संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 163): राज्यपाल को उनके कार्यों में सलाह और सहायता देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका मुखिया मुख्यमंत्री होगा।
मंत्रियों की नियुक्ति: मुख्यमंत्री की औपचारिक अनुशंसा पर राज्यपाल द्वारा अन्य राज्य मंत्रियों की नियुक्ति और उनके विभागों का आवंटन किया जाता है।
मंत्रियों की तीन श्रेणियां: राज्य मंत्रिपरिषद में भी केंद्र की भांति तीन स्तर होते हैं— कैबिनेट मंत्री (प्रमुख विभाग), राज्य मंत्री (स्वतंत्र या सहयोगी), और उप-मंत्री।
राज्य कैबिनेट की सर्वोच्चता: कैबिनेट मंत्रियों का छोटा समूह राज्य की सर्वोच्च नीति-निर्धारक इकाई होता है, जो कानून और प्रशासन से जुड़े सभी बड़े फैसले लेता है।
आकार पर संवैधानिक सीमा (91वां संशोधन): राज्य मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं और न्यूनतम 12 से कम नहीं होगी।
सामूहिक उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 164(2)): राज्य मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्य की विधानसभा के प्रति जवाबदेह होती है; विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पास होने पर सबको इस्तीफा देना पड़ता है।
व्यक्तिगत उत्तरदायित्व: राज्य के सभी मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, जिसका व्यावहारिक अर्थ मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र बने रहने से है।
विधानमंडल सदस्यता की शर्त: मंत्री बनने के लिए राज्य विधानमंडल का सदस्य होना अनिवार्य है; यदि नहीं हैं, तो 6 महीने के भीतर चुनाव जीतकर सदस्यता लेनी होगी।
सदन में उपस्थित होने का अधिकार (अनुच्छेद 177): मंत्रियों को विधानमंडल के दोनों सदनों (यदि द्विसदनीय हो) की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का हक है, पर वोट अपने सदन में ही दे सकते हैं।
पद व गोपनीयता की शपथ: कार्यभार संभालने से पहले राज्यपाल मंत्रियों को पद की निष्ठा और विभागीय गोपनीयता की औपचारिक शपथ दिलाते हैं।
वेतन एवं भत्ते: राज्य के मंत्रियों के वेतन, भत्ते और सुविधाएं राज्य विधानमंडल द्वारा पारित अधिनियम के माध्यम से तय की जाती हैं।
राज्य नीतियों व बजट का निर्माण: राज्य का वार्षिक बजट तैयार करना, नई कल्याणकारी योजनाएं बनाना और विधानसभा में सरकारी विधेयक पेश करना मंत्रिपरिषद का मुख्य काम है।
राज्यपाल को दी गई सलाह की गोपनीयता: अनुच्छेद 163(3) के अनुसार, मंत्रियों द्वारा राज्यपाल को क्या सलाह दी गई, इसकी किसी भी न्यायालय में जांच नहीं की जा सकती।
राज्य सचिवालय का मार्गदर्शन: मंत्रिपरिषद के सदस्य राज्य सचिवालय (State Secretariat) के प्रशासनिक सचिवों की मदद से अपने-अपने विभागों की प्रशासनिक निगरानी करते हैं।
आपातकाल में स्थिति: राज्य में अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) लागू होते ही राज्य मंत्रिपरिषद को बर्खास्त कर दिया जाता है और प्रशासन राज्यपाल व सलाहकारों के अधीन आ जाता है।