अंतर्जात बल की परिभाषा: पृथ्वी के आंतरिक भाग से उत्पन्न होने वाले वे भूगर्भीय बल जो धरातल पर विषमताओं, उच्चावच और नई स्थलाकृतियों का निर्माण करते हैं।
ऊर्जा के प्रमुख स्रोत: पृथ्वी के आंतरिक रेडियोधर्मी क्षय से उत्पन्न ऊष्मा, घूर्णन व ज्वारीय घर्षण और पृथ्वी निर्माण के समय की अवशिष्ट आदिम ऊष्मा इसके मुख्य ऊर्जा स्रोत हैं।
पटल विरूपणी बल (Diastrophic Forces): अत्यधिक मंद गति से कार्य करने वाले बल जो लाखों वर्षों में भूपर्पटी के बड़े भागों को मोड़ते, उठाते या विस्थापित करते हैं।
महादेशजनक संचलन (Epeirogenic): यह लंबवत दिशा में कार्य करने वाला महाद्वीप-निर्माणकारी संचलन है, जिसके कारण भू-भाग ऊपर उठता (उभार) या नीचे धंसता (अवतलन) है।
पर्वत-निर्माणकारी संचलन (Orogenic): यह क्षैतिज रूप से कार्यरत विवर्तनिक संपीड़न व तनाव बल है; संपीड़न से वलित पर्वत और तनाव मूलक खिंचाव से भ्रंश घाटियां बनती हैं।
आकस्मिक बल (Catastrophic Forces): भू-पर्पटी में अचानक व तीव्र गति से होने वाली विवर्तनिक घटनाएं, जो कुछ ही सेकंड या मिनटों में भारी विनाशकारी परिवर्तन लाती हैं।
ज्वालामुखीयता (Volcanism): आंतरिक पिघले मैग्मा और गैसों का सतह पर आना; यह नवीन क्रस्ट, लावा पठार, शील्ड ज्वालामुखी और अंतर्वेधी संरचनाओं का निर्माण करता है।
भूकंपीय घटनाएं (Earthquakes): विवर्तनिक भ्रंश रेखाओं पर अचानक ऊर्जा मुक्त होने से उत्पन्न प्रघाती तरंगे, जो धरातलीय दरारें और भूस्खलन जैसी भू-आकृतियों को जन्म देती हैं।
भूगर्भीय तनाव एवं भ्रंशन: तनाव बलों के प्रभाव से चट्टानी परतों में दरारें और विस्थापन होता है, जिससे भ्रंशोत्थ पर्वत (Block Mountains) और रिफ्ट घाटियां बनती हैं।
स्थलाकृतिक विषमता निर्माण: अंतर्जात बल लगातार सतह को ऊपर उठाकर असमानता उत्पन्न करते हैं, जिसे समतल करने का कार्य बाद में बहिर्जात प्रक्रियाएं करती हैं।