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राष्ट्रीय एकीकरण (National Integration)

अवधारणा और महत्व: राष्ट्रीय एकीकरण का अर्थ है विभिन्न धर्मों, जातियों, भाषाओं और क्षेत्रों के लोगों में एक राष्ट्र के प्रति साझा एकता और अपनेपन की भावना।

विविधता में एकता: भारत की ताकत उसकी अतुल्य विविधता में है, जहाँ अनेक संस्कृतियां और भाषाएं मिलकर एक साझी भारतीय पहचान का निर्माण करती हैं।

राष्ट्रीय एकता परिषद (NIC): 1961 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में सांप्रदायिकता, जातिवाद और क्षेत्रवाद से निपटने के लिए NIC का गठन किया गया था।

संविधान: एकता का सूत्र: एकल नागरिकता, एकीकृत न्यायपालिका, अखिल भारतीय सेवाएं और एक संविधान पूरे देश को प्रशासनिक व कानूनी रूप से जोड़ते हैं।

भाषा संबंधी विवाद: हिंदी को राजभाषा बनाने के साथ-साथ संविधान की 8वीं अनुसूची में 22 प्रमुख भारतीय भाषाओं को मान्यता देकर भाषाई सौहार्द बनाया गया।

त्रि-भाषा सूत्र (Three-Language Formula): शिक्षा में राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा, हिंदी और अंग्रेजी सिखाने का त्रि-भाषा फार्मूला अपनाया गया।

‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत‘: विभिन्न राज्यों और संस्कृतियों के बीच आपसी समझ, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जुड़ाव बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की यह विशेष पहल है।

भौगोलिक और डिजिटल जुड़ाव: राष्ट्रीय राजमार्गों, रेलवे, उड़ानों और डिजिटल कनेक्टिविटी के अभूतपूर्व विस्तार ने दूरदराज के क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ दिया है।

अलगाववाद पर प्रहार: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति और पूर्वोत्तर में शांति समझौतों ने देश की क्षेत्रीय अखंडता को अत्यधिक सुदृढ़ किया है।

सशस्त्र बलों की भूमिका: भारतीय सेना और केंद्रीय बल धर्म व क्षेत्र से ऊपर उठकर देश की रक्षा करते हैं और राष्ट्रीय एकता के सबसे बड़े प्रतीक हैं।

सांस्कृतिक और तीर्थयात्रा परंपरा: प्राचीन काल से ही चार धाम यात्रा, कुंभ मेला और राष्ट्रीय उत्सव पूरे भारत के लोगों को एक सूत्र में पिरोते रहे हैं।

सिनेमा और खेल की भूमिका: क्रिकेट, ओलंपिक खेलों में भारतीय टीम की जीत और भारतीय सिनेमा पूरे राष्ट्र में एक साथ राष्ट्रीय गौरव की भावना भरते हैं।

आर्थिक एकीकरण (GST): ‘एक राष्ट्र, एक कर’ (GST) और ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ जैसी आर्थिक नीतियों ने देश के आर्थिक एकीकरण को गति दी है।

अंतर-राज्य परिषद (अनुच्छेद 263): राज्यों और केंद्र के बीच विवादों को सुलझाने और नीतियों में तालमेल बैठाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक मंच है।

अखंड भारत का निर्माण: राष्ट्रीय एकीकरण कोई स्थिर स्थिति नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जो राष्ट्र की संप्रभुता और सुरक्षा की आधारशिला है।

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