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चुनाव आयोग (Election Commission of India – ECI)

संवैधानिक प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 (राष्ट्रीय मतदाता दिवस) को एक स्थायी स्वायत्त निकाय के रूप में हुई थी।

अधिकार क्षेत्र: यह संसद (लोकसभा, राज्यसभा), राज्य विधानमंडलों (विधानसभा, विधान परिषद), राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पदों के चुनावों का संचालन और नियंत्रण करता है।

स्थानीय निकायों से अलग: यह पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनाव नहीं कराता; उनके लिए राज्यों में अलग ‘राज्य निर्वाचन आयोग’ की व्यवस्था है।

बहु-सदस्यीय निकाय: प्रारंभ में यह एक-सदस्यीय था, परंतु अक्टूबर 1993 से यह एक मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और दो अन्य चुनाव आयुक्तों वाला तीन-सदस्यीय निकाय बन गया।

आयुक्तों की नियुक्ति: मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा कानून के तहत गठित चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है।

समान शक्तियां और वेतन: मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य दो चुनाव आयुक्तों को सुप्रीम कोर्ट के जजों के समान शक्तियां, वेतन, भत्ते और दर्जा प्राप्त होता है।

कार्यकाल और आयु सीमा: चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने से 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है।

पद से हटाने की सुरक्षा: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह केवल संसद द्वारा विशेष बहुमत से महाभियोग प्रक्रिया द्वारा ही हटाया जा सकता है।

अन्य आयुक्तों की सुरक्षा: अन्य चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की औपचारिक सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा उनके पद से नहीं हटाया जा सकता।

राजनीतिक दलों का पंजीकरण: यह राजनीतिक दलों को जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 के तहत पंजीकृत करता है और उनके वोट प्रतिशत के आधार पर राष्ट्रीय/राज्यीय दर्जा देता है।

चुनाव चिह्नों का आवंटन: यह राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित करता है और दलों में विभाजन पर चुनाव चिह्न विवाद का अंतिम निपटारा करता है।

अर्ध-न्यायिक शक्तियां: चुनाव में भ्रष्ट आचरण या लाभ के पद के आधार पर सांसदों/विधायकों की अयोग्यता के मामलों में राष्ट्रपति/राज्यपाल को बाध्यकारी सलाह देता है।

आचार संहिता का क्रियान्वयन: चुनाव आयोग चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के आचरण को नियंत्रित करने के लिए आदर्श आचार संहिता लागू करता है।

अधिकारियों पर प्रतिनियुक्ति नियंत्रण: चुनाव अवधि के दौरान चुनाव कार्य में लगे सभी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी सीधे चुनाव आयोग की प्रतिनियुक्ति और नियंत्रण में होते हैं।

वैश्विक प्रतिष्ठा: भारतीय चुनाव आयोग को दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक चुनावी महाकुंभ को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण कराने के लिए वैश्विक सम्मान प्राप्त है।

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