राज्य का वास्तविक प्रमुख: संसदीय व्यवस्था के अनुरूप राज्यपाल राज्य का नाममात्र (de jure) प्रमुख होता है, जबकि मुख्यमंत्री वास्तविक कार्यपालिका (de facto) का प्रमुख होता है।
नियुक्ति (अनुच्छेद 164): राज्यपाल राज्य विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल या चुनाव बाद बने गठबंधन के नेता को राज्य का मुख्यमंत्री नियुक्त करता है।
सदन की सदस्यता: मुख्यमंत्री को राज्य विधानमंडल (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य होना अनिवार्य है; गैर-सदस्य को 6 माह के भीतर चुनाव जीतना होता है।
मंत्रियों का चयन और विभाग आवंटन: मुख्यमंत्री अपनी पसंद के मंत्रियों की सूची राज्यपाल को सौंपता है और उनके बीच विभागों का वितरण और उनमें फेरबदल करता है।
मंत्रिमंडल की बैठकों का नेतृत्व: वह राज्य कैबिनेट की बैठकों की अध्यक्षता करता है, नीतिगत निर्णय लेता है और सभी सरकारी विभागों में समन्वय सुनिश्चित करता है।
राज्यपाल और कैबिनेट के बीच कड़ी (अनुच्छेद 167): मुख्यमंत्री का संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन और विधायी प्रस्तावों की सभी जानकारियां राज्यपाल को दे।
विधानसभा का नेता: मुख्यमंत्री विधानसभा में सदन का नेता होता है; वह सरकार की प्रमुख नीतियों, बजट घोषणाओं और संकट के समय सरकार का बचाव करता है।
विधानसभा भंग करने का अधिकार: मुख्यमंत्री राज्यपाल को निर्धारित 5 वर्ष से पहले भी विधानसभा भंग कर मध्यावधि चुनाव कराने की सलाह दे सकता है।
राज्य योजना बोर्ड के अध्यक्ष: मुख्यमंत्री राज्य योजना बोर्ड के अध्यक्ष होते हैं और राज्य के समग्र आर्थिक व सामाजिक विकास की रूपरेखा तैयार करते हैं।
राष्ट्रीय विकास में भूमिका: मुख्यमंत्री नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल और अंतर-राज्य परिषद की बैठकों में अपने राज्य के हितों का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रशासनिक तंत्र पर नियंत्रण: राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary), पुलिस महानिदेशक (DGP) और वरिष्ठ IAS/IPS अधिकारियों के तबादले व पदस्थापना में मुख्यमंत्री की भूमिका निर्णायक होती है।
जनता का मुख्य प्रतिनिधि: मुख्यमंत्री राज्य की जनता की समस्याओं, जन-आकांक्षाओं और क्षेत्रीय मांगों को पूरा करने वाला सर्वोच्च राजनीतिक चेहरा होता है।
सरकार का अस्तित्व मुख्यमंत्री पर निर्भर: मुख्यमंत्री का त्यागपत्र या आकस्मिक निधन पूरी राज्य मंत्रिपरिषद को स्वतः समाप्त कर देता है, क्योंकि वे सरकार का केंद्र बिंदु हैं।
कार्यकाल की अवधि: मुख्यमंत्री का कार्यकाल निश्चित नहीं होता; वह तब तक पद पर बना रहता है जब तक उसे विधानसभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त रहता है।
गठबंधन राजनीति में भूमिका: वर्तमान राजनीतिक परिवेश में मुख्यमंत्री विभिन्न गठबंधन सहयोगियों के बीच संतुलन बनाकर स्थिर सरकार चलाने की महत्वपूर्ण कला का संचालन करता है।