एंड्रियास फॉल्ट’ (San Andreas Fault) निम्नलिखित में से किस प्लेट सीमा का सर्वोत्तम उदाहरण है?
क) रचनात्मक किनारा
ख) विनाशात्मक किनारा
ग) संरक्षी किनारा (Conservative Margin)
घ) अपसारी सीमा
सही उत्तर: ग) संरक्षी किनारा (Conservative Margin)
व्याख्या: सान एंड्रियास फॉल्ट एक रूपांतर भ्रंश (Transform Fault) है, जहाँ दो प्लेटें बिना टकराए या बिना दूर हटे एक-दूसरे के समानांतर खिसकती हैं। यहाँ न तो कोई नई क्रस्ट बनती है और न नष्ट होती है।
5. प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत के अनुसार, प्लेटों की इस वैश्विक गति (संचलन) के पीछे कार्य करने वाला मुख्य बल कौन सा है?
क) सूर्य और चंद्रमा का ज्वारीय बल
ख) सियाल और सीमा के बीच का घर्षण
ग) पृथ्वी के भीतर उत्पन्न तापीय संवहन प्रवाह (Convection Flow)
घ) केवल महासागरीय जल का दबाव
सही उत्तर: ग) पृथ्वी के भीतर उत्पन्न तापीय संवहन प्रवाह (Convection Flow)
व्याख्या: पृथ्वी के अंदर रेडियोधर्मी तत्वों के क्षय और अवशिष्ट ताप के कारण गर्म मैग्मा चक्रीय रूप में ऊपर उठता है और ठंडा होकर नीचे बैठता है। इस ‘संवहन प्रवाह’ या तरंगों के कारण ही इसके ऊपर तैरने वाली प्लेटें गति करती हैं।