शांतिपूर्ण उद्देश्यों से शुरुआत: होमी जहांगीर भाभा के नेतृत्व में भारत ने परमाणु ऊर्जा का उपयोग मुख्य रूप से विद्युत उत्पादन और वैज्ञानिक विकास हेतु शुरू किया था।
पोखरण-1 (1974): भारत ने ‘स्माइलिंग बुद्धा’ कोडनेम से अपना पहला भूमिगत शांतिपूर्ण परमाणु परीक्षण कर दुनिया को अपनी तकनीकी क्षमता का संदेश दिया था।
पोखरण-2 (1998): ‘ऑपरेशन शक्ति’ के तहत किए गए 5 परमाणु परीक्षणों के बाद भारत ने स्वयं को पूर्ण परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र घोषित किया।
‘नो फर्स्ट यूज‘ (NFU) सिद्धांत: भारत की नीति का मूल सिद्धांत है कि वह किसी भी देश पर पहले परमाणु हमला नहीं करेगा, केवल आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई करेगा।
गैर-परमाणु देशों पर हमले की मनाही: भारत ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी ऐसे देश के खिलाफ परमाणु हथियारों का उपयोग नहीं करेगा जो गैर-परमाणु शक्ति है।
विश्वसनीय न्यूनतम निवारक (Credible Minimum Deterrence): भारत का लक्ष्य असीमित हथियारों की दौड़ में शामिल होना नहीं, बल्कि संभावित दुश्मन के हमले को रोकने हेतु पर्याप्त क्षमता रखना है।
परमाणु कमान प्राधिकरण (NCA): भारत के परमाणु शस्त्रागार के उपयोग का अंतिम राजनीतिक निर्णय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली ‘राजनीतिक परिषद’ द्वारा ही लिया जाता है।
परमाणु त्रिकोण (Nuclear Triad): भारत के पास जमीन (अग्नि मिसाइल), हवा (लड़ाकू विमान) और पानी (आईएनएस अरिहंत पनडुब्बी) तीनों जगहों से परमाणु हमला करने की क्षमता है।
NPT और CTBT पर रुख: भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) और CTBT को भेदभावपूर्ण मानते हुए हस्ताक्षर करने से मना किया, क्योंकि ये असमानता बढ़ाती हैं।
कठोर निर्यात नियंत्रण: भारत ने मिसाइल और परमाणु तकनीक के अवैध प्रसार को रोकने के लिए अत्यंत कठोर और पारदर्शी राष्ट्रीय कानून बनाए हैं।
भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता (2008): इस ऐतिहासिक 123 समझौते ने भारत के वैश्विक परमाणु अलगाव को समाप्त कर असैन्य परमाणु व्यापार के रास्ते खोले।
NSG छूट और सदस्यता प्रयास: परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) ने भारत को विशेष छूट दी है, हालांकि भारत इसकी स्थायी सदस्यता के लिए निरंतर प्रयासरत है।
निर्यात नियंत्रण समूहों में प्रवेश: भारत MTCR, वासेनार अरेंजमेंट और ऑस्ट्रेलिया ग्रुप का पूर्ण सदस्य बन चुका है, जिससे उसकी रणनीतिक विश्वसनीयता बढ़ी है।
सार्वभौमिक निरस्त्रीकरण का समर्थक: भारत भेदभाव-रहित, सार्वभौमिक और चरणबद्ध परमाणु निरस्त्रीकरण की वैश्विक व्यवस्था का संयुक्त राष्ट्र में लगातार समर्थन करता है।
जिम्मेदार परमाणु शक्ति की छवि: एक गैर-NPT देश होने के बावजूद भारत ने अपने गैर-प्रसार रिकॉर्ड और संयम से एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति की पहचान बनाई है।