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Intrusive and Extrusive Volcanic Landforms (अंतर्वेधी एवं बहिर्वेधी भू-आकृतियां)

अंतर्वेधी स्थलाकृतियां (Intrusive): जब मैग्मा भूपर्पटी के बाहर निकलने से पहले ही आंतरिक दरारों व परतों के बीच ठंडा होकर ठोस शैल में जम जाता है।

बैथोलिथ (Batholith): मैग्मा कक्ष के जमने से पाताल में निर्मित यह सबसे विशाल, अनियमित आकार का गुंबदनुमा ग्रेनाइट पिंड है, जो पर्वतों की जड़ बनाता है।

लैकोलिथ (Laccolith): पर्पटी की क्षैतिज परतों के बीच मैग्मा के गुंबदाकार उभार के रूप में जमने से बनी छतरीनुमा अंतर्वेधी आकृति है जिसका तल समतल होता है।

लोपोलिथ (Lopolith): जब अंतर्वेधी मैग्मा किसी उथले बेसिन या कटोरीनुमा (तश्तरीनुमा) अवतलन संरचना में जमकर ठोस रूप धारण करता है।

फैकोलिथ (Phacolith): विवर्तनिक संपीडन से मुड़ी चट्टानों की अपनति (Anticline) के शीर्ष और अभिनति (Syncline) के गर्त में जमे मैग्मा की लहरदार आकृति है।

सिल एवं शीट (Sill and Sheet): अवसादी चट्टानों की समानांतर क्षैतिज परतों के बीच मैग्मा का चादर के रूप में जमना; मोटी परत को सिल, पतली को शीट कहते हैं।

डाइक (Dyke): जब मैग्मा चट्टानों की परतों को लंबवत या लगभग समकोण पर काटते हुए संकरी दरारों में जमता है, तो दीवार जैसी डाइक बनती है।

बहिर्वेधी लावा पठार (Extrusive): दरारी उद्गार से निकले अत्यधिक तरल बेसाल्ट लावा के कई सौ वर्ग किलोमीटर में जमने से समतल सीढ़ीदार पठार बनते हैं।

ज्वालामुखीय गुंबद (Lava Domes): अत्यधिक गाढ़े और अम्लीय सिलिका-युक्त मैग्मा के निकास नली के ठीक ऊपर जमकर ठोस टीले के रूप में खड़े होने से बनते हैं।

सिंडर शंकु (Cinder Cone): विस्फोटक उद्गार के दौरान हवा में उछले अंगारे, सिंडर, राख और पायरोक्लास्ट के निकास द्वार के चारों ओर जमा होने से बने छोटे शंक्वाकार टीले।

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