सूर्यताप की परिभाषा: सूर्य से लघु तरंगों (Shortwave Radiation) के रूप में पृथ्वी द्वारा प्राप्त की जाने वाली कुल सौर विकिरण ऊर्जा को ‘सूर्यताप’ (Insolation) कहा जाता है।
सौर स्थिरांक (Solar Constant): वायुमंडल के बाह्य छोर पर लंबवत धरातल द्वारा प्रति मिनट प्रति वर्ग सेंटीमीटर प्राप्त ऊर्जा लगभग 1.94 कैलोरी (1361 W/m²) होती है।
आपतन कोण (Angle of Incidence): भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणें लंबवत पड़ने से अधिक संकेंद्रित ऊर्जा मिलती है, जबकि ध्रुवों की ओर किरणें तिरछी होने से ऊर्जा फैल जाती है।
दिन की अवधि (Duration of Day): दिन जितना लंबा होगा, सूर्यताप की प्राप्ति उतनी ही अधिक होगी; ग्रीष्मकाल और उच्च अक्षांशों में दिन की लंबाई ऊर्जा वितरण तय करती है।
वायुमंडलीय पारदर्शिता: स्वच्छ आकाश वाले उपोष्ण कटिबंधीय मरुस्थलों में अधिकतम सूर्यताप प्राप्त होता है, जबकि बादलों से घिरे भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में कम ऊर्जा पहुंचती है।
धरातलीय ढाल एवं उन्मुखता: सूर्य की दिशा की ओर उन्मुख पर्वतीय ढाल (जैसे हिमालय के दक्षिणी ढाल) विपरीत दिशा वाले ढालों की तुलना में अधिक सौर ताप प्राप्त करते हैं।
उपसौर एवं अपसौर (Perihelion & Aphelion): 3 जनवरी को पृथ्वी सूर्य के निकटतम (उपसौर) तथा 4 जुलाई को सबसे दूर (अपसौर) होती है, जिससे 7% सूर्यताप में अंतर आता है।
अक्षांशीय वितरण: भूमध्य रेखा से दोनों ध्रुवों की ओर जाने पर सूर्यताप की कुल वार्षिक प्राप्ति में निरंतर और क्रमिक कमी दर्ज की जाती है।
जलवायु एवं पवन तंत्र: सूर्यताप का असमान वितरण ही वैश्विक वायुदाब पेटियों, ग्रहीय पवनों और महासागरीय धाराओं के परिसंचरण की प्राथमिक चालक शक्ति है।
पारिस्थितिक प्रभाव: सूर्यताप प्रकाश संश्लेषण द्वारा वैश्विक प्राथमिक उत्पादकता (Biomass), जल चक्र के वाष्पीकरण और ऋतु परिवर्तनों के संपूर्ण जैविक चक्र को ऊर्जा देता है।