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Desert Erosional Landforms Mechanism (मरुस्थलीय अपरदन प्रक्रियाएं एवं यांत्रिकी)

अपवाहन (Deflation): तीव्र एवं अशांत पवनों द्वारा मरुस्थलीय धरातल से असंगठित, सूखी और बारीक धूल व बालू के कणों को उठाकर दूर बहा ले जाना।

अपघर्षण (Abrasion): पवन में तैरते हुए कठोर क्वार्ट्ज रेत के कण जब प्राकृतिक सैंडब्लास्टिंग (Sandblasting) की तरह चट्टानों से टकराकर उन्हें घिसते और तराशते हैं।

ऊंचाई सीमा (1-2 मीटर): भारी रेत के कण जमीन से 1 से 2 मीटर से अधिक ऊपर नहीं उठ पाते, इसलिए पवन अपघर्षण धरातल के ठीक ऊपर सर्वाधिक तीव्र होता है।

सन्निघर्षण (Attrition): पवन द्वारा उड़ाए जा रहे रेत और कंकड़ के कण हवा में आपस में टकराकर और अधिक गोल, चिकने तथा महीन चूर्ण में बदलते हैं।

उत्परिवर्तन (Saltation): मध्यम आकार के रेत कण धरातल पर घिसटने के बजाय हवा में छोटी-छोटी छलांग लगाते और उछलते हुए आगे बढ़ते हैं।

सतही सर्पण (Surface Creep): भारी रेत और बजरी के कण जो हवा में नहीं उछल सकते, अन्य कणों के टकराने के धक्के से धरातल पर लुढ़कते हैं।

निलंबन (Suspension): अत्यंत सूक्ष्म धूल और मिट्टी के कण हवा के प्रवाह में तैरते हुए हजारों किलोमीटर दूर तक वायुमंडल में उड़ जाते हैं।

यांत्रिक अपक्षय का सहयोग: अत्यधिक दैनिक तापांतर और पाले की क्रिया चट्टानों को पहले तोड़ती है, जिससे पवन को उड़ाने के लिए तैयार मलबा मिलता है।

आकस्मिक बाढ़ (Flash Floods): शुष्क क्षेत्रों में कभी-कभार होने वाली मूसलाधार वर्षा ‘शीट वॉश’ बनाती है, जो वाडी (Wadi) और पेडिमेंट कटाव में पवन से भी तेज काम करती है।

पेडीप्लेन निर्माण (Pediplanation): पेडिमेंट्स के समानांतर पीछे हटने और इन्सेलवर्गों के घिसने से शुष्क चक्र की अंतिम अवस्था में विस्तृत समतल अपरदित मैदान बनता है।

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