rankersnotes.com

भ्रष्टाचार निरोध (Anti-Corruption)

लोकतंत्र और विकास को खतरा: भ्रष्टाचार प्रशासनिक दक्षता को नष्ट करता है, सरकारी योजनाओं के फंड को लूटता है और गरीब जनता को उसके हकों से वंचित करता है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988: यह भारत में रिश्वतखोरी, लोक सेवकों द्वारा अवैध संपत्ति अर्जित करने और पद के दुरुपयोग के खिलाफ सबसे प्रमुख आपराधिक कानून है।

2018 का संशोधन: इस संशोधन ने रिश्वत देने वाले को भी आपराधिक श्रेणी में शामिल किया और ईमानदार अधिकारियों को नीतिगत निर्णयों पर पूर्व-स्वीकृति की सुरक्षा दी।

केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC): संथानम समिति की सिफारिश पर 1964 में गठित CVC केंद्र सरकार में भ्रष्टाचार रोकने और सतर्कता निगरानी की सर्वोच्च संस्था है।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI): दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 के तहत संचालित CBI देश में भ्रष्टाचार और बड़े आर्थिक घोटालों की प्रमुख जांच एजेंसी है।

लोकपाल और लोकायुक्त कानून: उच्च राजनीतिक और प्रशासनिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच के लिए यह संस्थागत तंत्र स्थापित किया गया।

धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA 2002): यह कानून मनी लॉन्ड्रिंग और काले धन को रोकने तथा भ्रष्टाचार से बनाई गई संपत्तियों को जब्त करने की सख्त शक्ति देता है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED): यह केंद्रीय वित्त मंत्रालय की एजेंसी है जो PMLA और FEMA के तहत हवाला कारोबार और वित्तीय भ्रष्टाचार की कड़ी जांच करती है।

सूचना का अधिकार (RTI): RTI ने सरकारी फाइलों, टेंडरों और निर्णयों को जनता के सामने लाकर नौकरशाही के भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अंकुश लगाया है।

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और JAM: जनधन, आधार और मोबाइल की तिकड़ी से सरकारी सब्सिडी सीधे बैंक खातों में पहुंचती है, जिससे बिचौलियों की घूसखोरी समाप्त हुई।

व्हिसलब्लोअर संरक्षण अधिनियम: भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ करने वाले साहसी नागरिकों और कर्मचारियों को सुरक्षा देने के लिए 2014 में यह कानून पारित किया गया।

ई-प्रोक्योरमेंट और GeM पोर्टल: सरकारी खरीद और टेंडरों को ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ (GeM) पर ऑनलाइन करने से कमीशनखोरी और मिलीभगत में भारी गिरावट आई है।

बेनामी संपत्ति कानून: बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन अधिनियम 2016 दूसरे के नाम पर खरीदी गई अघोषित संपत्तियों को जब्त करने का सख्त अधिकार देता है।

नागरिक समाज और सोशल ऑडिट: मीडिया, सतर्क नागरिक और ग्राम पंचायतों में सोशल ऑडिट के माध्यम से सरकारी विकास कार्यों के खर्चों की सीधी निगरानी हो रही है।

सदाचार और शुचिता: शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति और डिजिटल पारदर्शिता के बल पर ही भारत को भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन की ओर ले जाया जा सकता है।

Leave a Comment