पवन की अपरदन क्षमता: वनस्पति की भारी कमी और शुष्कता के कारण गर्म मरुस्थलों में पवन सबसे प्रमुख भू-आकृतिक और अपरदनात्मक कारक बन जाती है।
छत्रक शैल (Mushroom Rock): पवन धरातल के निकट (1 मीटर तक) भारी रेत कणों से अधिक अपघर्षण करती है; जिससे चट्टान का निचला हिस्सा संकरा और शीर्ष छतरी जैसा चौड़ा रहता है।
इन्सेलवर्ग (Inselberg): विस्तृत मरुस्थलीय समतल मैदान के बीच अचानक सीधे खड़े कठोर प्रतिरोधी चट्टानों के गोल, अलग-थलग अवशेषी टीले (जैसे उलुरु)।
जुगेन (Zeugen): जब क्षैतिज रूप से व्यवस्थित कठोर और कोमल चट्टानों में जोड़ कटते हैं, तो दवात या ढक्कनदार मेज जैसी चपटी स्थलाकृतियां बनती हैं।
यार्डांग (Yardangs): जब कठोर और कोमल चट्टानें पवन की दिशा के समानांतर लंबवत खड़ी हों, तो कोमल शैल कटकर गहरी संकरी नालियां और खांचे बनाती हैं।
ड्रेकांटर / वेंटिफैक्ट्स (Ventifacts): पवन द्वारा उड़ाए गए रेत के निरंतर प्रहार से तराशे गए तीन या अधिक सपाट फलकों वाले चिकने, नुकीले कंकड़-पत्थर।
अपवाहन गर्त (Deflation Hollows): तीव्र पवनों द्वारा धरातल से ढीली रेत को उड़ा ले जाने से बने विशाल उथले गड्ढे (जैसे मिस्र का कतारा गर्त)।
मरुद्यान (Oasis): जब अपवाहन गर्त इतना गहरा हो जाता है कि वह भूमिगत जल स्तर (Water Table) तक पहुँच जाता है, तो वहाँ जल व वनस्पति युक्त नखलिस्तान बनता है।
मेसा और ब्यूटे (Mesa and Butte): कठोर क्षैतिज शीर्ष वाली चपटी मेजनुमा पहाड़ियों को ‘मेसा’ और उनके अपरदन से बने छोटे संकरे खंभों को ‘ब्यूटे’ कहते हैं।
डेजर्ट पेवमेंट (Desert Pavement): पवन द्वारा सारी बारीक रेत उड़ा ले जाने के बाद धरातल पर केवल भारी कंकड़-पत्थरों की बची हुई चिकनी, मोजेक जैसी फर्श।