नियोजन प्रणाली का विकास: भारत में आर्थिक नियोजन की शुरुआत 1950 में योजना आयोग और पंचवर्षीय योजनाओं से हुई, जिसका मुख्य लक्ष्य संतुलित विकास था।
नीति आयोग का गठन: 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर ‘नीति आयोग’ बना, जो सहकारी संघवाद पर आधारित सरकार के थिंक-टैंक के रूप में काम करता है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI): 1 अप्रैल 1935 को RBI अधिनियम 1934 के तहत स्थापित RBI भारत का केंद्रीय बैंक और देश की संपूर्ण मौद्रिक नीति का नियामक है।
मौद्रिक नीति समिति (MPC): RBI की 6-सदस्यीय MPC मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने (4% लक्ष्य) और आर्थिक विकास को गति देने हेतु रेपो रेट आदि तय करती है।
मुद्रा जारी करने का एकाधिकार: देश में नोट छापने (करेंसी प्रबंधन), सिक्कों के वितरण और विदेशी मुद्रा भंडार के रख-रखाव की एकमात्र शक्ति RBI के पास है।
बैंकों का बैंक और नियामक: RBI भारत के सभी वाणिज्यिक बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के संचालन, लाइसेंस और नियमों की निगरानी करता है।
अंतिम ऋणदाता (Lender of Last Resort): वित्तीय संकट के समय वाणिज्यिक बैंकों को आपातकालीन तरलता सहायता देकर यह देश की बैंकिंग प्रणाली को स्थिरता देता है।
नाबार्ड (NABARD) की स्थापना: बी. शिवरामन समिति की सिफारिश पर 12 जुलाई 1982 को नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) की स्थापना हुई।
ग्रामीण वित्त का शीर्ष बैंक: नाबार्ड कृषि, लघु उद्योगों, कुटीर एवं ग्रामोद्योगों और ग्रामीण दस्तकारों के विकास हेतु ऋण देने वाला शीर्ष वित्तीय संस्थान है।
पुनर्वित्त (Refinance) की सुविधा: नाबार्ड सीधे किसानों को लोन नहीं देता, बल्कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) और सहकारी बैंकों को पुनर्वित्त सुविधा प्रदान करता है।
ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (RIDF): नाबार्ड राज्य सरकारों को ग्रामीण सड़कों, पुलों, सिंचाई परियोजनाओं और स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण हेतु RIDF से भारी फंड देता है।
स्वयं सहायता समूह-बैंक लिंकेज: नाबार्ड ने SHG-बैंक लिंकेज कार्यक्रम शुरू करके करोड़ों गरीब ग्रामीण महिलाओं को माइक्रोफाइनेंस और बैंकिंग से जोड़ा है।
वित्तीय समावेशन की योजना: RBI और नाबार्ड ने मिलकर जनधन योजना, बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (BC) और डिजिटल भुगतान से अंतिम व्यक्ति तक बैंक पहुंचाए हैं।
प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र को ऋण (PSL): RBI ने बैंकों के लिए अपने कुल कर्ज का 40% कृषि, छोटे उद्योगों और कमजोर वर्गों (PSL) को देना अनिवार्य किया है।
आर्थिक स्थिरता के स्तंभ: RBI मौद्रिक स्थिरता सुनिश्चित करता है जबकि नाबार्ड ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करके समावेशी राष्ट्रीय विकास तय करता है।