लवणता की परिभाषा: प्रति 1,000 ग्राम (1 किग्रा) समुद्री जल में घुले हुए कुल ठोस लवणों की मात्रा (ग्राम); इसे प्रति हजार भाग (‰ या ppt) में व्यक्त करते हैं।
औसत लवणता एवं संघटन: खुले महासागरों की औसत लवणता लगभग 35‰ है; इसमें सर्वाधिक मात्रा सोडियम क्लोराइड (77.7%) और मैग्नीशियम क्लोराइड (10.9%) की होती है।
वाष्पीकरण एवं वर्षण: उच्च वाष्पीकरण लवणता को बढ़ाता है, जबकि मूसलाधार वर्षा और ताजे पानी का मिलना लवणता को कम करता है।
नदियों का मीठा जल: गंगा, अमेजन और कांगो जैसी विशाल नदियों के मुहानों पर मीठे जल के निरंतर प्रवाह के कारण तटीय लवणता काफी कम पाई जाती है।
उपोष्ण उच्च दाब पेटियां: 20° से 30° अक्षांशों पर स्वच्छ आकाश, उच्च तापमान और कम वर्षा के कारण दुनिया में सर्वाधिक महासागरीय लवणता दर्ज की जाती है।
भूमध्यरेखीय लवणता: यहाँ तापमान अधिक होने के बावजूद प्रतिदिन होने वाली भारी संवहनीय वर्षा के कारण लवणता उपोष्ण कटिबंधों की तुलना में कम (35‰) रहती है।
हैलोक्लाइन (Halocline): महासागर में गहराई के साथ लवणता में तीव्र परिवर्तन दर्शाने वाले मध्यवर्ती संक्रमण क्षेत्र को हैलोक्लाइन परत कहा जाता है।
अरब सागर बनाम बंगाल की खाड़ी: अरब सागर में उच्च वाष्पीकरण और कम नदी जल के कारण अधिक लवणता है, जबकि बंगाल की खाड़ी में नदियों के आगमन से लवणता कम है।
सर्वाधिक लवणता वाले जल निकाय: तुर्किये की वान झील (Lake Van – 330‰), मृत सागर (Dead Sea – 238‰) और यूएसए की ग्रेट साल्ट लेक (220‰) विश्व में सर्वाधिक खारे हैं।
पारिस्थितिक एवं भौतिक प्रभाव: लवणता समुद्री जल के घनत्व, जमने के बिंदु (Freezing point), क्वथनांक और ऊर्ध्वाधर महासागरीय परिसंचरण को सीधे नियंत्रित करती है।