राष्ट्र का सर्वोच्च पद: अनुच्छेद 52 के अनुसार भारत का एक राष्ट्रपति होगा; वह भारत का प्रथम नागरिक, राष्ट्र का अध्यक्ष और एकता का प्रतीक होता है।
योग्यताएं (अनुच्छेद 58): वह भारत का नागरिक हो, कम से कम 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो और लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो।
निर्वाचक मंडल (Electoral College): राष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों और दिल्ली/पुदुचेरी/J&K विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य करते हैं (अनु. 54)।
चुनाव पद्धति (अनुच्छेद 55): इनका निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) तथा गुप्त मतदान द्वारा होता है।
कार्यकाल और शपथ: राष्ट्रपति का कार्यकाल पदभार ग्रहण से 5 वर्ष होता है (अनु. 56); उन्हें भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं (अनु. 60)।
महाभियोग प्रक्रिया (अनुच्छेद 61): संविधान के अतिक्रमण पर संसद के किसी भी सदन द्वारा 14 दिन के नोटिस और दोनों सदनों के दो-तिहाई बहुमत से महाभियोग लगाकर हटाया जा सकता है।
कार्यकारी शक्तियां: प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, राज्यपालों, महान्यायवादी, CAG, मुख्य चुनाव आयुक्त और सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति ही करते हैं।
सैन्य शक्तियां: राष्ट्रपति भारत के तीनों सशस्त्र बलों (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) का सर्वोच्च सेनापति (Supreme Commander) होता है।
विधायी शक्तियां: संसद का सत्र बुलाना, सत्रावसान करना, लोकसभा भंग करना और दोनों सदनों द्वारा पारित विधेयकों पर हस्ताक्षर कर कानून बनाना इनकी विधायी शक्ति है।
वीटो शक्तियां (अनुच्छेद 111): राष्ट्रपति को विधेयकों पर आत्यंतिक वीटो (Absolute), निलंबनकारी वीटो (Suspensive) और पॉकेट वीटो (Pocket Veto) का अधिकार प्राप्त है।
अध्यादेश शक्ति (अनुच्छेद 123): जब संसद का सत्र न चल रहा हो और त्वरित कानून जरूरी हो, तो राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकते हैं, जिसकी शक्ति कानून के समान होती है।
क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72): राष्ट्रपति किसी भी अपराध के लिए दोषी व्यक्ति की सजा को क्षमा (Pardon), कम (Commute), स्थगित या बदल सकते हैं, जिसमें मृत्युदंड भी शामिल है।
आपातकालीन शक्तियां: राष्ट्रपति को तीन प्रकार के आपातकाल लगाने की शक्ति है— राष्ट्रीय आपातकाल (अनु. 352), राष्ट्रपति शासन (अनु. 356) और वित्तीय आपातकाल (अनु. 360)।
सलाहकारी अधिकार (अनुच्छेद 143): राष्ट्रपति विधि या सार्वजनिक महत्व के किसी तथ्य संबंधी प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से कानूनी सलाह मांग सकते हैं, हालांकि वह बाध्यकारी नहीं होती।
संवैधानिक सीमाएं: 42वें और 44वें संशोधन के अनुसार, राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार ही कार्य करने के लिए बाध्य हैं।