संवैधानिक दायित्व: अनुच्छेद 48A (DPSP) राज्य को पर्यावरण संरक्षण का निर्देश देता है, जबकि अनुच्छेद 51A(g) के तहत यह हर नागरिक का मौलिक कर्तव्य है।
जलवायु परिवर्तन का संकट: वैश्विक तापमान वृद्धि, अनियंत्रित मौसम, ग्लेशियरों का पिघलना और समुद्र स्तर का बढ़ना भारत की कृषि और तटीय सुरक्षा के लिए चुनौती है।
वायु प्रदूषण की समस्या: विशेषकर उत्तरी भारत और दिल्ली-NCR में पराली जलाने, औद्योगिक धुएं और वाहनों के उत्सर्जन से वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक हो जाता है।
जल संकट और प्रदूषण: भूजल का अत्यधिक दोहन, सूखती नदियां और औद्योगिक कचरे से गंगा, यमुना जैसी प्रमुख नदियों का प्रदूषित होना गंभीर पर्यावरणीय चिंता है।
वनों की कटाई और जैव विविधता: अनियंत्रित शहरीकरण और खनन के कारण जंगलों का कटना वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और पारिस्थितिकी संतुलन को नष्ट कर रहा है।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986: भोपाल गैस त्रासदी के बाद बना यह देश का अम्ब्रेला कानून है, जो प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण मानकों को नियंत्रित करता है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT): पर्यावरण से जुड़े मुकदमों और क्षतिपूर्ति के त्वरित व विशेषज्ञ निपटारे के लिए 2010 में NGT की स्थापना एक विशेष अदालत के रूप में हुई।
वन और वन्यजीव कानून: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 और वन संरक्षण अधिनियम 1980 देश के वनों, अभयारण्यों और संकटापन्न जीवों को कठोर कानूनी सुरक्षा देते हैं।
नमामि गंगे और नदी सफाई: गंगा और उसकी सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त करने और उनका पारिस्थितिकी तंत्र सुधारने के लिए एकीकृत मिशन चल रहे हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य: भारत ने सौर ऊर्जा (अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन), पवन ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन में विश्व स्तर पर अग्रणी लक्ष्य तय किए हैं।
पंचामृत और नेट-जीरो संकल्प: कॉप-26 (COP26) में भारत ने 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को ‘नेट-जीरो’ (शून्य) करने का ऐतिहासिक वैश्विक संकल्प लिया है।
एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध: प्लास्टिक कचरे के पहाड़ों से निपटने के लिए भारत सरकार ने देश भर में सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग पर कड़ा प्रतिबंध लगाया है।
पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA): किसी भी बड़े औद्योगिक, खनन या बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले उसके पर्यावरणीय प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन अनिवार्य है।
लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (LiFE): पर्यावरण रक्षा के लिए प्रधानमंत्री द्वारा ‘मिशन लाइफ’ शुरू किया गया, जो व्यक्तिगत व्यवहार में पर्यावरण-अनुकूल आदतें अपनाने पर बल देता है।
सतत विकास (Sustainable Development): भावी पीढ़ियों के अस्तित्व के लिए आर्थिक प्रगति और प्रकृति के संरक्षण के बीच संतुलन साधना आज भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।