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जनसंख्या एवं नगरीकरण

उत्तराखंड: जनसांख्यिकीय विशेषताएँ

  • उत्तराखंड की जनसांख्यिकी की विशेषताएं मुख्य रूप से वर्ष 2011 में आयोजित राष्ट्रीय जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित हैं।
  • जनगणना 2011 के अंतिम आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड राज्य की कुल जनसंख्या 1 करोड़ 86 हजार 292 (10,086,292) दर्ज की गई है।
  • भारत की कुल जनसंख्या के प्रतिशत के रूप में देखा जाए तो उत्तराखंड में देश की कुल आबादी का 83 प्रतिशत हिस्सा निवास करता है।
  • जनसंख्या के मामले में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में उत्तराखंड का देश में 20वां स्थान आता है।
  • पिछले एक दशक (2001-2011) के दौरान उत्तराखंड राज्य की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 81 प्रतिशत रही है।
  • उत्तराखंड का औसत जनसंख्या घनत्व (पॉपुलेशन डेंसिटी) वर्तमान में 189 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर दर्ज किया गया है।
  • वर्ष 2001 में राज्य का जनघनत्व 159 था, जिसमें इस दशक के दौरान 30 अंकों की महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है।
  • राज्य में पुरुषों की कुल संख्या लगभग 37 लाख है, जबकि महिलाओं की कुल संख्या लगभग 49.48 लाख के करीब है।
  • उत्तराखंड का औसत लिंगानुपात (Sex Ratio) प्रति 1000 पुरुषों पर 963 महिलाएं हैं, जो कि राष्ट्रीय औसत (943) से बेहतर है।
  • लिंगानुपात के इस सामाजिक और जनसांख्यिकीय सूचकांक के आधार पर उत्तराखंड का देश के सभी राज्यों में 13वां स्थान है।
  • राज्य के कुल 13 जिलों में से अल्मोड़ा जिला 1139 के स्कोर के साथ सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जनपद माना जाता है।
  • इसके विपरीत, मैदानी क्षेत्र में स्थित हरिद्वार जिला 880 के स्कोर के साथ राज्य में सबसे कम लिंगानुपात वाला जिला है।
  • उत्तराखंड में 0 से 6 वर्ष की आयु वर्ग का शिशु लिंगानुपात (Child Sex Ratio) प्रति 1000 बालकों पर 890 बालिकाएं हैं।
  • राज्य की कुल साक्षरता दर (Literacy Rate) 78.82 प्रतिशत है, जिससे यह देश के सबसे अधिक साक्षर राज्यों की श्रेणी में आता है।
  • साक्षरता के मामले में पूरे भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में उत्तराखंड को 17वां स्थान प्राप्त है।
  • उत्तराखंड में पुरुषों की साक्षरता दर 40 प्रतिशत है, जबकि महिलाओं की साक्षरता दर 70.01 प्रतिशत दर्ज की गई है।
  • भौगोलिक दृष्टि से हरिद्वार राज्य का सर्वाधिक आबादी वाला जिला है, जबकि रुद्रप्रयाग जिला सबसे कम आबादी वाला जनपद है।
  • पहाड़ी जिलों पौड़ी गढ़वाल (-41%) और अल्मोड़ा (-1.28%) में भारी पलायन के कारण दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर ऋणात्मक रही है।
  • उधम सिंह नगर जिला 45 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि के साथ सर्वाधिक दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर वाला जनपद बना हुआ है।
  • संक्षेप में, उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी जनपदों के बीच जनसंख्या वितरण, घनत्व और साक्षरता में भारी क्षेत्रीय विषमता पाई जाती है।

उत्तराखंड: नगरीकरण की स्थिति

  • उत्तराखंड में नगरीकरण एक महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय प्रवृत्ति है, जो राज्य के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को व्यापक रूप से प्रभावित कर रही है।
  • राज्य की कुल जनसंख्या का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और बड़ा हिस्सा अब धीरे-धीरे शहरी क्षेत्रों में निवास करने लगा है।
  • उत्तराखंड में नगरीकरण की वर्तमान दर राष्ट्रीय औसत दर के लगभग आसपास ही दर्ज की गई है।
  • भौगोलिक विषमताओं के कारण राज्य के मैदानी जिलों में नगरीकरण की दर पर्वतीय जिलों की तुलना में काफी अधिक है।
  • उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर बढ़ते प्रवास के कारण कस्बों और छोटे शहरों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड राज्य की कुल नगरीय जनसंख्या 30,49,338 व्यक्ति दर्ज की गई है।
  • राज्य की कुल आबादी में नगरीय जनसंख्या का कुल प्रतिशत वर्ष 2011 में बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया था।
  • इससे पूर्व वर्ष 2001 में राज्य के भीतर नगरीय जनसंख्या का कुल राष्ट्रीय प्रतिशत केवल 67 प्रतिशत दर्ज था।
  • वर्ष 2011 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड राज्य की कुल ग्रामीण जनसंख्या 70,36,954 व्यक्ति है।
  • इसके आधार पर उत्तराखंड की कुल जनसंख्या में ग्रामीण आबादी का प्रतिशत वर्तमान में 77 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
  • तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो वर्ष 2011 में पूरे भारत के राष्ट्रीय स्तर पर नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत 16 था।
  • उत्तराखंड में 2001 से 2011 के बीच नगरीय जनसंख्या में होने वाली दशकीय वृद्धि दर 94 प्रतिशत रही है।
  • इसके विपरीत, इसी समान अवधि (2001-2011) के दौरान ग्रामीण जनसंख्या की दशकीय वृद्धि दर केवल 52 प्रतिशत रही।
  • नगरीय आबादी की यह तीव्र वृद्धि दर ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की तरफ हो रहे लगातार प्रवास को साफ दर्शाती है।
  • पूरे देश के सभी राज्यों की तुलना में नगरीकरण की दृष्टि से उत्तराखंड का भारत में 20वां स्थान आता है।
  • देहरादून जिला 52 प्रतिशत की सर्वाधिक नगरीय जनसंख्या दर के साथ राज्य का सबसे पहला नगरीकृत जिला है।
  • देहरादून के पश्चात नैनीताल जिला (94%) दूसरे और हरिद्वार जिला (36.66%) तीसरे स्थान पर सर्वाधिक नगरीकृत जनपद हैं।
  • राज्य का बागेश्वर जिला केवल 49 प्रतिशत नगरीय आबादी के साथ उत्तराखंड का न्यूनतम नगरीकृत जिला माना जाता है।
  • बागेश्वर के बाद रुद्रप्रयाग जिला (10%) और उत्तरकाशी जिला (7.98%) न्यूनतम नगरीकरण वाले जिलों में आते हैं।
  • जनगणना 2011 के अनुसार राज्य में कुल नगरों की संख्या 116 है, जहाँ बुनियादी ढांचे और आवास प्रबंधन की नई चुनौतियाँ उभर रही हैं।

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