संवैधानिक प्रावधान: संघ की कार्यपालिका संविधान के भाग V (अनुच्छेद 52 से 78) में और राज्य की कार्यपालिका भाग VI (अनुच्छेद 153 से 167) में वर्णित है।
संसदीय शासन का ढांचा: केंद्र और राज्य दोनों ही स्तरों पर ब्रिटिश मॉडल पर आधारित वेस्टमिंस्टर संसदीय कार्यपालिका की समान संरचना अपनाई गई है।
संघीय कार्यपालिका के घटक: संघ कार्यपालिका में मुख्य रूप से राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रिपरिषद और भारत का महान्यायवादी (Attorney General) शामिल होते हैं।
राज्य कार्यपालिका के घटक: राज्य कार्यपालिका में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य मंत्रिपरिषद और राज्य का महाधिवक्ता (Advocate General) मुख्य रूप से शामिल होते हैं।
संवैधानिक बनाम वास्तविक प्रमुख: केंद्र में राष्ट्रपति और राज्य में राज्यपाल केवल नाममात्र/संवैधानिक प्रमुख होते हैं, जबकि वास्तविक शक्तियां क्रमशः प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के पास होती हैं।
शक्तियों का समानांतर विभाजन: सातवीं अनुसूची के तहत संघ कार्यपालिका संघ सूची पर और राज्य कार्यपालिका राज्य सूची के विषयों पर अपने प्रशासनिक अधिकार का प्रयोग करती है।
समवर्ती सूची पर संतुलन: समवर्ती सूची पर केंद्र और राज्य दोनों कार्यपालिकाएं कार्य कर सकती हैं, परंतु टकराव की स्थिति में केंद्रीय कानून व निर्देश प्रभावी होते हैं।
अनुच्छेद 256 और 257: केंद्र सरकार को यह अधिकार है कि वह राज्यों को अपने कानूनों के अनुपालन और राष्ट्रीय महत्व के संचार साधनों की सुरक्षा हेतु निर्देश दे सकती है।
अध्यादेश जारी करने की शक्ति: संसद के सत्र में न होने पर राष्ट्रपति (अनुच्छेद 123) तथा विधानसभा सत्र में न होने पर राज्यपाल (अनुच्छेद 213) अध्यादेश जारी कर सकते हैं।
क्षमादान की शक्तियां: राष्ट्रपति (अनु. 72) मृत्युदंड और सैन्य अदालत सहित सभी सजाओं को क्षमा कर सकते हैं, जबकि राज्यपाल (अनु. 161) को मृत्युदंड क्षमा का अधिकार नहीं है।
मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह: राष्ट्रपति अनु. 74 के तहत केंद्रीय मंत्रिमंडल तथा राज्यपाल अनु. 163 के तहत राज्य मंत्रिमंडल की सहायता व सलाह से कार्य करते हैं।
सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत: केंद्रीय मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति (अनु. 75) तथा राज्य मंत्रिपरिषद अपनी-अपनी राज्य विधानसभा के प्रति (अनु. 164) सामूहिक रूप से जवाबदेह होती है।
राष्ट्रपति शासन का समन्वय: राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति अनुच्छेद 356 लगाकर राज्य कार्यपालिका को बर्खास्त कर सकते हैं।
सिविल सेवाओं का साझा ढांचा: अखिल भारतीय सेवाएं (IAS, IPS) केंद्र द्वारा भर्ती की जाती हैं परंतु वे राज्यों में सेवाएं देकर दोनों कार्यपालिकाओं को जोड़ती हैं।
सहकारी संघवाद का आधार: नीति आयोग, अंतर-राज्य परिषद और क्षेत्रीय परिषदों के माध्यम से संघ और राज्य कार्यपालिकाएं राष्ट्रीय विकास में मिलकर कार्य करती हैं।