क्षेत्रवाद की परिभाषा: राष्ट्रहित की तुलना में अपने विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र, राज्य या भाषा के प्रति अत्यधिक व संकीर्ण निष्ठा रखना क्षेत्रवाद कहलाता है।
क्षेत्रवाद के कारण: आर्थिक असमानता, संसाधनों का असंतुलित विकास, भाषाई विविधता और ‘भूमिपुत्र’ (Sons of the Soil) की राजनीति इसके मुख्य कारण हैं।
जातिवाद की राजनीति: चुनाव में जातियों के आधार पर टिकट वितरण, मतदान गोलबंदी और जातिगत ध्रुवीकरण भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विसंगति है।
जातिगत पहचान का उपयोग: राजनीतिक दल अपने वोट बैंक सुरक्षित करने के लिए जातियों के सम्मेलन कराते हैं, जिससे सामाजिक विभाजन और गहरा होता है।
सांप्रदायिकता का अर्थ: अपने धर्म को अन्य धर्मों से श्रेष्ठ मानना और राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं का शोषण कर नफरत फैलाना सांप्रदायिकता है।
सांप्रदायिक दंगों का खतरा: धार्मिक ध्रुवीकरण से देश में दंगे, सामाजिक अविश्वास और कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं जो धर्मनिरपेक्षता पर चोट करती हैं।
आतंकवाद की गंभीर चुनौती: राजनीतिक या वैचारिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए निर्दोष लोगों पर हिंसा और आतंक का इस्तेमाल करना आतंकवाद का स्वरूप है।
सीमा पार आतंकवाद: भारत दशकों से पाकिस्तान प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हमलों का मजबूती से सामना करता रहा है।
वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद): देश के कई मध्य और पूर्वी जनजातीय इलाकों में आदिवासियों के पिछड़ेपन का फायदा उठाकर नक्सली हिंसा फैलाई जाती रही है।
पूर्वोत्तर में उग्रवाद: पूर्वोत्तर राज्यों में नृजातीय पहचान, घुसपैठ और स्वायत्तता की मांगों को लेकर कई उग्रवादी संगठन दशकों तक सक्रिय रहे हैं।
आर्थिक विकास में रुकावट: ये चारों बुराइयां देश के विकास, विदेशी निवेश, पर्यटन और औद्योगिक प्रगति को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं।
संवैधानिक प्रावधान: संविधान का अनुच्छेद 15 धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव रोकता है और बंधुत्व की भावना को बढ़ावा देता है।
कठोर सुरक्षा कानून: आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए UAPA (गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) और NIA जैसी संस्थाएं बनाई गई हैं।
जागरूकता और शिक्षा: इन संकीर्ण प्रवृत्तियों को केवल पुलिस से नहीं, बल्कि समावेशी शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रोजगार सृजन से ही समाप्त किया जा सकता है।
अखंडता का संकल्प: इन आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से पार पाकर ही भारत एक मजबूत, एकजुट और विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित हो सकता है।