सुधारों की आवश्यकता: भारतीय चुनाव प्रणाली से धनबल, बाहुबल, जातिवाद, फर्जी मतदान और चुनावी भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए निरंतर सुधारों की मांग रही है।
तारकुंडे समिति (1974): जयप्रकाश नारायण द्वारा गठित इस समिति ने चुनाव खर्च की सीमा और निर्वाचन आयोग को तीन सदस्यीय बनाने की पहली सिफारिश की थी।
दिनेश गोस्वामी समिति (1990): इसने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के प्रयोग, चुनाव याचिकाओं के त्वरित निपटारे और बूथ कैप्चरिंग पर सख्त कानून की सिफारिश की।
मतदान की आयु 18 वर्ष: 61वें संविधान संशोधन अधिनियम (1988) द्वारा मतदान की न्यूनतम आयु सीमा को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया।
EVM और VVPAT की शुरुआत: मतदान में पारदर्शिता लाने और फर्जी वोटिंग रोकने के लिए पूरे देश में EVM और पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) अनिवार्य की गई।
आपराधिक पृष्ठभूमि का प्रकटीकरण: सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर उम्मीदवारों के लिए अपनी संपत्ति, देनदारियों और आपराधिक मामलों का हलफनामा देना कानूनी रूप से अनिवार्य हुआ।
नोटा (NOTA) का विकल्प: 2013 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मतदाताओं को ‘इनमें से कोई नहीं’ (None of the Above) का लोकतांत्रिक विकल्प दिया गया।
दोषी जन-प्रतिनिधियों की अयोग्यता: लिली थॉमस केस (2013) के अनुसार, 2 साल या उससे अधिक की सजा पाने वाले सांसद/विधायक की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द होती है।
इलेक्टोरल बॉन्ड का निरस्तीकरण: 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित कर दलों के चंदे में पारदर्शिता लाने का ऐतिहासिक फैसला दिया।
आदर्श आचार संहिता को सख्ती: चुनाव आयोग ने चुनाव के दौरान सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और भड़काऊ भाषणों पर रोक लगाने के लिए कड़े नियम बनाए हैं।
प्रचार अवधि में कटौती: चुनाव प्रचार की औपचारिक अवधि को 21 दिनों से घटाकर 14 दिन कर दिया गया, जिससे फिजूलखर्ची और तनाव कम हुआ।
सीईसी चयन में सुधार: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष बनाने के लिए चयन समिति में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता को शामिल किया गया।
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव‘ की बहस: बार-बार चुनाव होने से होने वाले भारी खर्च और नीतिगत रुकावटों को रोकने के लिए एक साथ चुनाव कराने पर चर्चा जारी है।
वोटर आईडी का आधार से जुड़ाव: फर्जी और दोहरे मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाने के लिए चुनावी पहचान पत्र (EPIC) को आधार से जोड़ने की पहल हुई।
समान अवसर (Level Playing Field): सभी सुधारों का मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि गरीब से गरीब नागरिक भी निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया में बिना भय के भाग ले सके।