rankersnotes.com

संवैधानिक विकास (Constitutional Development)

रेग्युलेटिंग एक्ट 1773: इसके तहत ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों को पहली बार नियमित किया गया और बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर-जनरल बनाया गया।

पिट्स इंडिया एक्ट 1784: इसने कंपनी के वाणिज्यिक और राजनीतिक कार्यों को अलग करते हुए नियंत्रण बोर्ड (Board of Control) और कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की व्यवस्था की।

चार्टर एक्ट 1813: इस अधिनियम द्वारा भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया, हालांकि चाय और चीन व्यापार जारी रहा।

चार्टर एक्ट 1833: इसने बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बना दिया और लॉर्ड विलियम बेंटिंक भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल बने।

चार्टर एक्ट 1853: इसने पहली बार गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी एवं प्रशासनिक कार्यों को अलग किया और खुली सिविल सेवा परीक्षा की शुरुआत की।

भारत सरकार अधिनियम 1858: 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश क्राउन ने शासन अपने हाथ में लिया और गवर्नर-जनरल का पद बदलकर वायसराय कर दिया गया।

भारतीय परिषद अधिनियम 1861: इसने कानून बनाने की प्रक्रिया में भारतीयों को शामिल करने और वायसराय को आपातकाल में अध्यादेश जारी करने का अधिकार दिया।

भारतीय परिषद अधिनियम 1892: इसके माध्यम से विधान परिषदों के सदस्यों को बजट पर चर्चा करने और कार्यपालिका से प्रश्न पूछने की सीमित अनुमति मिली।

मार्ले-मिंटो सुधार (1909): इसने केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों का विस्तार किया तथा पहली बार मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था लागू की।

मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919): इसने प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली लागू की और केंद्र में पहली बार द्विसदनीय विधायिका (राज्य परिषद और विधानसभा) स्थापित की।

साइमन कमीशन (1927): ब्रिटिश सरकार द्वारा 1919 के अधिनियम की समीक्षा के लिए गठित आयोग था, जिसमें कोई भारतीय सदस्य न होने पर विरोध हुआ।

नेहरू रिपोर्ट (1928): पंडित मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में भारतीयों द्वारा अपने संविधान निर्माण का पहला बड़ा प्रयास था, जिसमें डोमिनियन स्टेटस की मांग थी।

भारत सरकार अधिनियम 1935: इसने अखिल भारतीय संघ की स्थापना, प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर प्रांतीय स्वायत्तता और केंद्र में द्वैध शासन की व्यवस्था की।

अगस्त प्रस्ताव व क्रिप्स मिशन: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीयों का सहयोग पाने के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा संविधान सभा के गठन की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई।

कैबिनेट मिशन (1946): इसके तहत भारत के लिए संविधान सभा के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिसने स्वतंत्र भारत के संविधान के निर्माण की रूपरेखा तैयार की।

Leave a Comment